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महिला आरक्षण: 2029 चुनाव से पहले लागू करने की तैयारी, रिजिजू ने खरगे को लिखा पत्र

महिला आरक्षण: 2029 चुनाव से पहले लागू करने की तैयारी, रिजिजू ने खरगे को लिखा पत्र
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केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले प्रभावी बनाने के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इस ऐतिहासिक कानून को समय पर लागू करने और आवश्यक संशोधनों पर राजनीतिक आम सहमति बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को एक औपचारिक पत्र लिखा है। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण का लाभ अगले आम चुनावों में मिल सके।

रिजिजू का खरगे को पत्र और आम सहमति की अपील

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति एक सामूहिक राष्ट्रीय इच्छाशक्ति का प्रतीक है। उन्होंने विपक्ष से इस प्रक्रिया में सहयोग करने का आग्रह किया है ताकि विधायी बाधाओं को दूर किया जा सके। रिजिजू के अनुसार, सरकार इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि वर्तमान समय में आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो इस कानून के कार्यान्वयन में और अधिक देरी हो सकती है, जो राष्ट्रीय हित में नहीं होगा।

2029 के चुनावों के लिए समयसीमा का महत्व

सरकार की योजना के अनुसार, महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने के लिए कानून में कुछ तकनीकी और संवैधानिक बदलाव आवश्यक हैं। मूल अधिनियम के प्रावधानों के तहत, आरक्षण का कार्यान्वयन जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पर निर्भर था, जिससे इसके 2034 से पहले लागू होने की संभावना कम थी। हालांकि, अब सरकार इसे 2029 तक प्रभावी बनाने के लिए विशेष विधायी प्रावधान लाने की तैयारी में है। मंत्री रिजिजू ने पत्र में लिखा है कि 2026 वह महत्वपूर्ण वर्ष है जब कार्रवाई करना अनिवार्य है, अन्यथा 2029 की समयसीमा हाथ से निकल सकती है।

विपक्षी दलों के साथ संवाद और सरकार का रुख

विपक्ष द्वारा संवाद की कमी के आरोपों को खारिज करते हुए किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार लगातार विभिन्न राजनीतिक समूहों के संपर्क में है और उन्होंने उल्लेख किया कि 19 मार्च 2026 से समाजवादी पार्टी, डीएमके और अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, एनडीए के सहयोगी दलों के साथ भी इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई है। सरकार ने दोहराया है कि वह सदन के भीतर और बाहर विपक्ष के साथ आगे की बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है ताकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को बिना किसी बाधा के लागू किया जा सके।

सीटों का नया गणित और विधायी प्रक्रिया

प्रस्तावित संशोधनों और परिसीमन की प्रक्रिया के बाद लोकसभा की संरचना में भी महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़कर 816 हो सकती है। इस नई व्यवस्था में 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। 16 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक चलने वाले संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में इन्हीं बदलावों और संबंधित संशोधनों पर चर्चा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य इस सत्र के माध्यम से सभी दलों को एक मंच पर लाना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन और अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होने की अपील की है। फ्लोर लीडर्स को लिखे एक पत्र में प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तभी संभव है जब महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और नेतृत्व में समान अवसर मिलें। प्रधानमंत्री ने 11 अप्रैल को लिखे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराए जाना राष्ट्र के लोकतांत्रिक संस्थानों में नई ऊर्जा भरने के लिए आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कानून के लागू होने से शासन में अधिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।

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