जम्मू संभाग के कनाचक सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर पाकिस्तान की ओर से भारतीय सेना के एक रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPA) को निशाना बनाकर फायरिंग की गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब भारतीय ड्रोन अपने क्षेत्र के भीतर एक नियमित निगरानी सॉर्टी पर था। पाकिस्तानी सेना की इस कार्रवाई को सीमा पर शांति भंग करने और उकसावे के एक गंभीर प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस गोलाबारी में भारतीय ड्रोन को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और वह सुरक्षित रूप से अपने बेस पर वापस लौट आया है।
सुरक्षा बलों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से कुल 5 राउंड फायर किए गए। यह फायरिंग पाकिस्तानी सीमा चौकियों से की गई थी, जिसका उद्देश्य भारतीय निगरानी तंत्र को बाधित करना था। घटना के तुरंत बाद भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया। सीमा पर तैनात जवानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और किसी भी संभावित घुसपैठ या अन्य संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए निगरानी तेज कर दी गई है।
घटना का विस्तृत विवरण और फायरिंग का क्रम
अधिकारियों के अनुसार, यह घटना बीती रात कनाचक सेक्टर के अग्रिम इलाकों में हुई। भारतीय RPA जब अपनी निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान भर रहा था, तभी पाकिस्तानी सीमा चौकियों से अचानक फायरिंग शुरू हो गई। रिपोर्टों में स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तानी पोस्टों से कुल 5 राउंड गोलियां दागी गईं। इनमें से 4 राउंड पाकिस्तानी पोस्ट 'खेरी' से और 1 राउंड 'असलम' पोस्ट से दागे गए। फायरिंग के दौरान ड्रोन की ऊंचाई और स्थिति सुरक्षित होने के कारण उसे कोई क्षति नहीं हुई। भारतीय ऑपरेटरों ने स्थिति को भांपते हुए ड्रोन को सुरक्षित क्षेत्र में वापस बुला लिया।
पाकिस्तानी चौकियों की भूमिका और भौगोलिक स्थिति
कनाचक सेक्टर में स्थित पाकिस्तानी पोस्ट 'खेरी' और 'असलम' लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों के लिए चर्चा में रही हैं। इन चौकियों की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वहां से भारतीय सीमा के भीतर की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा इन विशिष्ट चौकियों से फायरिंग करना यह दर्शाता है कि यह एक सोची-समझी कार्रवाई थी। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या इस फायरिंग का उद्देश्य ड्रोन को गिराना था या केवल भारतीय निगरानी क्षमता का परीक्षण करना था।
सीमा पर निगरानी और तकनीकी सुरक्षा उपाय
भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ और ड्रोन के जरिए हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPA) और अन्य उन्नत निगरानी उपकरणों का उपयोग करते हैं। कनाचक और आसपास के सेक्टरों में ड्रोन का उपयोग नियमित रूप से सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता है। हाल के वर्षों में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी के प्रयास बढ़े हैं, जिसके जवाब में भारत ने अपनी हवाई निगरानी को और अधिक सशक्त बनाया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और हालिया तनाव
जम्मू और कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर पिछले कुछ समय से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। हालांकि 2021 में दोनों देशों के बीच संघर्षविराम समझौते पर सहमति बनी थी, लेकिन पाकिस्तान की ओर से छिटपुट फायरिंग और घुसपैठ के प्रयासों ने इस समझौते की स्थिरता पर सवाल खड़े किए हैं। हालिया महीनों में जम्मू संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में आतंकी गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी गश्त और तकनीकी निगरानी को दोगुना कर दिया है।
भारतीय सुरक्षा बलों की जवाबी सतर्कता
इस घटना के बाद भारतीय सेना और बीएसएफ ने कनाचक सेक्टर में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पक्ष की ओर से किसी भी उकसावे का उचित और कड़ा जवाब दिया जाएगा। सीमा पर तैनात एंटी-ड्रोन सिस्टम को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि सीमा पार से आने वाले किसी भी संदिग्ध ड्रोन को निष्क्रिय किया जा सके। स्थानीय निवासियों को भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा बलों को देने के लिए कहा गया है।