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एसआईपी की किस्त मिस होने पर क्या होगा? जानें निवेश पर असर और जरूरी नियम

एसआईपी की किस्त मिस होने पर क्या होगा? जानें निवेश पर असर और जरूरी नियम
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म्यूचुअल फंड में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए निवेश करना आज के समय में एक बेहद लोकप्रिय और अनुशासित विकल्प बन गया है। लाखों निवेशक अपने भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हर महीने एक निश्चित राशि का निवेश करते हैं। लेकिन कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है जब बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने या किसी तकनीकी खराबी के कारण एसआईपी की किस्त समय पर नहीं कट पाती। ऐसी स्थिति में अक्सर निवेशक घबरा जाते हैं और उन्हें लगता है कि उनका निवेश बंद हो जाएगा या उन पर भारी जुर्माना लगेगा।

क्या एसेट मैनेजमेंट कंपनी लगाती है जुर्माना?

निवेशकों के लिए यह राहत की बात है कि आमतौर पर एसेट मैनेजमेंट कंपनी यानी एएमसी किस्त मिस होने पर कोई जुर्माना नहीं लगाती है। अगर किसी महीने आपकी किस्त नहीं कटती है, तो इसका सीधा मतलब यह है कि उस महीने के लिए आपके फंड में नई यूनिट्स नहीं जोड़ी जाएंगी। इसका आपके पहले से निवेश किए गए पैसे पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। आपके पास जो पुरानी यूनिट्स मौजूद हैं, वे फंड में बनी रहती हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव के अनुसार आपको रिटर्न देती रहती हैं। एएमसी केवल उस महीने के निवेश को छोड़ देती है और अगले महीने फिर से किस्त काटने का प्रयास करती है।

बैंक द्वारा लगाए जाने वाले शुल्क

हालांकि म्यूचुअल फंड हाउस कोई पेनाल्टी नहीं लगाते, लेकिन बैंक के नियम अलग होते हैं। एसआईपी की किस्त ईसीएस या एनएसीएच के जरिए ऑटो-डेबिट होती है और अगर खाते में पैसा न होने की वजह से यह ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है, तो बैंक इसे पेमेंट डिफॉल्ट मानता है। ऐसी स्थिति में बैंक ईसीएस या एनएसीएच बाउंस होने पर शुल्क वसूल सकता है। यह चार्ज अलग-अलग बैंकों के नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि निवेशक अपनी एसआईपी की तारीख से कम से कम 2 या 3 दिन पहले अपने खाते में पर्याप्त राशि सुनिश्चित करें ताकि बैंक के फालतू खर्चों से बचा जा सके।

लगातार किस्तें मिस होने का खतरा

एक या दो बार किस्त छूट जाना कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन अगर यह सिलसिला लगातार जारी रहता है, तो आपकी एसआईपी बंद हो सकती है। अधिकांश म्यूचुअल फंड हाउस का यह नियम है कि यदि लगातार 3 महीने तक एसआईपी की किस्त फेल होती है, तो वे उस एसआईपी को निष्क्रिय या रद्द कर देते हैं। एक बार एसआईपी रद्द होने के बाद, निवेशक को फिर से नया मैंडेट सेट करना पड़ता है और पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ती है और इससे आपके निवेश की निरंतरता टूट जाती है और आपके वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने में देरी हो सकती है।

निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि एसआईपी में नियमितता ही सफलता की कुंजी है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बैंक खाते में पर्याप्त राशि बनाए रखें और बैंक व म्यूचुअल फंड से मिलने वाले एसएमएस और ईमेल अलर्ट को हमेशा सक्रिय रखें। इससे आपको किस्त की तारीख से पहले ही जानकारी मिल जाएगी। एसआईपी में लंबे समय तक बने रहने से ही कंपाउंडिंग का असली फायदा मिलता है। बार-बार किस्तें मिस करने से न केवल आपके निवेश की राशि कम रह जाती है, बल्कि आप बाजार के निचले स्तरों पर खरीदारी करने का मौका भी खो देते हैं। अनुशासन के साथ किया गया निवेश ही भविष्य में बड़ी पूंजी बनाने में मदद करता है।

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