व्हाइट हाउस ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (Trade Deal) से संबंधित अपनी आधिकारिक फैक्ट शीट में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं और संशोधित दस्तावेज में 'दाल' (Pulses) के आयात के संदर्भ को पूरी तरह से हटा दिया गया है। इसके अतिरिक्त, भारत द्वारा 500 अरब अमेरिकी डॉलर की वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के संदर्भ में प्रयुक्त शब्दावली को भी बदला गया है। पहले इस खरीद को एक 'प्रतिबद्धता' (Commitment) के रूप में दर्शाया गया था, जिसे अब बदलकर 'इरादा' (Intent) कर दिया गया है। यह घटनाक्रम भारत में राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया है, जहां विपक्षी दलों ने सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया था।
फैक्ट शीट में संशोधन और शब्दावली का बदलाव
व्हाइट हाउस द्वारा जारी अद्यतन फैक्ट शीट में उन प्रावधानों को संशोधित किया गया है जो पहले 9 फरवरी को जारी किए गए थे। प्रारंभिक दस्तावेज में उल्लेख किया गया था कि भारत कुछ अमेरिकी दालों पर शुल्क कम करेगा या समाप्त करेगा। हालांकि, नए संस्करण में इस विशिष्ट उल्लेख को हटा दिया गया है। इसके साथ ही, 500 अरब अमेरिकी डॉलर के व्यापारिक लक्ष्य पर शब्दों का चयन अब अधिक कूटनीतिक रखा गया है। विश्लेषकों के अनुसार, 'प्रतिबद्धता' के स्थान पर 'इरादा' शब्द का उपयोग यह दर्शाता है कि यह एक दीर्घकालिक लक्ष्य है न कि कोई तत्काल कानूनी बाध्यकारी समझौता। यह बदलाव उन चिंताओं के बीच आया है जिनमें कहा गया था कि भारत-अमेरिका संयुक्त वक्तव्य और फैक्ट शीट की भाषा में विसंगतियां थीं।
विपक्ष के आरोप और पारदर्शिता पर सवाल
कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि दालों के आयात के प्रावधान को 9 फरवरी की फैक्ट शीट में 'चुपचाप' जोड़ा गया था, जबकि 6 फरवरी 2026 को जारी किए गए आधिकारिक भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में इसका कोई जिक्र नहीं था। विपक्ष का दावा है कि सरकार ने देश के किसानों से यह जानकारी छिपाई कि समझौते के तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में रियायती पहुंच दी जा रही है। कांग्रेस के अनुसार, 500 अरब डॉलर के खरीद वादे में कृषि उत्पादों को शामिल करना भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
सरकार का रुख और किसानों के हितों की सुरक्षा
विपक्ष के आरोपों के बीच, केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने स्पष्ट किया है कि व्यापार समझौते में भारतीय किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की पूरी तरह से रक्षा की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी रियायत का निर्णय घरेलू उत्पादकों के हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाता है। इसी क्रम में, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन उत्पादों की सूची साझा की जिन पर कोई टैरिफ रियायत नहीं दी गई है। इनमें सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, पोल्ट्री, डेयरी, केला, खट्टे फल, हरी मटर, छोले और मूंग जैसे प्रमुख उत्पाद शामिल हैं।
व्यापार बाधाएं और भविष्य का रोडमैप
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में भारत की व्यापार नीतियों पर भी टिप्पणी की गई है और दस्तावेज के अनुसार, भारत ने दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अमेरिकी उत्पादों पर उच्च शुल्क बनाए रखे हैं। कृषि उत्पादों पर औसत शुल्क 37% और कुछ वाहनों पर यह 100% से अधिक है। अमेरिका ने भारत की 'गैर-शुल्क बाधाओं' (Non-Tariff Barriers) को भी एक चुनौती बताया है और आने वाले हफ्तों में, दोनों देश इस ढांचे को लागू करने और एक पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। विश्लेषकों के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों और व्यवसायों के लिए बाजार पहुंच सुनिश्चित करना है, जबकि भारत अपनी विनिर्माण और कृषि प्राथमिकताओं को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है।
निष्कर्ष और कूटनीतिक प्रभाव
व्हाइट हाउस द्वारा फैक्ट शीट में किया गया यह संशोधन भारत और अमेरिका के बीच चल रही जटिल व्यापार वार्ताओं को रेखांकित करता है। शब्दावली में बदलाव और संवेदनशील उत्पादों को हटाना यह संकेत देता है कि दोनों पक्ष घरेलू राजनीतिक संवेदनशीलता और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि दालों का जिक्र हटने से तात्कालिक विवाद कम हो सकता है, लेकिन 500 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य और टैरिफ कटौती पर भविष्य की बातचीत महत्वपूर्ण बनी रहेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, द्विपक्षीय व्यापार संबंधों की मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश कृषि और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में अपनी चिंताओं का समाधान कैसे करते हैं।