विज्ञापन

ATF कीमतों पर तेल कंपनियों का यू-टर्न, सरकारी हस्तक्षेप के बाद मिली राहत

ATF कीमतों पर तेल कंपनियों का यू-टर्न, सरकारी हस्तक्षेप के बाद मिली राहत
विज्ञापन

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में की गई भारी बढ़ोतरी के फैसले को वापस ले लिया है और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद, तेल कंपनियों ने घरेलू एयरलाइंस के लिए कीमतों में केवल 25% यानी लगभग ₹15 प्रति लीटर की आंशिक और चरणबद्ध बढ़ोतरी लागू करने का निर्णय लिया है। इससे पहले वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण कीमतों में 100% से अधिक की वृद्धि की आशंका जताई जा रही थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ परामर्श के बाद लिए गए इस निर्णय का उद्देश्य घरेलू विमानन क्षेत्र को स्थिरता प्रदान करना और यात्रियों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करना है।

वैश्विक ऊर्जा संकट और कीमतों में बदलाव का कारण

मंत्रालय के आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया था। भारत में ATF की कीमतें वर्ष 2001 से नियंत्रण-मुक्त (Deregulated) हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर हर महीने इनकी समीक्षा की जाती है। 1 अप्रैल 2026 को घरेलू बाजारों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि की संभावना थी, जिसे सरकार के समय पर हस्तक्षेप के बाद सीमित कर दिया गया है। हालांकि, विदेशी मार्गों पर संचालित होने वाली उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में हुई पूरी बढ़ोतरी का भुगतान करना होगा, जैसा कि वैश्विक स्तर पर अन्य देशों में प्रचलित है।

प्रमुख शहरों में ATF की नई संशोधित दरें

तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी संशोधित आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रमुख महानगरों में विमान ईंधन की नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गई हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ATF की कीमत ₹1,04,927 प्रति किलो लीटर निर्धारित की गई है। वहीं, कोलकाता में यह दर ₹1,09,450 प्रति किलो लीटर, मुंबई में ₹98,247 प्रति किलो लीटर और चेन्नई में ₹1,09,873 प्रति किलो लीटर तय की गई है। इन दरों में की गई कटौती से एयरलाइंस की परिचालन लागत में कमी आएगी, क्योंकि विमानन कंपनियों के कुल खर्च का लगभग 40% हिस्सा केवल ईंधन पर व्यय होता है।

सरकारी हस्तक्षेप और विमानन क्षेत्र पर प्रभाव

पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के हस्तक्षेप के प्रति आभार व्यक्त किया है। मंत्रालय के अनुसार, इस संतुलित निर्णय से घरेलू यात्रियों को हवाई किराए में होने वाली अचानक वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी। यह कदम न केवल एयरलाइंस के आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि व्यापार और लॉजिस्टिक्स के लिए आवश्यक हवाई संपर्क (Air Connectivity) को भी बनाए रखने में सहायक होगा। माल ढुलाई और कार्गो सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए भी इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों पर स्थिति स्पष्ट

विमान ईंधन के साथ-साथ सरकार ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में हुई हालिया वृद्धि पर भी स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय के अनुसार, हाल ही में की गई ₹2 प्रति लीटर की बढ़ोतरी केवल प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट्स जैसे XP95, Power95 और Speed पर लागू होती है। ये हाई-ऑक्टेन परफॉर्मेंस वाले उत्पाद हैं, जिनकी कीमतें हर दो सप्ताह में संशोधित की जाती हैं। कुल पेट्रोल बिक्री में इन प्रीमियम उत्पादों की हिस्सेदारी केवल 2% से 5% के बीच है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश भर के पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले नियमित पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वे स्थिर बनी हुई हैं।

ईंधन मूल्य निर्धारण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में विमान ईंधन के मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक मांग-आपूर्ति के समीकरणों पर आधारित है। 2001 में नियंत्रण-मुक्त किए जाने के बाद से, तेल कंपनियां स्वायत्त रूप से कीमतों का निर्धारण करती हैं। वर्तमान में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम विमानन क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने और देश के भीतर आर्थिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

विज्ञापन