अमेरिका में व्यापार नीतियों को लेकर कानूनी घमासान तेज हो गया है। सोमवार को अमेरिका के 25 राज्यों ने एकजुट होकर ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का स्पष्ट रूप से कहना है कि ये नए टैरिफ उन आयात करों (इंपोर्ट टैक्स) को फिर से लागू करने का एक बहाना मात्र हैं, जिन्हें इसी साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। यह कानूनी चुनौती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक नीतियों और राज्यों के अधिकारों के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाती है।
विवाद की मुख्य वजह और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
इस पूरे विवाद की जड़ें पिछले महीने की उस कार्रवाई में हैं, जब अमेरिका ने 59 देशों और यूरोपीय संघ पर 10 प्रतिशत या उससे अधिक के टैरिफ लगा दिए थे। प्रशासन ने इसके पीछे यह तर्क दिया था कि इन देशों ने जबरन मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) से बने सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। हालांकि, राज्यों का तर्क है कि यह केवल एक कानूनी पैंतरा है। दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल करते हुए लगभग हर देश से होने वाले आयात पर भारी टैरिफ लगाए थे। उनका दावा था कि अमेरिका का व्यापार घाटा एक राष्ट्रीय आपातकाल के समान है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि IEEPA के तहत इस तरह के टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
राजस्व की भरपाई और धारा 301 का खेल
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को उन सभी आयातकों को पैसे वापस करने पड़े थे, जिन्होंने पहले टैरिफ का भुगतान किया था। इस खोए हुए राजस्व की भरपाई करने के लिए प्रशासन ने दुनिया भर में 10 प्रतिशत के अस्थायी टैरिफ लागू किए थे, जिनकी समय-सीमा 24 जुलाई की आधी रात को समाप्त हो गई। अब प्रशासन ने अपनी रणनीति बदलते हुए ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 की धारा 301 का सहारा लिया है। यह धारा राष्ट्रपति को उन देशों पर प्रतिबंध या टैक्स लगाने की शक्ति देती है जो अनुचित व्यापारिक तौर-तरीके अपनाते हैं। वर्तमान में लगाए गए नए टैरिफ 10 प्रतिशत से लेकर 12 पॉइंट 5 प्रतिशत के बीच हैं और ये उन देशों पर लागू होते हैं जो अमेरिका में होने वाले कुल आयात का 99 प्रतिशत हिस्सा भेजते हैं।
अटॉर्नी जनरल और व्हाइट हाउस के तर्क
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हार का सामना करने के बाद प्रशासन अब पिछले दरवाजे से परिवारों और व्यवसायों पर गैर-कानूनी रूप से टैक्स का बोझ बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने प्रशासन के फैसले का बचाव किया है और देसाई के अनुसार, अमेरिका अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग उन नीतियों को खत्म करने के लिए कर रहा है जो अमेरिकी व्यापार और कामगारों पर बोझ डालती हैं। उन्होंने कहा कि जबरन श्रम से बने सामान को रोकना अनिवार्य है और धारा 301 के तहत लगाए गए टैरिफ हमेशा से एक मजबूत कानूनी हथियार रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि इन ऊंचे टैरिफ से अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी, भले ही इसके लिए दशकों पुरानी आजाद व्यापार की नीति को बदलना पड़े।