एपल के भविष्य के प्रोजेक्ट्स को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिससे तकनीकी जगत में हड़कंप मच गया है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सिस्टम में हुई सेंधमारी के बाद अब यह खबर आई है कि इस लीक में आईफोन 18 प्रो से जुड़ी बेहद संवेदनशील जानकारियां भी सार्वजनिक हो गई हैं। दस्तावेजों और सूत्रों के हवाले से पता चला है कि डेटा चुराने वाले एक रैंसमवेयर ग्रुप ने डार्क वेब पर कुछ ऐसी फाइलें पोस्ट की हैं जिनमें आईफोन 18 प्रो मॉडल के पार्ट्स और उनके सप्लायर्स की गुप्त जानकारी और तस्वीरें शामिल हैं।
आईफोन 18 प्रो से जुड़ी गोपनीय जानकारी हुई सार्वजनिक
रॉयटर्स द्वारा समीक्षा किए गए नए दस्तावेजों के अनुसार कम से कम 6 ऐसी फाइलें मिली हैं जिनमें आईफोन 18 प्रो मॉडल के विभिन्न हिस्सों और उन्हें सप्लाई करने वाली कंपनियों का पूरा विवरण दिया गया है। इन फाइलों में मुख्य सर्किट बोर्ड पर इस्तेमाल होने वाली चिप्स, बैटरी के डिजाइन और कैमरा मॉड्यूल के पार्ट्स की विस्तृत जानकारी मौजूद है। मामले की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि एपल इस तरह की जानकारी को अत्यंत संवेदनशील मानता है क्योंकि यह उन मॉडल्स से जुड़ी है जो अभी तक बाजार में लॉन्च भी नहीं हुए हैं। यह डेटा आईफोन के पुर्जों और उन्हें बनाने वाली कंपनियों के बीच के गोपनीय संबंधों को उजागर करता है।
वॉटरमार्क और इंटरनल कोड नेम का खुलासा
लीक हुई कई फाइलों पर एपल के कॉन्फिडेंशियल वॉटरमार्क लगे होने की बात सामने आई है। इसके अलावा इन दस्तावेजों में आईफोन 18 प्रो जनरेशन के लिए एपल द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले इंटरनल कोड-नेम भी दिए गए हैं। आईफोन 18 प्रो फाइल्स वाले फोल्डर में टाटा के एक प्लांट में ड्रॉप टेस्ट से गुजर रहे एक हैंडसेट की तस्वीरें भी मिली हैं जिन पर 2026 की शुरुआत की तारीख अंकित है। इन तस्वीरों में एक ग्रे रंग का स्मार्टफोन दिखाई दे रहा है जिसका आकार सामान्य स्लैब जैसा है और इसके पीछे की तरफ तीन कैमरे और एपल का लोगो साफ देखा जा सकता है।
एपल और टाटा की साझेदारी पर मंडराता खतरा
इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार इस डेटा लीक से एपल और टाटा के बीच के व्यापारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है। एपल अपने सप्लायर समझौतों को बहुत गुप्त रखता है और टाटा वर्तमान में चीन के बाहर एपल के सबसे महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स में से एक बनकर उभरा है। इस लीक से न केवल प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को एपल की रणनीति का पता चल सकता है बल्कि नकली सामान बनाने वालों को भी यह जानकारी मिल सकती है कि कौन सी कंपनी किस पार्ट को तैयार कर रही है और टाटा एक कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर के रूप में आईफोन के लिए पार्ट्स सप्लाई करने और असेंबलिंग का काम करता है और इस तरह की सुरक्षा चूक भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए चिंता का विषय है।
लाखों फाइलों के लीक होने का दावा
रॉयटर्स की पिछली रिपोर्टों के अनुसार वर्ल्ड लीक्स नामक ग्रुप ने डार्क वेब पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की 200000 से ज्यादा फाइलों को लीक किया था। इन फाइलों में केवल आईफोन ही नहीं बल्कि टेस्ला के कुछ पार्ट्स के डिजाइन डॉक्यूमेंट्स भी शामिल थे क्योंकि ये दोनों ही कंपनियां टाटा की क्लाइंट हैं। इसके अलावा इस डेटा में ताइवान सेमी-कंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) और क्वालकॉम के दस्तावेज भी पाए गए हैं जो आईफोन के लिए महत्वपूर्ण चिप्स और पार्ट्स बनाते हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब एपल पहले से ही मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती कीमतों के कारण दबाव में है। हाल ही में कंपनी ने आईपैड और मैकबुक के दाम बढ़ाए हैं और जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में आईफोन की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।