अमन सहरावत ने पुरुषों की 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती स्पर्धा में भारत के लिए एक ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। एक बेहद रोमांचक और उतार-चढ़ाव भरे फाइनल मुकाबले में अमन ने उत्तर कोरिया के पहलवान हान चोंग सोंग को शिकस्त दी। यह जीत न केवल अमन के व्यक्तिगत कौशल का प्रमाण है, बल्कि इसने एशियाई खेलों में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या को 20 तक पहुंचा दिया है। पूरे मैच के दौरान दर्शकों को जबरदस्त रोमांच देखने को मिला, जहां अमन ने अपनी सूझबूझ और हार न मानने वाले जज्बे का शानदार प्रदर्शन किया।
मैच की शुरुआत और अमन का दबदबा
मुकाबले के शुरुआती पलों से ही अमन सहरावत काफी सतर्क और लय में नजर आ रहे थे। उन्होंने मैट पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी और विपक्षी पहलवान को कोई मौका नहीं दिया। पहले राउंड में उत्तर कोरिया के हान चोंग सोंग ने कई बार अमन पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय पहलवान ने बहुत ही समझदारी और तकनीक के साथ अपना बचाव किया। अमन ने न केवल बचाव किया, बल्कि सही समय पर जवाबी हमला करते हुए अंक बटोरने शुरू किए। देखते ही देखते अमन ने 6-1 की एक मजबूत और निर्णायक बढ़त हासिल कर ली। उस समय खेल की स्थिति को देखकर ऐसा लग रहा था कि अमन इस मुकाबले को एकतरफा अंदाज में जीत लेंगे और गोल्ड मेडल आसानी से उनके नाम हो जाएगा।
उत्तर कोरियाई पहलवान की वापसी और बढ़ता दबाव
खेल में असली रोमांच और तनाव तब पैदा हुआ जब दूसरे हाफ का खेल शुरू हुआ। दूसरे हाफ के महज एक मिनट के भीतर हान चोंग सोंग ने जबरदस्त वापसी की। उत्तर कोरियाई खिलाड़ी ने अचानक बेहद आक्रामक रुख अपनाया और एक के बाद एक कई तीखे हमले किए। इन हमलों ने अमन को थोड़े समय के लिए दबाव में डाल दिया। हान ने अपनी फुर्ती का फायदा उठाते हुए लगातार छह अंक हासिल कर लिए। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत स्कोर 6-1 से बदलकर 6-7 हो गया और अमन पिछड़ गए। एक समय पर ऐसा लगने लगा था कि स्वर्ण पदक भारत के हाथ से निकलकर उत्तर कोरिया के पाले में चला जाएगा। भारतीय खेमे में चिंता की लहर दौड़ गई थी क्योंकि मैच अब अंतिम चरणों में था।
अमन की ऐतिहासिक वापसी और अंतिम निर्णय
दबाव की इस घड़ी में अमन सहरावत ने अपना धैर्य नहीं खोया। उन्होंने खुद को शांत रखा और सही मौके का इंतजार किया और जब मैच अपने निर्णायक मोड़ पर था, तब अमन ने एक बेहतरीन दांव (मूव) लगाया और एक साथ 4 अंक हासिल कर लिए। इस एक दांव ने पूरे मैच का पासा पलट दिया और भारत को फिर से बढ़त दिला दी। इसके बाद उत्तर कोरिया के कोच ने रेफरी के फैसले को चुनौती दी। वीडियो रिव्यू और जांच के बाद कोच की इस चुनौती को खारिज कर दिया गया। कुश्ती के नियमों के अनुसार, यदि कोई चुनौती विफल हो जाती है, तो विपक्षी खिलाड़ी को 1 अतिरिक्त अंक दिया जाता है। इस तरह अमन को 1 अंक और मिला और उनकी बढ़त और भी मजबूत हो गई। अंत में अमन ने इस बढ़त को बरकरार रखा और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
भारतीय कुश्ती और खेलों में सफलता
अमन सहरावत की यह जीत इस प्रतियोगिता में भारत के लिए कुश्ती का दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले सुजीत कलकल ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए फ्री स्टाइल बॉक्सिंग में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था। सुजीत कलकल की कल की सफलता के बाद अमन की इस जीत ने भारतीय दल के उत्साह को दोगुना कर दिया है। भारत ने अब तक इस एशियाई खेलों में कुल 20 स्वर्ण पदक जीत लिए हैं, जो देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। अमन की यह जीत उनकी कड़ी मेहनत और अंतिम समय तक लड़ने की क्षमता को दर्शाती है, जिसने उन्हें 6-7 से पिछड़ने के बाद भी चैंपियन बनाया।