जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) की बैठक में अमरनाथ यात्रा 2026 के कार्यक्रम को अंतिम रूप दे दिया गया है। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, यह पवित्र तीर्थयात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होगी और 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। कुल 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के लिए अग्रिम पंजीकरण की प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 से देशव्यापी स्तर पर शुरू की जाएगी। प्रशासन ने इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में 25% की वृद्धि का अनुमान लगाया है।
पंजीकरण प्रक्रिया और पात्रता मानदंड
श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण की सुविधा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध कराई गई है। ऑफलाइन पंजीकरण के लिए पंजाब नेशनल बैंक (PNB), भारतीय स्टेट बैंक (SBI), यस बैंक और जम्मू-कश्मीर बैंक की 554 चिन्हित शाखाओं को अधिकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त, श्रद्धालु श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से भी अपना पंजीकरण करा सकते हैं। यात्रा के लिए आयु सीमा 13 वर्ष से 70 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है, और 6 सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बीमा कवर और वित्तीय सुरक्षा में वृद्धि
श्राइन बोर्ड ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए समूह व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की राशि को दोगुना कर दिया है। अब किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में बीमा राशि ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख कर दी गई है। इसके साथ ही, स्थानीय सेवा प्रदाताओं के हितों का ध्यान रखते हुए घोड़े या खच्चर की मृत्यु होने पर मालिकों को ₹50,000 का मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। यह कदम यात्रा के दौरान होने वाले जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मार्गों का चौड़ीकरण और बुनियादी ढांचा
यात्रा को सुगम बनाने के लिए बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर सड़क चौड़ीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है। सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा किए गए इस सुधार से श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक सुरक्षित होगी। श्रीनगर और बालटाल में नए 'यात्री निवास' का निर्माण किया गया है ताकि ठहरने की व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके। इसके अलावा, पूरे यात्रा मार्ग पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग का उपयोग अनिवार्य किया गया है, जिससे प्रत्येक यात्री की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव हो सकेगी।
स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा प्रबंधन
श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने 200 बेड का एक अत्याधुनिक अस्पताल तैयार किया है। यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर चिकित्सा शिविर और ऑक्सीजन बूथ स्थापित किए जाएंगे और मौसम की सटीक जानकारी के लिए डॉप्लर रडार की तैनाती की गई है, जो संभावित प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी देने में सक्षम है। सुरक्षा के मोर्चे पर, सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों को रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है ताकि यात्रा निर्बाध रूप से संपन्न हो सके।