देश की राजधानी दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय से वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बंकिम चंद्र चटर्जी की पावन धरती पश्चिम बंगाल तक पहुंच गया है। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के गायन को लेकर उपजे विवाद पर अब सियासत गरमा गई है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस घटना पर कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग की है। उन्होंने जानकारी दी कि ऋषि बंकिम चंद्र चटर्जी के परिवार की ओर से सोनिया गांधी को इस संबंध में पहले ही एक पत्र भेजा जा चुका है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने इस पूरी घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे एक सच्चे देशभक्त का अपमान करार दिया है।
शुभेंदु अधिकारी ने कांग्रेस से मांगी माफी
शुभेंदु अधिकारी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने कांग्रेस नेताओं के असली चेहरे को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् पिछले 150 सालों से भारतीयों की रगों में दौड़ रहा है और इसका हमेशा से सम्मान किया जाता रहा है। अधिकारी ने जोर देकर कहा कि वंदे मातरम् के सम्मान की रक्षा के लिए विशेष कानून भी बनाए गए हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि उन्होंने सरकारी स्कूलों में वंदे मातरम् के गायन को अनिवार्य कर दिया है ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
गीत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् भारतीय क्रांतिकारियों के लिए एक जीवन रेखा की तरह था। इसकी बेइज्जती करने का सीधा अर्थ है देश की देशभक्ति का अपमान करना और सबसे बढ़कर यह ऋषि बंकिम चंद्र का अपमान है। उन्होंने बंगाल की धरती से इस कृत्य की कड़ी निंदा की और कहा कि पूरा राज्य इस घटना से आक्रोशित है।
तुष्टिकरण की राजनीति का लगाया आरोप
राज्य कांग्रेस पर निशाना साधते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के पास विरोध करने की नैतिक शक्ति नहीं बची है। उन्होंने कहा कि उन्हें स्थानीय नेताओं से कोई उम्मीद नहीं है, लेकिन वह सोनिया गांधी की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारी ने सवाल उठाया कि कांग्रेस की चेयरपर्सन के तौर पर वह किस तरह का गुस्सा दिखा रही हैं? उन्होंने पूछा कि क्या यह गुस्सा इसलिए है क्योंकि गीत में मां दुर्गा और मां सरस्वती का उल्लेख किया गया है? उन्होंने इस पूरी घटना को राष्ट्रवाद और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का अपमान बताते हुए दावा किया कि कांग्रेस एक विशिष्ट वोट बैंक को खुश करने के लिए तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है।
बंकिम चंद्र के वंशज सुमित्रो चटर्जी का पत्र
इस विवाद में बंकिम चंद्र चटर्जी के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुमित्रो चटर्जी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के पूरे संस्करण को गाने से रोकने की बार-बार कोशिश की गई, जिससे वहां मौजूद लोगों को असुविधा हुई। उन्होंने इस कथित घटना को केवल दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक गलती का बेशर्मी से दोहराव बताया है।
सोनिया गांधी को लिखे अपने पत्र में सुमित्रो चटर्जी ने अपना गहरा दुख और गुस्सा व्यक्त किया है और उन्होंने लिखा कि वह एक आम नागरिक, एक देशभक्त और बंकिम चंद्र के सीधे वंशज के रूप में अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं। नैहाटी से भाजपा के विधायक ने कहा कि आजाद भारत की धरती पर इस राष्ट्रीय गीत को पूरा गाने में किसी भी प्रकार की हिचकिचाहट खुदीराम बोस जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के सर्वोच्च बलिदान का अपमान है।
वंदे मातरम् का गौरवशाली इतिहास
सुमित्रो चटर्जी ने अपने पत्र में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की महत्वपूर्ण भूमिका को भी याद दिलाया और उन्होंने उल्लेख किया कि 1896 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में स्वयं रवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम् का गायन किया था। इसके अलावा, 1905 में बनारस कांग्रेस अधिवेशन में सरला देवी चौधुरानी द्वारा इस गीत का गायन किया गया था। उन्होंने श्री अरबिंदो के विचारों का हवाला देते हुए वंदे मातरम् को एक ऐसा मंत्र बताया जिसने पूरे देश को देशभक्ति के धर्म में दीक्षित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस गीत का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।