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: पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026: क्या ममता का जादू चलेगा या पहली बार खिलेगा कमल?

- पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026: क्या ममता का जादू चलेगा या पहली बार खिलेगा कमल?
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पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान संपन्न होने के बाद अब नतीजों का इंतजार खत्म हो रहा है। कल सुबह राज्य की 293 सीटों पर मतगणना शुरू होगी और दोपहर 12 बजे तक लगभग यह स्पष्ट हो जाएगा कि पश्चिम बंगाल में फिर से ममता बनर्जी की सरकार बनेगी या भाजपा पहली बार राज्य में कमल खिलाने में सफल रहेगी। इस बार का बंगाल चुनाव कई मायनों में पूरी तरह से अलग रहा है और चुनाव के दौरान कई नए रिकॉर्ड बने हैं। चुनावी इतिहास में पहली बार दो चरणों में मतदान हुए थे, जबकि इससे पहले हिंसा की वजह से राज्य में आठ चरणों तक मतदान हो चुके हैं।

रिकॉर्ड मतदान और जनसांख्यिकीय आंकड़े

इस चुनाव के दोनों चरणों में एक भी मौत की खबर नहीं आई। इस बार बंगाल में सबसे ज्यादा सेंट्रल फोर्स तैनात की गई थी और रिकॉर्ड मतदान हुआ है। 56 परसेंट के मुकाबले कहीं अधिक है। पहले फेज में 152 सीटों पर 2021 के मुकाबले करीब 21 लाख 11 हजार ज्यादा वोट पड़े, जो हर विधानसभा में औसतन 13,800 ज्यादा वोट हैं। दूसरे फेज में 142 सीटों पर 9 लाख 8 हजार वोट बढ़े, जो हर सीट पर औसतन 6,400 ज्यादा हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, माइग्रेंट वर्कर्स का अपने घर लौटना एक अहम ‘X फैक्टर’ रहा है।

भाजपा के पक्ष में प्रमुख कारक और मुद्दे

विपक्षी पार्टी होने के नाते भाजपा मुख्य रूप से सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी और कई संवेदनशील मुद्दों को लेकर मैदान में उतरी थी और आरजी कर रेप केस और कस्बा लॉ कॉलेज जैसी घटनाओं ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर तृणमूल पर दबाव बनाया है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार के मुद्दे और 26,000 नौकरियों को रद्द करने के मामले को भी भाजपा ने भुनाया है। आलू किसानों की नाराजगी भी एक बड़ा फैक्टर है, जहां 26 सीटों पर उनका प्रभाव है। 2021 में तृणमूल इन 26 में से 18 पर आगे थी, लेकिन 2024 लोकसभा में यह संख्या घटकर 16 रह गई, जबकि भाजपा 8 से बढ़कर 10 पर पहुंच गई। मुर्शिदाबाद में हिंसा, वक्फ मुद्दा और बेलडांगा की घटना से होने वाले ध्रुवीकरण को भी भाजपा के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।

तृणमूल कांग्रेस की मजबूती और कल्याणकारी योजनाएं

लगातार 15 साल सत्ता में रहने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस की नींव मजबूत मानी जा रही है। बूथ लेवल पर तृणमूल की संगठनात्मक ताकत उनका सबसे बड़ा हथियार है। ग्रामीण इलाकों में 'लक्ष्मी भंडार' योजना की लोकप्रियता महिलाओं का वोट बैंक बनाए रखने में सहायक हो सकती है। इसके साथ ही कन्याश्री और रूपश्री जैसी परियोजनाएं भी प्रभावी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि SIR (स्टेट इनफॉर्मेशन रजिस्टर) के असर से मुस्लिम वोट तृणमूल के पक्ष में एकजुट हो सकते हैं। साथ ही, मतुआ समुदाय की नाराजगी और जंगलमहल में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वापस पाई गई जमीन तृणमूल को फायदा पहुंचा सकती है।

चुनाव के निर्णायक 'X-फैक्टर'

इस चुनाव में SIR से 27 लाख नामों का बाहर होना सबसे बड़ा ‘X फैक्टर’ माना जा रहा है। इसके अलावा, लक्ष्मी भंडार के जवाब में भाजपा का ‘3,000 रुपये हर महीने’ का वादा, बेरोजगारी भत्ता, और DA जैसे मुद्दे युवा पीढ़ी और सरकारी कर्मचारियों को प्रभावित कर सकते हैं। तीसरी ताकत के रूप में लेफ्ट, ISF और कांग्रेस गठबंधन की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। कई सीटों पर जीत-हार इस बात पर निर्भर करेगी कि एंटी-एस्टैब्लिशमेंट वोट बंटता है या नहीं। यह चुनाव एकतरफा लहर वाला नहीं है, जहां एक तरफ ग्रामीण बंगाल के वेलफेयर प्रोजेक्ट्स हैं, तो दूसरी तरफ महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा है।

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