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ट्रंप का सहयोगियों को कड़ा संदेश: होर्मुज में सुरक्षा खुद संभालें, अमेरिका से तेल खरीदें

ट्रंप का सहयोगियों को कड़ा संदेश: होर्मुज में सुरक्षा खुद संभालें, अमेरिका से तेल खरीदें
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा संकट के बीच अपने सहयोगी देशों को एक कड़ा कूटनीतिक संदेश दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि सहयोगी देशों को अब अपनी सुरक्षा और ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए अमेरिका पर निर्भरता कम करनी होगी और उन्होंने विशेष रूप से ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि उन्हें तेल की आवश्यकता है, तो वे इसे सीधे अमेरिका से खरीद सकते हैं, अन्यथा उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं संघर्ष करना होगा। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका अब अन्य देशों की सुरक्षा के लिए निरंतर अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग करने के पक्ष में नहीं है।

ब्रिटेन और फ्रांस की भूमिका पर तीखी टिप्पणी

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में ब्रिटेन और फ्रांस के हालिया रुख पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। ट्रंप ने ब्रिटेन का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने ईरान के विरुद्ध की गई सैन्य कार्रवाइयों में सक्रिय भागीदारी नहीं निभाई, लेकिन अब उसे जेट फ्यूल की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप ने इसे एक विरोधाभासी स्थिति बताया। वहीं, फ्रांस पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि फ्रांसीसी सरकार ने इजराइल की ओर जा रहे अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी और ट्रंप ने इसे एक 'बुरा रवैया' करार दिया और संकेत दिया कि भविष्य के द्विपक्षीय संबंधों में अमेरिका इस घटनाक्रम को ध्यान में रखेगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और वैश्विक तेल आपूर्ति का संकट

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है, जहां से दुनिया के कुल तेल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ट्रंप ने सहयोगी देशों को दो टूक सलाह दी है कि जो देश इस संकट के कारण ईंधन की कमी झेल रहे हैं, वे अमेरिका से तेल का आयात कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है और वह वैश्विक मांग को पूरा करने में सक्षम है। ट्रंप ने कहा कि यदि सहयोगी देश इस मार्ग पर नियंत्रण चाहते हैं, तो उन्हें स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी लेनी होगी और जरूरत पड़ने पर सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करना होगा।

अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव के संकेत

ट्रंप के इस बयान को अमेरिका की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को सैन्य रूप से काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है और युद्ध का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण अब समाप्त हो चुका है। ट्रंप के अनुसार, अब समय आ गया है कि क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं उठाएं। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा हर देश के साथ खड़ा नहीं रह सकता और देशों को 'खुद लड़ना' सीखना होगा। यह बयान अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में अमेरिका की भूमिका को सीमित करने और सहयोगी देशों पर रक्षा खर्च बढ़ाने के दबाव के रूप में देखा जा रहा है।

मध्य पूर्व संघर्ष में हताहतों के आधिकारिक आंकड़े

ईरान और इजराइल के बीच जारी इस संघर्ष ने बड़े पैमाने पर मानवीय क्षति पहुंचाई है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 3,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इजराइली और अमेरिकी हमलों में ईरान के भीतर 1,900 से अधिक लोग मारे गए हैं। इसके अतिरिक्त, लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाइयों में कम से कम 1,200 लोगों की मृत्यु हुई है। इजराइल में अब तक 19 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इस संघर्ष में अमेरिकी सेना को भी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसमें अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की सूचना है।

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