गुजरात सरकार ने राज्य में आगामी जनगणना की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है और इसके सुचारू कार्यान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए हैं। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, जनगणना की प्रक्रिया दो मुख्य चरणों में संपन्न की जाएगी। पहले चरण में घरों की सूची तैयार की जाएगी और उनकी गिनती होगी, जिसे हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) कहा जाता है। इसके पश्चात दूसरे चरण में जनसंख्या की वास्तविक गणना (Population Enumeration) की जाएगी। सरकार ने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है।
जनगणना के दो चरणों का विस्तृत विवरण
गुजरात सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जनगणना की प्रक्रिया को दो स्पष्ट चरणों में विभाजित किया गया है। प्रथम चरण, जिसे हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) कहा जाता है, इस वर्ष अप्रैल से सितंबर के बीच आयोजित किया जाएगा। इस चरण का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी रिहायशी और गैर-रिहायशी भवनों का डेटा एकत्र करना है। इसके बाद, जनगणना का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण, यानी जनसंख्या गणना (PE), फरवरी 2027 में निर्धारित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह चरणबद्ध दृष्टिकोण डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने और प्रशासनिक बोझ को प्रबंधित करने के लिए अपनाया गया है।
महत्वपूर्ण तिथियां और समय सीमा
राज्य सरकार की प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि भारत सरकार के 7 जनवरी के नोटिफिकेशन के अनुपालन में गुजरात सरकार ने नया शेड्यूल जारी किया है। 2 फरवरी को जारी राज्य अधिसूचना के अनुसार, हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन के लिए फील्डवर्क 20 अप्रैल से 19 मई, 2026 तक संचालित किया जाएगा। फील्डवर्क की शुरुआत से पहले, 5 अप्रैल से 19 अप्रैल, 2026 तक 15 दिनों की अवधि के लिए 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' (SE) अभ्यास आयोजित किया जाएगा। यह समय सीमा अधिकारियों को डेटा संग्रह के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करती है।
डिजिटल स्व-गणना और तकनीकी पहल
इस बार की जनगणना में तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। घर-घर जाकर किए जाने वाले सर्वे से पहले डिजिटल सेल्फ-एन्यूमरेशन फेज आयोजित होगा। इसका प्राथमिक उद्देश्य नागरिकों की भागीदारी को सरल बनाना और डेटा की गुणवत्ता में सुधार करना है। इस अवधि के दौरान, नागरिकों के पास अपनी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वयं जमा करने का विकल्प होगा। अधिकारियों का मानना है कि इस डिजिटल पहल से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि यह प्रक्रिया अधिक समावेशी और पारदर्शी बनेगी।
डेटा संग्रह का दायरा और बुनियादी सुविधाएं
सेल्फ-एन्यूमरेशन चरण के समाप्त होने के बाद, प्रशिक्षित प्रगणक (Enumerators) फील्डवर्क के लिए प्रत्येक घर का दौरा करेंगे। हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) के दौरान केवल व्यक्तियों की संख्या ही नहीं, बल्कि घरों की भौतिक स्थिति, परिवारों के पास उपलब्ध संपत्ति और उन्हें मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल, बिजली और स्वच्छता पर भी विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा। यह व्यापक डेटाबेस राज्य के हर कोने को कवर करेगा, जिससे भविष्य की विकास योजनाओं के लिए एक ठोस आधार तैयार होगा।
कानूनी ढांचा और सूचना की गोपनीयता
पूरी जनगणना प्रक्रिया जनगणना अधिनियम 1948 और जनगणना नियम 1990 के कड़े प्रावधानों के तहत संचालित की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान एकत्र की गई सभी व्यक्तिगत जानकारियां पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएंगी। अधिनियम की धारा 4 के अनुसार नियुक्त किए गए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाएं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस डेटा का उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और नीति निर्माण के लिए किया जाएगा, और इसे किसी भी अन्य एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जाएगा।