समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बांकीपुर और दतिया उपचुनाव के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने भाजपा की हार पर तंज कसते हुए कहा कि सत्ताधारी दल संभवतः यह देखना चाहता था कि बिना किसी बेईमानी के उन्हें जनता से कितने वोट प्राप्त होते हैं और अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि जनता ने अब यह दिखा दिया है कि यदि भाजपा बिना किसी अनुचित साधन के चुनाव मैदान में आती है, तो उसे केवल हार का ही सामना करना पड़ेगा। उनके अनुसार, यह परिणाम भाजपा के लिए एक बड़े सबक की तरह है।
बिना बेईमानी के वोट देखने का भाजपा का प्रयोग
अखिलेश यादव ने बांकीपुर और दतिया के चुनावी परिणामों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भाजपा यह परखना चाहती थी कि जनता के बीच उनके प्रति कितनी नाराजगी है और उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने इस बार पुलिस प्रशासन को लगाए बिना, बेईमानी किए बिना और ईवीएम में किसी भी प्रकार का घोटाला किए बिना यह देखने का फैसला किया था कि उन्हें कितना जनसमर्थन मिलता है। यादव ने कहा कि यह केवल एक हार नहीं है, बल्कि भाजपा ने खुद यह तय किया था कि बिना बेईमानी के जनता उन्हें कितना वोट देगी और उन्होंने आगे कहा कि इस हार के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के पास बाकी कुछ बचा ही नहीं है।
भाजपा को मिला 12 साल का रिटर्न गिफ्ट
सपा सुप्रीमो ने भाजपा की इस स्थिति को 12 साल का रिटर्न गिफ्ट करार दिया। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि अगर भाजपा कुन्दरकी की तरह चुनाव लड़ती या बंगाल की तरह चुनाव लड़ती और भारी बल का प्रयोग कर देती, तो शायद उनकी हार नहीं होती। लेकिन इस बार उन्होंने बिना किसी प्रशासनिक दबाव के चुनाव लड़ने का विकल्प चुना था ताकि वे वास्तविक स्थिति जान सकें। अखिलेश यादव ने कहा कि जनता ने उनके इस प्रयोग का जवाब हार के रूप में दिया है, जिससे यह सिद्ध होता है कि बिना धांधली के भाजपा का जीतना कठिन है।
भगवान और अहंकार पर अखिलेश का प्रहार
इससे पहले अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि भगवान को नचाने का अहंकार रखने वालों को भगवान ने ही नचा दिया है। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग खुद को भगवान से ऊपर समझते थे, उन्हें भगवान ने चलती गाड़ी से नीचे उतार दिया है और साथ ही उनके घमंड का बुखार भी उतार दिया है। यादव ने इस जीत का श्रेय युवाओं की एकता और उनके अभिभावकों के आक्रोश को दिया और उन्होंने कहा कि भाजपा ने कई तरीकों से जनता के विश्वास और उनकी आस्था के साथ छल किया है, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।
डबल इंजन की डबल हार और इस्तीफे की मांग
अखिलेश यादव ने भाजपा के भीतर चल रही खींचतान पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अब भाजपा के लोग ही अपने किसी साथी का इस्तीफा मांगेंगे क्योंकि जो नेता अपनी ही विधानसभा सीट नहीं बचा पाए, उनके भरोसे पार्टी की नैया पार नहीं हो सकती। उन्होंने इसे उन लोगों की हार बताया जिन्होंने उम्मीदवारों को संगठन पर अपनी मर्जी से थोपा था। यादव ने तंज कसते हुए कहा कि अब कोई यह नहीं कह पाएगा कि भाजपा में इस्तीफे नहीं होते हैं। उन्होंने इसे डबल इंजन की डबल हार बताते हुए कहा कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष अपनी विधानसभा नहीं जिता पाए, तो राज्य अध्यक्ष विधानसभा चुनाव कैसे लड़वा पाएंगे। उन्होंने अंत में कहा कि भाजपा की यह हार बदलाव की शुरुआत है और अब उनकी सबसे सुरक्षित सीटें भी नहीं बचेंगी। भविष्य में भाजपा का संकट इतना बढ़ जाएगा कि उनका टिकट लेने वाला व्यक्ति ड्रोन और दूरबीन से भी नहीं मिलेगा।