अमेरिका और ईरान के बीच अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में एक बड़ी प्रगति देखने को मिली है। दोनों देशों के बीच एक ड्राफ्ट मेमोरेंडम तैयार किया गया है जिसका मुख्य उद्देश्य आपसी तनाव को कम करना और एक स्थायी समझौते की ओर बढ़ना है। इस मसौदे के तहत अमेरिका इस बात पर सहमत हो गया है कि जब तक अंतिम समझौता यानी फाइनल डील नहीं हो जाती, तब तक वह ईरान पर किसी भी तरह के नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा। इसके बदले में ईरान ने परमाणु कार्यक्रम के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने पर सहमति जताई है। इसका अर्थ यह है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन या अपनी परमाणु सुविधाओं के विस्तार को फिलहाल रोक देगा।
होर्मुज स्ट्रेट का खुलना और नेवल ब्लॉकेड की समाप्ति
इस ड्राफ्ट मेमोरेंडम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा है। ईरान सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत फिर से खोलने के लिए तैयार हो गया है। इसके साथ ही अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नेवल ब्लॉकेड यानी नौसैनिक नाकेबंदी को हटा देगा। समझौते के अनुसार मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद अमेरिका नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा और इसे 30 दिनों के भीतर पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा। इस कदम से वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
वित्तीय प्रावधान और 25 बिलियन डॉलर की संपत्ति की रिहाई
वित्तीय मोर्चे पर भी इस समझौते में बड़े प्रावधान किए गए हैं और न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अमेरिका ईरान की 25 बिलियन डॉलर की फ्रीज की गई संपत्ति को रिलीज करने पर सहमत हो गया है। इस राशि को जारी करने के लिए डायरेक्ट कैश ट्रांसफर, क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग और फाइनेंशियल क्रेडिट लाइन जैसे माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा अमेरिका एक निश्चित समय सीमा के लिए ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों को भी हटा देगा जिससे तेहरान को अपना तेल बेचने और राजस्व प्राप्त करने की अनुमति मिल जाएगी। ड्राफ्ट मेमोरेंडम में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अंतिम समझौते के बाद ईरान पर लगे अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के सभी प्रतिबंधों को एक तय समय सारिणी के अनुसार हटा दिया जाएगा।
परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम स्टॉक पर नियंत्रण
परमाणु सुरक्षा के विषय पर तेहरान ने स्पष्ट किया है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। जब तक अंतिम समझौता नहीं हो जाता तब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति को बरकरार रखेगा और अमेरिका इस बात पर भी सहमत हुआ है कि भविष्य में होने वाले एक बड़े समझौते के तहत ईरान को अपनी जमीन पर मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक को कम करने की अनुमति दी जाएगी। ईरान के परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों और स्टॉक को संभालने के तरीकों पर मेमोरेंडम के 60 दिनों के भीतर विस्तृत बातचीत की जाएगी जिसे बाद में फाइनल एग्रीमेंट का हिस्सा बनाया जाएगा।
पुनर्निर्माण योजना और भविष्य की रणनीति
अमेरिका ने इस ड्राफ्ट मेमोरेंडम में यह भी प्रतिबद्धता जताई है कि वह अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के लिए एक पुनर्निर्माण और विकास योजना तैयार करेगा और इस योजना पर अगले 60 दिनों के भीतर तेहरान के साथ बातचीत की जाएगी और आपसी सहमति बनाई जाएगी। यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था को मुख्यधारा में लाने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस प्रकार यह मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है।