राजस्थान के बहरोड़ से पूर्व निर्दलीय विधायक बलजीत यादव को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLA LAD) में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया है। बुधवार को जयपुर स्थित विशिष्ट न्यायालय सीबीआई संख्या तीन में पेशी के बाद, अदालत ने यादव को तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है। ईडी ने अदालत से छह दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन न्यायाधीश खगेंद्र कुमार शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 7 फरवरी तक की हिरासत मंजूर की।
गिरफ्तारी और अदालती कार्यवाही का विवरण
प्रवर्तन निदेशालय ने बलजीत यादव को मंगलवार रात अलवर के शाहजहांपुर टोल प्लाजा के पास से हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें जयपुर स्थित ईडी कार्यालय ले जाया गया, जहां लंबी पूछताछ के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत उनकी गिरफ्तारी दर्ज की गई। बुधवार दोपहर करीब 12:20 बजे उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया। लगभग पांच घंटे तक चली सुनवाई के दौरान ईडी के वकीलों ने तर्क दिया कि यादव जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और मामले की गहराई तक जाने के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
₹3.72 करोड़ के गबन और फर्जी बिलिंग के आरोप
ईडी की जांच का मुख्य केंद्र वर्ष 2021-22 के दौरान बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के 32 सरकारी स्कूलों के लिए स्पोर्ट्स किट की खरीद है। 72 करोड़ की राशि जारी की गई थी। जांच में यह पाया गया कि इस राशि का बड़ा हिस्सा फर्जी फर्मों के माध्यम से निकाला गया। कई मामलों में बिना किसी सामग्री की आपूर्ति के ही भुगतान कर दिया गया, जबकि कुछ स्थानों पर अत्यंत घटिया सामग्री की आपूर्ति की गई। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज की गई प्रारंभिक प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।
बचाव पक्ष के तर्क और राजनीतिक प्रतिशोध का दावा
अदालत में बलजीत यादव के वकीलों ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया। बचाव पक्ष के वकील भानु प्रकाश शर्मा ने दलील दी कि जिस फर्म को भुगतान किया गया है, उसके मालिक के साथ यादव का पुराना संपत्ति विवाद चल रहा है और उन्होंने यह भी तर्क दिया कि निविदा प्रक्रिया पंचायत समिति द्वारा संचालित की गई थी और इसमें विधायक की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। यादव ने अदालत परिसर में मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और वर्तमान सत्ताधारी दल के विधायक उनके खिलाफ प्रतिशोध की भावना से काम कर रहे हैं।
ईडी की जांच और पूर्व में की गई छापेमारी
ईडी ने इस मामले में जनवरी 2025 में जयपुर, दौसा और बहरोड़ सहित कुल 10 ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड मिले थे। ईडी के अनुसार, यादव को पूर्व में तीन बार समन जारी किए गए थे, लेकिन उन्होंने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं दिया। एजेंसी अब रिमांड अवधि के दौरान उन कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करेगी जिनके माध्यम से सरकारी धन को निजी खातों में स्थानांतरित किया गया था।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और निष्कर्ष
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला राजस्थान में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और विधायक निधि के आवंटन में पारदर्शिता की कमी को रेखांकित करता है। ईडी की कार्रवाई अब उन ठेकेदारों और बिचौलियों की ओर मुड़ सकती है जिन्होंने फर्जी बिलिंग में सहायता की थी और 7 फरवरी को अगली पेशी के दौरान ईडी जांच की प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करेगी। फिलहाल, पूर्व विधायक को स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश के साथ हिरासत में रखा गया है।