अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सीजफायर समझौते को एक बड़े और व्यापक शांति समझौते में बदलने के उद्देश्य से ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करने के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच गए हैं। यह कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में हो रहा है जब मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। इस महत्वपूर्ण वार्ता में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर भी स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं और यह बातचीत वाशिंगटन और तेहरान के बीच महीनों तक चले संघर्ष के बाद 60-दिन के संघर्ष विराम फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए जाने के कुछ ही दिनों बाद आयोजित की जा रही है। हालांकि, लेबनान में जारी नई हिंसा और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव से इन कूटनीतिक कोशिशों में बाधा आने की आशंका बनी हुई है।
बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में गोपनीय वार्ता
एएनआई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह उच्च स्तरीय बातचीत स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आयोजित की जा रही है। यह स्थान दोनों पक्षों के बीच लगातार होने वाली गोपनीय बातचीत के लिए जाना जाता है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में जेडी वेंस के साथ वरिष्ठ दूत स्टीव विटकॉफ भी शामिल हैं और वहीं, ईरान ने अपनी ओर से शीर्ष राजनयिक और सुरक्षा अधिकारियों को इस वार्ता के लिए भेजा है। पाकिस्तान और कतर भी इस मध्यस्थता प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। स्विट्जरलैंड ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक तटस्थ और सुरक्षित मंच प्रदान किया है, जो अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण है।
परमाणु मुद्दे और लेबनान पर ध्यान
जॉइंट बेस एंड्रयूज से रवाना होने से पहले जेडी वेंस ने एएफपी को बताया कि उन्हें परमाणु मुद्दे और लेबनान सीजफायर के मुद्दे पर उम्मीद से अधिक प्रगति होने की संभावना दिख रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये दो सबसे बड़े विषय हैं जिन पर वर्तमान में ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। वेंस ने यह भी संकेत दिया कि वह इस बातचीत में केवल 1 या 2 दिन के लिए ही शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग को लागू करने पर उच्च स्तरीय बातचीत में हिस्सा लेंगे। यह बयान युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के संदर्भ में दिया गया है।
शांति की राह में बड़ी चुनौतियां
शांति वार्ताकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लेबनान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति है। हालांकि इजराइल और हिज्बुल्लाह इस सप्ताह की शुरुआत में सीजफायर पर सहमत हुए थे, लेकिन दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है और नई झड़पें जारी हैं। ईरान ने बार-बार यह तर्क दिया है कि यूनाइटेड स्टेट्स के साथ कोई भी स्थायी समझौता तभी संभव है जब लेबनान में दुश्मनी पूरी तरह खत्म हो जाए। इसके अलावा, समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज की खाड़ी में भी तनाव बना हुआ है और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि लेबनान में इजराइली कार्रवाइयों के जवाब में उन्होंने जलमार्ग को प्रभावित किया है, जबकि अमेरिकी सेना का कहना है कि वाणिज्यिक शिपिंग अभी भी वहां से गुजर रही है।
ईरान का एजेंडा और संपत्तियों का मुद्दा
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ होने वाली इस बातचीत में लेबनान में इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच चल रहा संघर्ष एजेंडे में सबसे ऊपर रहेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बाकेई ने सरकारी न्यूज एजेंसी आईआरएनए द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि जायोनी शासन लेबनान में अपने वादे तोड़ रहा है और यह मुद्दा आज की चर्चा का मुख्य केंद्र होगा। इसके साथ ही, ईरान की जमी हुई या प्रतिबंधित संपत्तियों को वापस दिलाने और ईरानी तेल की बिक्री के लिए आवश्यक लाइसेंस जारी करने से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी। ये आर्थिक मुद्दे ईरान के लिए इस शांति प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा हैं।