भारत के ऋण बाजार में जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही के दौरान एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। क्रेडिट सूचना कंपनी CRIF High Mark द्वारा जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देश में वाहन और दोपहिया वाहन खरीदने के लिए लिए जाने वाले कर्ज में इस अवधि के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट पिछले साल की दिसंबर तिमाही में देखी गई तेज बढ़ोतरी के ठीक बाद आई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ऑटो लोन की मांग अब कुछ हद तक कमजोर पड़ गई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह बदलाव उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं और पिछले उच्च आधार प्रभाव का परिणाम है।
वाहन और टू-व्हीलर लोन वितरण में आई बड़ी कमी
रिपोर्ट के आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च 2026 को समाप्त हुई तिमाही में वाहन ऋण वितरण में 11.6 प्रतिशत की कमी आई है और यह घटकर लगभग 1 लाख 5 हजार करोड़ रुपये रह गया है। दोपहिया वाहनों के मामले में स्थिति और भी अधिक चुनौतीपूर्ण रही, जहां लोन वितरण में 22 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह आंकड़ा सिमटकर 29 हजार 800 करोड़ रुपये पर आ गया। विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि पिछले साल अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही में त्योहारों के कारण वाहनों की बिक्री में असाधारण वृद्धि हुई थी और उस समय जीएसटी दरों में मिली राहत और बाजार में बढ़ी हुई मांग ने लोगों को गाड़ियां खरीदने के लिए प्रेरित किया था, जिसके कारण उस तिमाही का आधार काफी ऊंचा हो गया था। इसी ऊंचे आधार के मुकाबले वर्तमान तिमाही के आंकड़े गिरावट दर्शा रहे हैं।
कुल लोन पोर्टफोलियो में निरंतरता और बढ़ोतरी
हालांकि नए ऋणों के वितरण में कमी आई है, लेकिन कुल पोर्टफोलियो के स्तर पर स्थिति अभी भी सकारात्मक बनी हुई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि वाहन लोन पोर्टफोलियो में तिमाही आधार पर 3.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह, टू-व्हीलर लोन पोर्टफोलियो में भी 2.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। इसका अर्थ यह है कि बाजार में पुराने और वर्तमान में जारी कर्जों का कुल आकार अभी भी बढ़ रहा है। यह दर्शाता है कि भले ही नई खरीदारी की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई हो, लेकिन ऋण बाजार का समग्र ढांचा अभी भी विस्तार कर रहा है और लोग अपने पुराने ऋणों का प्रबंधन कर रहे हैं।
खुदरा कर्ज में वृद्धि और खराब लोन में सुधार
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश के समग्र खुदरा ऋण बाजार ने मजबूती दिखाई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल खुदरा कर्ज 16.6 प्रतिशत की दर से बढ़कर 170 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गया है। बैंकिंग क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि इस दौरान दबाव वाले यानी खराब कर्ज (NPA) के अनुपात में कमी देखने को मिली है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय कर्जदार अब अपने ऋणों को चुकाने के प्रति अधिक जागरूक और समयबद्ध हो गए हैं। खराब ऋणों में यह कमी वित्तीय संस्थानों के लिए एक स्वस्थ संकेत है, जो भविष्य में ऋण देने की उनकी क्षमता को और मजबूत करेगा।
गोल्ड लोन की मांग में ऐतिहासिक उछाल
इस पूरी रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण तथ्य गोल्ड लोन से जुड़ा है। सोना गिरवी रखकर लिए जाने वाले कर्ज की मांग में 50.4 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके विपरीत, होम लोन यानी गृह ऋण की विकास दर 10 प्रतिशत से भी कम रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने लोगों को अपने पास रखे सोने की अधिक कीमत प्राप्त करने में मदद की है। इसके अलावा, गोल्ड लोन लेने की प्रक्रिया अन्य ऋणों की तुलना में काफी आसान और त्वरित होती है, जिसके कारण लोग अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से गोल्ड लोन की तरफ आकर्षित हो रहे हैं और आसान नकदी और सोने की ऊंची वैल्यू ने इस सेगमेंट को वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में सबसे लोकप्रिय बना दिया है।