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IND vs SA 1st Test: यशस्वी जायसवाल का टेस्ट औसत पहली बार 50 से नीचे, भारतीय ओपनर्स का दुर्लभ फ्लॉप शो

IND vs SA 1st Test: यशस्वी जायसवाल का टेस्ट औसत पहली बार 50 से नीचे, भारतीय ओपनर्स का दुर्लभ फ्लॉप शो
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यशस्वी जायसवाल ने टेस्ट क्रिकेट में अपने करियर की शुरुआत बेहद धमाकेदार अंदाज में की थी। उन्होंने अपने पदार्पण मैच में ही एक शानदार शतकीय पारी खेली थी, जिसने उन्हें तुरंत ही सुर्खियों में ला दिया। इस बेहतरीन शुरुआत के बाद, जायसवाल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार अपने प्रदर्शन से टीम इंडिया के लिए ओपनिंग स्लॉट में अपनी जगह को पूरी तरह से मजबूत कर लिया था। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता और संयम का मिश्रण देखने को मिला, जिसने उन्हें भारतीय टेस्ट टीम का एक अभिन्न अंग बना दिया।

औसत में गिरावट: एक अप्रत्याशित मोड़

कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच में यशस्वी जायसवाल के लिए एक अप्रत्याशित मोड़ आया। इस मुकाबले में वह डक पर आउट हो गए, जो उनके टेस्ट करियर की पहली शून्य पर आउट होने वाली पारी थी। यह घटना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से निराशाजनक रही, क्योंकि एक युवा बल्लेबाज के लिए पहली बार बिना खाता खोले पवेलियन लौटना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है और इस डक के साथ ही, उनके टेस्ट करियर का औसत पहली बार 50 के महत्वपूर्ण आंकड़े से नीचे आ गया, जो उनके अब तक के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए एक उल्लेखनीय बदलाव था। उनका औसत 49. 79 पर आ गया, जो उनके करियर की शुरुआत से ही 50 से ऊपर बना हुआ था।

करियर के आंकड़े और वर्तमान स्थिति

यशस्वी जायसवाल ने अब तक 27 टेस्ट मुकाबले खेले हैं, जिनमें उन्होंने 49. 79 के औसत से कुल 2440 रन बनाए हैं। इन आंकड़ों में उनकी प्रतिभा और निरंतरता साफ झलकती है, बावजूद इसके कि हालिया प्रदर्शन ने उनके औसत को प्रभावित किया है। अपने टेस्ट करियर में वह कुल 6 बार बिना खाता खोले पवेलियन लौटे हैं, जिसमें यह डक भी शामिल है। यह दर्शाता है कि हर बड़े बल्लेबाज को अपने करियर में ऐसे दौर से गुजरना पड़ता है जहां उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, उनकी पिछली पारियों में बड़े स्कोर बनाने की क्षमता ने उन्हें हमेशा एक मजबूत स्थिति में रखा है।

सबसे कम स्कोर का रिकॉर्ड

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में जायसवाल का प्रदर्शन उनके करियर का सबसे कम स्कोर भी रहा। इस मुकाबले की दोनों पारियों को मिलाकर वह कुल 12 रन ही बनाने में कामयाब हो सके, जो उनके टेस्ट करियर में किसी भी मैच में उनका सबसे कम संयुक्त स्कोर है। यह आंकड़ा उनकी फॉर्म में अस्थायी गिरावट को दर्शाता है, लेकिन यह भी याद रखना महत्वपूर्ण है कि क्रिकेट में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। एक युवा खिलाड़ी के रूप में, उन्हें इस अनुभव से सीखने और भविष्य में और भी मजबूत होकर वापसी करने का अवसर मिलेगा।

भारतीय ओपनर्स का दुर्लभ फ्लॉप शो

कोलकाता टेस्ट मैच में टीम इंडिया की दूसरी पारी में सिर्फ यशस्वी जायसवाल ही नहीं, बल्कि दूसरे ओपनिंग बल्लेबाज केएल राहुल भी सस्ते में पवेलियन लौट गए। जहां जायसवाल बिना खाता खोले आउट हुए, वहीं केएल राहुल सिर्फ एक रन बनाकर आउट हो गए और यह भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास में एक दुर्लभ घटना थी। ऐसा सिर्फ चौथी बार हुआ है जब घरेलू मैदान पर किसी टेस्ट मुकाबले में खेलते हुए भारत के दोनों ओपनिंग बल्लेबाज सिर्फ एक या शून्य के स्कोर तक पवेलियन लौट गए हों। यह घटना टीम के लिए एक चिंता का विषय बन गई, क्योंकि एक मजबूत शुरुआत किसी भी टेस्ट मैच में महत्वपूर्ण होती है।

ऐतिहासिक संदर्भ और पिछली घटनाएं

यह घटना भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक विशेष स्थान रखती है, क्योंकि यह बहुत कम देखने को मिलती है। इससे पहले, साल 2010 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहमदाबाद में खेले गए टेस्ट मैच में भी भारतीय टीम के दोनों ओपनिंग बल्लेबाज सिर्फ एक रन के स्कोर तक पवेलियन लौट गए थे। यह ऐतिहासिक समानता दर्शाती है कि भले ही यह एक दुर्लभ घटना हो, लेकिन यह पहले भी हो चुकी है और ऐसे मौकों पर टीम को मध्यक्रम के बल्लेबाजों पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है ताकि वे पारी को संभाल सकें और एक सम्मानजनक स्कोर खड़ा कर सकें। इस तरह की शुरुआत से टीम पर दबाव बढ़ जाता है। और उन्हें वापसी करने के लिए असाधारण प्रदर्शन करना पड़ता है।

आगे की राह और चुनौतियां

यशस्वी जायसवाल और भारतीय टीम के लिए यह मैच एक सीखने का अनुभव रहा है। जायसवाल को अपनी बल्लेबाजी पर फिर से ध्यान केंद्रित करना होगा और अपनी पिछली सफलताओं से प्रेरणा लेनी होगी और वहीं, टीम प्रबंधन को भी ओपनिंग संयोजन पर विचार करना होगा, खासकर जब वे घरेलू परिस्थितियों में खेल रहे हों। टेस्ट क्रिकेट की लंबी यात्रा में ऐसे उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, और महत्वपूर्ण यह है कि खिलाड़ी और टीम इन चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं और उनसे कैसे सीखते हैं। यह निश्चित रूप से जायसवाल के करियर का एक महत्वपूर्ण चरण है, जहां उन्हें अपनी मानसिक दृढ़ता और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन करना। होगा ताकि वे अपने औसत को फिर से 50 के पार ले जा सकें और टीम के लिए महत्वपूर्ण योगदान देना जारी रख सकें।

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