अमेरिकी पासपोर्ट रैंकिंग 10 साल के निचले स्तर पर भारत 81वें स्थान पर पहुंचा

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अमेरिकी पासपोर्ट रैंकिंग 10 साल के निचले स्तर पर भारत 81वें स्थान पर पहुंचा
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हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 के ताजा आंकड़े जारी कर दिए गए हैं, जो वैश्विक यात्रा और पासपोर्ट की ताकत में बड़े बदलावों का संकेत देते हैं। इस साल की रिपोर्ट में अमेरिकी पासपोर्ट के लिए एक बड़ा झटका सामने आया है, क्योंकि यह पिछले 10 वर्षों में अपनी सबसे निचली रैंकिंग पर पहुंच गया है। यह गिरावट दर्शाती है कि दुनिया भर में यात्रा की स्वतंत्रता का परिदृश्य बदल रहा है, जहां अब 30 से ज्यादा देश अमेरिकी पासपोर्ट से आगे निकल चुके हैं। हालांकि अमेरिका अभी भी एक मजबूत पासपोर्ट बना हुआ है, लेकिन अन्य देशों द्वारा अपने नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त समझौतों में की गई तेज प्रगति ने अमेरिका को एक दशक के सबसे निचले स्तर पर धकेल दिया है।

अमेरिकी पासपोर्ट की रैंकिंग में बड़ी गिरावट

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को इस बार रैंकिंग में काफी नुकसान उठाना पड़ा है। पिछले 10 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब अमेरिकी पासपोर्ट इतनी निचली रैंकिंग पर पहुंचा है। अब दुनिया के 30 से अधिक देशों के पासपोर्ट अमेरिका की तुलना में अधिक शक्तिशाली हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी पासपोर्ट की अपनी ताकत कम हो गई है, बल्कि इसका मुख्य कारण यह है कि अन्य देशों ने अपने नागरिकों के लिए अधिक देशों में बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा प्राप्त करने में अधिक सफलता हासिल की है और कई देशों ने नए राजनयिक समझौते किए हैं और अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत किया है, जिससे उनके नागरिकों को यात्रा में अधिक आसानी हो रही है। इसी वजह से अमेरिकी नागरिकों को अब कई देशों की यात्रा के लिए पहले की तुलना में अधिक ट्रैवल ऑथराइजेशन या पहले से वीजा लेने की आवश्यकता पड़ती है। यह रैंकिंग किसी देश की आर्थिक ताकत या राजनीतिक प्रभाव नहीं, बल्कि केवल यात्रा की आजादी को दिखाती है।

भारत की रैंकिंग में सुधार और वीजा-मुक्त देशों की स्थिति

भारत के लिए हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 से मिली-जुली खबरें आई हैं। भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में इस साल सुधार देखा गया है और भारत अब 81वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले साल भारत 85वें स्थान पर था, जिसका अर्थ है कि भारत ने अपनी स्थिति में 4 अंकों का सुधार किया है। हालांकि, एक दिलचस्प तथ्य यह है कि भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा-मुक्त देशों की संख्या में कमी आई है। पिछले साल जहां भारतीय नागरिक 57 देशों में बिना पहले से वीजा लिए जा सकते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 55 रह गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यह कमी भारत के लिए नए देशों के जुड़ने की कमी के कारण नहीं, बल्कि कुछ देशों की बदली हुई वीजा नीतियों के कारण हुई है। इस प्रकार, भले ही भारत की वैश्विक रैंकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन यात्रा के लिए उपलब्ध गंतव्यों की कुल संख्या में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स का आकलन और कार्यप्रणाली

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित पासपोर्ट रैंकिंग सिस्टम में से एक माना जाता है। 2026 के इस सूचकांक में कुल 199 देशों के पासपोर्ट और 227 यात्रा स्थलों का गहन आकलन किया गया है। यह रैंकिंग पूरी तरह से इस आधार पर तय की जाती है कि किसी विशेष देश का नागरिक बिना पहले से वीजा लिए या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा के साथ कितने देशों की यात्रा कर सकता है और यह इंडेक्स किसी देश की आर्थिक शक्ति या उसके राजनीतिक प्रभाव को नहीं मापता, बल्कि यह केवल उस देश के नागरिकों को मिलने वाली यात्रा की आजादी को दर्शाता है। हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर यात्रा नीतियों में आए बदलावों और नए अंतरराष्ट्रीय समझौतों ने इस रैंकिंग को काफी प्रभावित किया है।

सिंगापुर का दबदबा और शीर्ष शक्तिशाली देश

इस साल भी सिंगापुर ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट के रूप में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। सिंगापुर के बाद जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर काबिज हैं। स्वीडन को इस रैंकिंग में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। शीर्ष 10 देशों की सूची में यूरोपीय देशों का दबदबा साफ देखा जा सकता है, जिनमें बेल्जियम, डेनमार्क, फिनलैंड, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे और स्पेन शामिल हैं। इनके अलावा ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, कनाडा, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया और ग्रीस जैसे देशों ने भी अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है। ये सभी देश अपने नागरिकों को दुनिया के अधिकांश हिस्सों में बिना किसी बाधा के यात्रा करने की सुविधा प्रदान करते हैं।

निष्कर्ष और वैश्विक पहुंच का महत्व

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 यह स्पष्ट करता है कि आज के दौर में किसी देश के नागरिकों को मिलने वाली यात्रा की सुगमता उसकी वैश्विक पहुंच का एक बड़ा पैमाना बन गई है। अमेरिका का पासपोर्ट अभी भी दुनिया के मजबूत पासपोर्टों की श्रेणी में आता है, लेकिन अन्य देशों ने वीजा-मुक्त यात्रा के क्षेत्र में उससे कहीं अधिक तेजी से प्रगति की है। भारत की रैंकिंग में सुधार यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय पासपोर्ट की स्वीकार्यता बढ़ रही है, भले ही वीजा नीतियों में बदलाव के कारण गंतव्यों की संख्या में मामूली उतार-चढ़ाव आया हो। यह रैंकिंग अंतरराष्ट्रीय संबंधों और बदलती वैश्विक यात्रा नीतियों का एक महत्वपूर्ण आईना है। अमेरिका का पासपोर्ट अब भी दुनिया के मजबूत पासपोर्टों में शामिल है, लेकिन दूसरे देशों ने वीजा-फ्री यात्रा बढ़ाने की दिशा में उससे तेज़ी से प्रगति की है।

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