अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत से आने वाले उत्पादों पर लगाए गए रेसिप्रोकल (पारस्परिक) टैरिफ में बड़ी कटौती की घोषणा की है। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर जारी एक बयान में ट्रम्प ने बताया कि भारत पर लागू टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इससे पहले भारत पर कुल 50% तक के टैरिफ प्रभावी थे, जिनमें व्यापार घाटे और रूसी तेल खरीद से संबंधित शुल्क शामिल थे। राष्ट्रपति ट्रम्प के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद दोनों देश एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं।
टैरिफ कटौती और व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि
अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर दो चरणों में टैरिफ लगाए थे। पहली बार 1 अगस्त को व्यापार घाटे के कारण 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया था। इसके बाद 27 अगस्त को रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने के कारण 25% का अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाया गया था। व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, नए समझौते के तहत रूसी तेल खरीद से संबंधित अतिरिक्त टैरिफ को पूरी तरह हटा दिया गया है, जबकि व्यापार घाटे से संबंधित शुल्क को 25% से घटाकर 18% पर सीमित कर दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे 'मेड इन इंडिया' उत्पादों के लिए एक बड़ी राहत बताया है।
ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव और रूसी तेल पर रुख
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने बयान में दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी रूसी तेल की खरीद कम करने और अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। ट्रम्प के अनुसार, यह कदम यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास हो सकता है। बातचीत के दौरान वेनेजुएला से तेल खरीदने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। ट्रम्प ने कल ही संकेत दिया था कि भारत अब ईरान के बजाय वेनेजुएला से तेल खरीद सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत का यह रणनीतिक बदलाव वैश्विक ऊर्जा बाजार में अमेरिका की स्थिति को मजबूत करेगा और रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाएगा।
500 अरब डॉलर की 'बाय अमेरिकन' प्रतिबद्धता
व्यापार समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के उत्पादों और सेवाओं को खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इस विशाल आयात योजना में ऊर्जा, उन्नत तकनीक, कृषि उत्पाद, कोयला और अन्य औद्योगिक सामान शामिल होंगे। ट्रम्प ने इसे 'बाय अमेरिकन' नीति की सफलता बताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और लोकतंत्र मिलकर काम करते हैं, तो इसका लाभ दोनों देशों की जनता को मिलता है। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां टैरिफ बाधाएं अधिक थीं।
कूटनीतिक संवाद और भविष्य की दिशा
पिछले 13 महीनों में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच यह 7वीं फोन कॉल थी। ट्रम्प ने भारत के साथ अपने संबंधों को विशेष बताते हुए इंडिया गेट की प्रशंसा की और वाशिंगटन डीसी में प्रस्तावित 'आर्क डी ट्रम्प' की तुलना इससे की। विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता न केवल आर्थिक है बल्कि सामरिक भी है और भारत ने अमेरिका की व्यापारिक चिंताओं को दूर करने के लिए अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को धीरे-धीरे कम करने का आश्वासन दिया है। यह विकास भारत-अमेरिका साझेदारी को एक नए धरातल पर ले जाता है, जहां व्यापारिक विवादों को कूटनीतिक संवाद के माध्यम से सुलझाया जा रहा है।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
विशेषज्ञों के अनुसार, टैरिफ में यह कटौती भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। 50% के उच्च टैरिफ स्तर ने भारतीय सामानों की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित किया था, जिसे अब 18% पर लाकर संतुलित करने का प्रयास किया गया है। हालांकि, 500 अरब डॉलर के आयात की प्रतिबद्धता भारत के व्यापार संतुलन पर क्या प्रभाव डालेगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। विश्लेषकों का मानना है कि रूस से तेल खरीद कम करने का निर्णय भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, जो पश्चिमी देशों के साथ उसके संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाएगा।