विक्टर ओर्बन बन सकते हैं संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव, अमेरिका कर रहा विचार

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विक्टर ओर्बन बन सकते हैं संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव, अमेरिका कर रहा विचार
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अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस समय एक नया घटनाक्रम तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें हंगरी के पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन का नाम संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव पद के लिए सामने आ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने हंगरी के पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन को संयुक्त राष्ट्र सेक्रेटरी-जनरल बनाने की संभावना पर विचार करना शुरू कर दिया है और प्रतिष्ठित वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव को लेकर अमेरिकी अधिकारियों की आंतरिक और बाहरी बातचीत में ओर्बन का नाम बार-बार सामने आया है, जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में सुगबुगाहट बढ़ा दी है।

रूस और चीन के साझा उम्मीदवार के रूप में चर्चा

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने चीन और रूस के प्रतिनिधियों के सामने भी ओर्बन जैसे नेता का विचार रखा है, जिस पर दोनों देशों की ओर से पॉजिटिव रिएक्शन मिलने की बात कही गई है। अमेरिका की योजना विक्टर ओर्बन को रूस और चीन के साझा उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़ाने की है। अमेरिका ने विक्टर ओर्बन को इस पद के लिए चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है, और रूस तथा चीन के समर्थन को लेकर भी प्रारंभिक स्तर पर बातचीत होने की बात सामने आई है। यदि यह समीकरण बैठता है, तो संयुक्त राष्ट्र के अगले प्रमुख को चुनने की इस पूरी दौड़ में एक बेहद नाटकीय और नया मोड़ आ सकता है और हालांकि, अभी तक न तो विक्टर ओर्बन ने आधिकारिक तौर पर चुनाव लड़ने का कोई एलान किया है और न ही अमेरिका, रूस या चीन की सरकारों की तरफ से उनके समर्थन की कोई ऑफिशियल अनाउंसमेंट की गई है।

संयुक्त राष्ट्र के नए प्रमुख पद पर अब तक सहमति नहीं

मौजूदा समय में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल आगामी 31 दिसंबर को आधिकारिक रूप से खत्म हो रहा है। उनकी जगह लेने वाले नए और उत्तराधिकारी महासचिव के नाम पर अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई आम सहमति नहीं बन पाई है। इस उच्च पद के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के भीतर उम्मीदवारों को लेकर अब तक छह बार अनऑफिशियल वोट हो चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि किसी भी उम्मीदवार को पर्याप्त और निर्णायक सपोर्ट हासिल नहीं हो पाया है।

बीते 16 अक्टूबर को हुए सबसे हालिया मतदान की प्रक्रिया में कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिनस्पैन सबसे आगे रहीं। उन्हें कुल 9 सदस्यों का समर्थन प्राप्त हुआ, जबकि 6 सदस्यों ने उनके खिलाफ अपना वोट डाला था। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात की लाना नुसेबेह भी महासचिव पद की इस लंबी दौड़ में आधिकारिक रूप से शामिल हो चुकी हैं। अब इस कतार में हंगरी के पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन का भी नया नाम सामने आ रहा है, लेकिन सभी संबंधित पक्षों की ओर से इसकी आधिकारिक अनाउंसमेंट का इंतजार किया जा रहा है।

चीन और रूस की तरफ से मिल सकता है मजबूत समर्थन

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में विश्वस्त सूत्रों के हवाले से यह विस्तृत जानकारी दी गई है। इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से यह बताया जा रहा है कि यह पूरी प्लानिंग उन्हें अमेरिका, रूस और चीन के साझा उम्मीदवार के तौर पर वैश्विक मंच पर पेश करने की है। रिपोर्ट के अनुसार, ओर्बन का नाम आगे बढ़ाने का यह मुख्य विचार अमेरिकी अधिकारियों की ओर से ही आया था। संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी-जनरल के लिए संभावित नामों पर चर्चा के दौरान उन्होंने ओर्बन जैसे मजबूत नेता का सुझाव दिया, जिस पर चीनी और रूसी अधिकारियों ने भी सकारात्मक सहमति जताई है।

ब्रिटेन और फ्रांस रोक सकते हैं यह नियुक्ति

अमेरिकी अधिकारियों का यह अनुमान है कि ओर्बन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के भीतर पर्याप्त समर्थन मिल सकता है और कुल 15 सदस्यीय परिषद में उनके पक्ष में आठ से दस वोट मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है। हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ब्रिटेन और फ्रांस इस नियुक्ति को बीच में ही रोक सकते हैं, क्योंकि इन दोनों प्रमुख देशों के पास सुरक्षा परिषद में वीटो का वीटो अधिकार मौजूद है।

छह साल हंगरी के प्रधानमंत्री रहे विक्टर ओर्बन का राजनीतिक सफर

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने खुद ओर्बन से बात करते हुए यह जानने की पूरी कोशिश की है कि आखिर वो इस वैश्विक पद पर चुनाव लड़ना चाहेंगे या नहीं। यह बताया गया है कि विक्टर ओर्बन इसके लिए पूरी तरह तैयार हो सकते हैं, लेकिन वो अपनी उम्मीदवारी को लेकर तभी आगे कदम बढ़ाएंगे, जब उन्हें इस बात की पूरी संभावना नजर आएगी कि उनकी जीत पक्की है।

पैंसठ से अधिक उम्र के यानी तरेसठ साल के विक्टर ओर्बन ने वर्ष 2010 से 2026 तक लगातार 16 साल तक हंगरी के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया है। वैश्विक राजनीति में विक्टर को कई बार तानाशाह के रूप में भी संबोधित किया जाता है। हालांकि, अप्रैल 2026 में हुए आम चुनाव में उनकी पार्टी फिडेज को पीटर मग्यार की टिस्जा पार्टी से एक बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। टिस्जा पार्टी ने देश की संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था। इसके बाद मई महीने में पीटर मग्यार ने हंगरी के प्रधानमंत्री पद की आधिकारिक शपथ ली थी। अब देखना यह होगा कि ओर्बन का यह नया अध्याय संयुक्त राष्ट्र की राजनीति में क्या रंग लाता है।

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