उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पूरे राज्य में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी बारिश के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन और सड़कें धंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिसके चलते तीन राष्ट्रीय राजमार्गों सहित कुल 120 सड़कें यातायात के लिए बंद हो गई हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल स्थानीय निवासियों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है, बल्कि चारधाम यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। प्रशासन और राहत दल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य जारी है।
यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर भारी तबाही
राज्य में सबसे ज्यादा नुकसान यमुनोत्री नेशनल हाईवे को पहुंचा है। उत्तरकाशी जिले के स्यानचट्टी के पास सड़क का लगभग 100 मीटर हिस्सा पूरी तरह से बह गया है। इस घटना के कारण मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग फंस गए। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ (SDRF) की टीम मौके पर पहुंची और रस्सियों के सहारे एक साहसिक बचाव अभियान चलाया। टीम ने वहां फंसे लगभग 100 तीर्थयात्रियों को एक-एक करके सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। सड़क का बड़ा हिस्सा बह जाने के कारण बचाव दल ने एक वैकल्पिक पैदल मार्ग तैयार किया है ताकि लोगों की आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों के अनुसार, यमुनोत्री हाईवे पिछले दो दिनों से बंद है और इसे बहाल करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन पहाड़ियों से लगातार गिर रहे मलबे के कारण काम में बाधा आ रही है।
जिलाधिकारी का निरीक्षण और निर्देश
शनिवार को उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्यानचट्टी में प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि स्यानचट्टी में यमुना नदी पर बन रहे पुल का निर्माण कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि तीर्थयात्रियों और स्थानीय जनता की सुरक्षा प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने पैदल मार्ग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने, रस्सियां बांधने और रात के समय रोशनी के लिए सोलर लाइट लगाने के भी निर्देश दिए। प्रशासन का प्रयास है कि जल्द से जल्द वैकल्पिक मार्ग को सुचारू किया जाए ताकि फंसे हुए लोगों को राहत मिल सके।
केदारनाथ और कोटद्वार हाईवे भी बाधित
स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (एसईओसी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, रुद्रप्रयाग जिले में सिरोबागर के पास भारी मलबा आने से ऋषिकेश-केदारनाथ नेशनल हाईवे बंद हो गया है। इसके अलावा, पौड़ी जिले में कोटद्वार-सतपुली नेशनल हाईवे पर भी यातायात पूरी तरह ठप है। इन मुख्य मार्गों से मलबा हटाने के लिए मशीनों को तैनात किया गया है, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में देरी का कारण बन रही है। एक अन्य घटना में, शुक्रवार देर रात गुमखाल-सतपुली मार्ग पर भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में सब्जियां ले जा रही एक पिकअप गाड़ी आ गई। इस हादसे में गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, हालांकि राहत की बात यह रही कि चालक और उसमें सवार अन्य दो लोग सुरक्षित बच गए।
भारी बारिश का अलर्ट और आंकड़े
मौसम विभाग ने पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में रिकॉर्ड बारिश दर्ज की है। आंकड़ों के अनुसार, कीर्तिनगर में सबसे अधिक 135 मिमी वर्षा हुई है। इसके अलावा सतपुली, लोहारखेत, यमेश्वर, सोंग और पोखरी जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में भी भारी बारिश दर्ज की गई है और मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए भी भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी-नालों के पास जाने से परहेज करें। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को भी मौसम की स्थिति देखकर ही आगे बढ़ने की सलाह दी गई है।