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ईरान-अमेरिका परमाणु समझौता: पाकिस्तान की मेजबानी में जिनेवा में होगी बड़ी डील

ईरान-अमेरिका परमाणु समझौता: पाकिस्तान की मेजबानी में जिनेवा में होगी बड़ी डील
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ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दोनों देशों के बीच होने वाली इस महत्वपूर्ण डील पर हस्ताक्षर करने के लिए स्विट्जरलैंड के शहर जिनेवा में एक बैठक प्रस्तावित की गई है। इस पूरे आयोजन की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस समारोह के लिए पाकिस्तान को मेजबान के रूप में चुना गया है। इसका अर्थ यह है कि बैठक की तमाम व्यवस्थाएं और आयोजन की जिम्मेदारी पाकिस्तान के पास होगी। इस घोषणा के बाद से ही कूटनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि जब मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है, तो यह बैठक इस्लामाबाद में क्यों नहीं आयोजित की जा रही है।

जिनेवा में होगा हस्ताक्षर समारोह

ईरान और अमेरिका के बीच होने वाले इस परमाणु समझौते के दौरान दोनों देशों का शीर्ष नेतृत्व मौजूद रह सकता है। चर्चा है कि ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान और अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समारोह में शामिल हो सकते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद इस बात की जानकारी दी है कि पाकिस्तान इस ऐतिहासिक समारोह की मेजबानी करेगा। हालांकि, यह सवाल बरकरार है कि इस्लामाबाद को इसके लिए क्यों नहीं चुना गया, जबकि समझौते को लेकर पहली बैठक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ही आयोजित की गई थी। मई के अंत में वहां दूसरी बैठक की तैयारी भी थी, लेकिन तब दोनों देशों के नेता वहां नहीं पहुंचे थे।

जिनेवा को चुनने के पीछे के तीन मुख्य कारण

इस बैठक के लिए जिनेवा को चुनने के पीछे तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं और पहला कारण यह है कि ईरान खुद इस डील पर हस्ताक्षर जिनेवा में ही करना चाहता था। इसके पीछे एक प्रतीकात्मक संदेश छिपा है। दरअसल, जब युद्ध की स्थिति बनी थी, तब अमेरिका और तेहरान के बीच समझौते के लिए जिनेवा में ही बैठक होनी थी, लेकिन उससे ठीक पहले अमेरिका ने हमला कर दिया था। अब ईरान इसी स्थान पर हस्ताक्षर करके यह दिखाना चाहता है कि अमेरिका को वहीं लौटना पड़ा जहां से उसने बातचीत छोड़ी थी। दूसरा कारण जिनेवा का ऐतिहासिक महत्व है। इसे शांति की राजधानी कहा जाता है क्योंकि यहाँ फ्रांस-वियतनाम और सोवियत संघ-अफगानिस्तान जैसे कई महत्वपूर्ण शांति समझौते हुए हैं। तीसरा सबसे बड़ा कारण सुरक्षा का है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा के मद्देनजर इस्लामाबाद को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता है। आखिरी बार साल 2006 में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति (जॉर्ज डब्ल्यू बुश) ने पाकिस्तान का दौरा किया था।

क्या है 14 सूत्रीय समझौता?

ईरान और अमेरिका के बीच यह एक 14 सूत्रीय अस्थायी समझौता है। इस समझौते की मुख्य शर्तों के अनुसार, अमेरिका अब ईरान पर कोई हमला नहीं करेगा। इसके बदले में ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलेगा। इसके अलावा, आने वाले समय में ईरान के यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर भी अमेरिका के साथ बातचीत की जाएगी। समझौते के तहत ईरान एनपीटी के प्रावधानों के अनुसार परमाणु हथियार न बनाने की औपचारिक घोषणा करेगा। इस घोषणा के बाद ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे और उसकी फ्रीज की गई संपत्तियों को भी अनफ्रीज कर दिया जाएगा।

300 अरब डॉलर की राहत और इजराइल का रुख

इस समझौते के तहत ईरान को बड़ी आर्थिक राहत देने की योजना है। ईरान को कुल 300 अरब डॉलर दिए जाने की तैयारी है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, ईरान को शुरुआती तौर पर अधिकांश पैसा खाड़ी देशों से प्राप्त होगा और समझौता पूरी तरह फाइनल होने के बाद अमेरिका उसे शेष राशि देगा। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ा अवरोध इजराइल की ओर से आया है। इजराइल ने इस समझौते को सिरे से नकार दिया है और इजराइल का स्पष्ट कहना है कि उसके सैनिक लेबनान को नहीं छोड़ने वाले हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति पूरी तरह खत्म होने पर संशय बना हुआ है।

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