अरविंद केजरीवाल को पीएम आवास जाने से रोका गया, ई-20 पेट्रोल पर प्रदर्शन

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अरविंद केजरीवाल को पीएम आवास जाने से रोका गया, ई-20 पेट्रोल पर प्रदर्शन
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दिल्ली की राजनीति में आज उस समय भारी गहमागहमी देखने को मिली जब आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ई-20 पेट्रोल के मुद्दे पर प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू किया। इस विरोध प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने फिरोजशाह रोड पर ही रोक दिया, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इस कार्रवाई ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच केंद्र सरकार के खिलाफ रोष को और बढ़ा दिया है।

शीर्ष नेताओं की भागीदारी और जनता की मांग

इस मार्च में अरविंद केजरीवाल के साथ आम आदमी पार्टी के कई दिग्गज नेता शामिल हुए। पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और राज्यसभा सांसद संजय सिंह इस प्रदर्शन में प्रमुखता से मौजूद रहे। दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री आतिशी भी केजरीवाल के साथ इस मार्च का हिस्सा बनीं। केजरीवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने साथ 2 लाख से ज्यादा नागरिकों की याचिकाएं लेकर प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि उनके साथ 100 ऐसे लोग भी हैं जिनकी गाड़ियां ई-20 पेट्रोल के कारण खराब हो चुकी हैं। केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इन प्रभावित लोगों की समस्याओं को सुनेंगे और उचित कदम उठाएंगे।

ई-20 पेट्रोल को लेकर रखी गई शर्तें

अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के समक्ष ई-20 पेट्रोल को लेकर दो मुख्य विकल्प रखे हैं। उनकी पहली मांग है कि सरकार ई-20 पेट्रोल के फैसले को पूरी तरह से वापस ले ले। यदि सरकार इसे जारी रखना चाहती है, तो इसकी कीमत घटाकर 85 रुपये प्रति लीटर की जानी चाहिए। केजरीवाल का तर्क है कि इस ईंधन की वजह से वाहनों के इंजन पर बुरा असर पड़ रहा है, इसलिए इसकी कीमत कम होनी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की कि पेट्रोल पंपों पर जनता को यह विकल्प मिलना चाहिए कि वे अपनी पसंद के अनुसार शुद्ध पेट्रोल या इथनॉल मिश्रित पेट्रोल अपनी गाड़ियों में भरवा सकें।

वकीलों का विरोध और सुरक्षा की चिंताएं

केजरीवाल के इस मार्च का वकीलों के एक बड़े समूह ने कड़ा विरोध किया है और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को सौंपे गए एक प्रतिवेदन में सैकड़ों वकीलों ने इस मार्च को लेकर अपनी गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। वकीलों का कहना है कि प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास देश के सबसे संवेदनशील और उच्च-सुरक्षा वाले क्षेत्रों में से एक है। ऐसे स्थान की ओर किसी भी प्रकार की सार्वजनिक भीड़ का जाना राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।

वकीलों ने पुलिस को 21 जुलाई 2026 की उस पुरानी घटना की भी याद दिलाई, जब विपक्षी सांसदों ने बिना किसी पूर्व अनुमति के प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया था। उस घटना के बाद, सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न अदालतों के वकीलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष एक संयुक्त प्रतिवेदन दिया था, जिसमें हाई-सिक्योरिटी क्षेत्रों में प्रदर्शनों को लेकर स्पष्ट और बाध्यकारी दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई थी ताकि भविष्य में ऐसी सुरक्षा चूक न हो।

बीजेपी का हमला: अराजकता की राजनीति का आरोप

भारतीय जनता पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के इस मार्च को एक राजनीतिक नाटक करार दिया है। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच अराजक नंबर 1 बनने की एक प्रतियोगिता चल रही है। मल्होत्रा के अनुसार, जब से राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास पर प्रदर्शन किया है, तब से केजरीवाल खुद को इस राजनीति में पिछड़ा हुआ महसूस कर रहे थे। इसी की भरपाई के लिए उन्होंने बिना किसी अनुमति के ई-20 पेट्रोल के मुद्दे पर प्रधानमंत्री आवास जाने की घोषणा की है।

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने आगे कहा कि पहले अराजकता फैलाना और फिर खुद को पीड़ित बताकर विक्टिम कार्ड खेलना अरविंद केजरीवाल की पुरानी पहचान रही है। उन्होंने दावा किया कि जब पुलिस उन्हें सुरक्षा कारणों से रोकेगी, तो केजरीवाल यह आरोप लगाएंगे कि सरकार उनसे बातचीत करने से इनकार कर रही है, ताकि वे जनता की सहानुभूति बटोर सकें।

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