एअर इंडिया के लिए चुनौतियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और हाल ही में की गई एक बड़ी कार्रवाई के तहत एअर इंडिया के 2 और पायलट शुरुआती ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के तुरंत बाद एयरलाइन प्रबंधन ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों पायलटों को फ्लाइट रोस्टर से बाहर कर दिया है। इसका मतलब है कि जब तक अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक ये पायलट किसी भी विमान का संचालन नहीं कर पाएंगे। यह कदम विमानन सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए उठाया गया है।
फाइनल रिपोर्ट का इंतजार
इन दोनों पायलटों की अंतिम टेस्ट रिपोर्ट आने में अभी 24 से 48 घंटे या उससे अधिक का समय लग सकता है। एअर इंडिया के सूत्रों का कहना है कि फाइनल रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि इन पायलटों के खिलाफ आगे क्या अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल, एहतियात के तौर पर उन्हें ड्यूटी से हटा दिया गया है (De-Rostered)। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जा रही है कि विमान के कॉकपिट में केवल वही लोग हों जो शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह फिट हों।
फुकेत-दिल्ली फ्लाइट की घटना का असर
पायलटों की इस सघन जांच के पीछे फुकेत से दिल्ली आ रहे एअर इंडिया के एक विमान के साथ हुई गंभीर घटना है। पिछले दिनों फुकेत-दिल्ली विमान के टर्बुलेंस में जाने के बाद पायलटों की जांच तेज कर दी गई थी। उस घटना के बाद एअर इंडिया ने एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के अपने सभी पायलटों के लिए ड्रग टेस्ट अनिवार्य करने की घोषणा की थी। जांच में यह बात सामने आई थी कि उस विमान के मुख्य कैप्टन ने मारिजुआना यानी गांजे का सेवन किया था, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।
विमान हादसे का विवरण
4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही फ्लाइट संख्या AI2379 के साथ एक बड़ा हादसा होते-होते बचा था। टर्बुलेंस के कारण एअरबस A320 विमान अचानक 300 फुट नीचे आ गया था। इस अचानक आई गिरावट की वजह से विमान में सवार 145 लोगों में से कम से कम 24 यात्री घायल हो गए थे। विमान में 137 यात्री और चालक दल के 8 सदस्य सवार थे। इस घटना के बाद जब मुख्य पायलट की जांच की गई, तो उसमें गांजा के सेवन की पुष्टि हुई, जिसने पूरी एयरलाइन इंडस्ट्री में हड़कंप मचा दिया था।
5000 से अधिक पायलटों की होगी जांच
टाटा ग्रुप की इन दोनों एयरलाइंस, एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस में कुल मिलाकर 5000 से अधिक पायलट कार्यरत हैं। अब तक 300 से ज्यादा पायलटों का ड्रग टेस्ट कराया जा चुका है। कंपनी ने पिछले हफ्ते पायलटों को भेजे एक आंतरिक संदेश में स्पष्ट किया था कि यह जांच अनिवार्य है और इसमें मौजूदा विमानन नियमों के तहत प्रतिबंधित सभी पदार्थों और दवाओं की जांच शामिल होगी। यह कदम नियमों की जरूरतों से आगे बढ़कर यात्रियों और आम लोगों का भरोसा जीतने के लिए उठाया जा रहा है।
जांच के केंद्र और सुरक्षा मानक
ये ड्रग टेस्ट विभिन्न स्थानों पर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें गुरुग्राम अकादमी में ट्रेनिंग सेशन, उड़ान के बाद फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर्स, विमानन कंपनियों के ऑफिस और संबंधित बेस द्वारा मुहैया कराई गई जगहें शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, यात्रियों और हितधारकों को सुरक्षा का भरोसा दिलाने के लिए यह पहल एक एहतियाती कदम के रूप में की जा रही है। कंपनी का मानना है कि इस तरह के कड़े टेस्ट से पायलटों की आदतों में सुधार होगा और विमानन सुरक्षा के उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जा सकेगा।