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एआई से नौकरियों पर संकट: 90 प्रतिशत सीईओ ने जताई बड़ी छंटनी की आशंका

एआई से नौकरियों पर संकट: 90 प्रतिशत सीईओ ने जताई बड़ी छंटनी की आशंका
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दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव ने रोजगार की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है और जैसे-जैसे गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी दिग्गज टेक कंपनियां एआई तकनीक पर अरबों रुपये का निवेश कर रही हैं, वैसे-वैसे कर्मचारियों के मन में नौकरी जाने का डर भी गहराता जा रहा है। हाल ही में आई एक नई रिपोर्ट ने इस चिंता को और पुख्ता कर दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि अगले दो वर्षों के भीतर एआई की वजह से बड़े पैमाने पर छंटनी देखने को मिल सकती है। सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत सीईओ का यह मानना है कि आने वाले समय में एआई के कारण कर्मचारियों की कुल संख्या में कमी आएगी, जिससे तकनीकी क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बन गया है।

मर्सर की रिपोर्ट और छंटनी की आशंका

कंसल्टिंग फर्म मर्सर द्वारा जारी की गई एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, 9 में से लगभग 10 सीईओ का यह मानना है कि एआई भविष्य में इंसानी कर्मचारियों की जगह ले सकता है या कंपनियों में हेडकाउंट को कम कर सकता है। इस महत्वपूर्ण सर्वे में अमेरिका के लगभग 1000 बड़े एग्जीक्यूटिव्स और एचआर लीडर्स की राय ली गई थी। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि एआई अब सिर्फ प्रयोगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कंपनियों के काम करने के बुनियादी तरीके को बदल रहा है। कई व्यावसायिक संस्थानों को लगता है कि एआई रोजमर्रा के दफ्तरी कामों को ऑटोमेट कर सकता है, जिससे इंसानों पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी। यही मुख्य कारण है कि अगले दो वर्षों में कई कंपनियां अपने वर्कफोर्स में 20 प्रतिशत तक की कटौती करने की योजना बना रही हैं।

टेक सेक्टर में जारी छंटनी का दौर

एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच तकनीकी क्षेत्र में छंटनी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 15 लाख कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी बड़ी कंपनियां अब पारंपरिक कार्यों के बजाय एआई टूल्स और जनरेटिव एआई प्लेटफॉर्म पर भारी निवेश कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में कंपनियों में लगभग 50 प्रतिशत काम पूरी तरह से इंसानों द्वारा किया जा रहा है, लेकिन अगले दो वर्षों में यह आंकड़ा घटकर केवल 35 प्रतिशत रह जाने की संभावना है। इसका सीधा मतलब यह है कि ऑफिस के अधिकांश कार्यों में एआई का दखल तेजी से बढ़ने वाला है।

कर्मचारियों में बढ़ता तनाव और असुरक्षा

मर्सर की रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ है कि एआई और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। नौकरी जाने के डर से कई लोग अपनी वर्तमान नौकरी से असंतुष्ट होने के बावजूद उसे छोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं और आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में जहां 66 प्रतिशत कर्मचारी अपनी नौकरी में खुद को सुरक्षित और बेहतर स्थिति में महसूस करते थे, वहीं 2026 में यह आंकड़ा गिरकर मात्र 44 प्रतिशत रह गया है। इससे स्पष्ट होता है कि कर्मचारियों का आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और हालांकि कंपनियां एआई में निवेश तो कर रही हैं, लेकिन कई फर्में अभी भी इससे वास्तविक व्यावसायिक लाभ प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

सैम ऑल्टमैन ने स्वीकार की अपनी गलती

सिडनी में आयोजित कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की एक कॉन्फ्रेंस के दौरान ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने एक चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि एआई की वजह से बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने का उनका पुराना डर गलत साबित हुआ है। ऑल्टमैन ने बताया कि एआई ने उतने लोगों की नौकरियां नहीं छीनी हैं जितनी उन्हें पहले उम्मीद थी। उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि मैं इस मामले में गलत साबित हुआ। " हालांकि, उनके इस बयान के बावजूद उद्योग जगत में एआई के भविष्य को लेकर चिंताएं बरकरार हैं।

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