Rajasthan Politics: वोटर लिस्ट विवाद: अशोक गहलोत ने BJP पर साधा निशाना, अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी

Rajasthan Politics - वोटर लिस्ट विवाद: अशोक गहलोत ने BJP पर साधा निशाना, अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी
| Updated on: 15-Jan-2026 02:12 PM IST
राजस्थान की राजनीति में मतदाता सूची को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेशभर में कांग्रेस समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने की एक बड़ी और सुनियोजित साजिश रची जा रही है. गहलोत ने इस मामले में न केवल अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने का निर्देश दिया है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी सख्त लहजे में आगाह किया है कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव में न आएं और संविधान के दायरे में रहकर ही काम करें.

'फॉर्म 7' के जरिए कथित साजिश

अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि SIR (Special Intensive Revision) में नाम कटवाने के लिए आपत्ति दर्ज करने का आज आखिरी दिन है. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के कई हिस्सों से ऐसी खबरें लगातार मिल रही हैं कि कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थकों के नाम मतदाता सूची से कटवाने के लिए 'फॉर्म 7' जमा किए जा रहे हैं. यह 'फॉर्म 7' मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज करने का एक कानूनी माध्यम है, लेकिन. गहलोत के अनुसार इसका दुरुपयोग किया जा रहा है ताकि कांग्रेस के वोट बैंक को कमजोर किया जा सके.

कार्यकर्ताओं को 'एक्शन मोड' में आने का निर्देश

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और बूथ लेवल अध्यक्षों. (BLA) को तत्काल 'एक्शन मोड' में आने का निर्देश दिया है. उन्होंने सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे पूरी मुस्तैदी और सतर्कता के साथ इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखें. गहलोत ने जोर देकर कहा कि किसी भी वैध मतदाता का नाम किसी भी कीमत पर लिस्ट से हटना नहीं चाहिए. उन्होंने इसे हमारे लोकतंत्र की रक्षा का एक महत्वपूर्ण सवाल बताया, जिस पर सभी को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए.

अफसरों को संविधान याद रखने की चेतावनी

गहलोत ने प्रशासनिक अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि प्रशासन को किसी भी राजनीतिक दल के दबाव में आए बिना, पूरी तरह से संविधान के अनुरूप काम करना चाहिए और गहलोत ने सख्त लहजे में आगाह करते हुए कहा कि बीजेपी की इस बौखलाहट से यह साफ समझा जा सकता है कि उनके दिन अब लदने वाले हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी अधिकारी इस गैरकानूनी काम में शामिल पाया गया, तो उसे किसी न किसी दिन कानून का सामना अवश्य करना होगा. यह चेतावनी अधिकारियों पर निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दबाव बनाने का एक प्रयास मानी जा रही है.

5 लाख वोट काटने का 'ब्लूप्रिंट' का दावा

इस मुद्दे पर एक दिन पहले ही पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने बीकानेर के धोरीमना में एक बड़ा दावा किया था. उन्होंने कहा था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष के जयपुर दौरे के बाद एक सोची-समझी रणनीति के तहत कांग्रेस कार्यकर्ताओं के वोट काटे जा रहे हैं. डोटासरा ने आरोप लगाया कि दिल्ली के नेताओं के इशारे पर उपखंड अधिकारियों (SDM) को 'फॉर्म नंबर 7' थमा दिए गए हैं, जिनका उपयोग कर कांग्रेस समर्थकों और कार्यकर्ताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं. उन्होंने तो यहां तक दावा किया कि मुख्यमंत्री आवास (CMR) से एक विशेष पेन ड्राइव जारी की गई है, जिसमें प्रदेश की हर विधानसभा से 4 से 5 हजार कांग्रेस समर्थित वोट कटवाने का डेटा है. उनके अनुसार, पूरे प्रदेश में करीब 5 लाख वोट काटने का एक विस्तृत. ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है, जो लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है.

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