पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान इस समय भीषण हिंसा की चपेट में है और शनिवार को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने दशकों में अपने सबसे बड़े और सबसे घातक हमलों में से एक को अंजाम दिया। इन समन्वित हमलों में नागरिकों, पुलिस और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, जिसमें मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या 200 तक पहुंच गई है। यह प्रांत भौगोलिक और रणनीतिक रूप से पाकिस्तान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी सीमाएं ईरान और अफगानिस्तान से मिलती हैं और यह अरब सागर तक सीधी पहुंच प्रदान करता है।
'हेरोफ 2' अभियान और हमलों का व्यापक पैमाना
बीएलए ने इन हमलों को 'हेरोफ 2' का नाम दिया है, जिसका बलूच साहित्य में अर्थ 'काला तूफान' होता है। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यह अभियान पिछले अभियानों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और घातक था। दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल की रिपोर्टों के अनुसार, क्वेटा, ग्वादर, मस्तुंग और कलात सहित प्रांत के लगभग 15 से अधिक प्रमुख क्षेत्रों में एक साथ बंदूक और बम हमले किए गए। विद्रोहियों ने न केवल सरकारी इमारतों को निशाना बनाया, बल्कि मस्तुंग में एक केंद्रीय जेल पर हमला कर कम से कम 30 कैदियों को छुड़ा लिया। क्वेटा में खुफिया अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में 800 से 1000 लड़ाके शामिल हो सकते हैं।
रणनीतिक महत्व और प्राकृतिक संसाधनों का भंडार
बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। यहाँ प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा और सोने के विशाल भंडार मौजूद हैं। सुई गैस क्षेत्र पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति का एक मुख्य स्रोत है। रिस्क इंटेलिजेंस की रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रांत की भौगोलिक स्थिति इसे क्षेत्रीय व्यापार और संपर्क का एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बनाती है। अरब सागर पर स्थित ग्वादर बंदरगाह इसे वैश्विक ऊर्जा मार्गों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाता है, जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है।
चीन और अमेरिका के आर्थिक हितों पर प्रभाव
इस क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता ने चीन और अमेरिका दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चीन के लिए बलूचिस्तान 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे' (CPEC) का केंद्र है, जो बीजिंग की बेल्ट एंड रोड पहल का हिस्सा है। ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से चीन अपने ऊर्जा आयात मार्गों को छोटा करना चाहता है और 25 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार, बीएलए के ये हमले उन वैश्विक शक्तियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी हैं जो इस अशांत क्षेत्र में निवेश करने की योजना बना रहे हैं।
विद्रोह के मूल कारण और स्थानीय असंतोष
बलूच मुक्ति आंदोलन दशकों से चल रहा है, जिसका मुख्य कारण स्थानीय संसाधनों का कथित शोषण है और बीएलए का तर्क है कि केंद्र सरकार प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों, जैसे गैस और खनिजों का दोहन कर रही है, लेकिन इसका लाभ स्थानीय आबादी तक नहीं पहुंच रहा है। 5% हिस्सा ही स्थानीय स्तर पर खर्च होता है। इसी असंतोष के कारण विद्रोही समूह अब विदेशी निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निशाना बना रहे हैं, जिसे वे 'औपनिवेशिक शैली का शोषण' मानते हैं।
सुरक्षा चुनौतियां और भविष्य का विश्लेषण
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, बलूचिस्तान में सुरक्षा की स्थिति आने वाले समय में और अधिक जटिल हो सकती है। बीएलए द्वारा चीनी इंजीनियरों और विदेशी काफिलों पर किए गए लगातार हमले यह दर्शाते हैं कि आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को सुरक्षा चिंताओं से अलग नहीं किया जा सकता। पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई में 145 विद्रोहियों को मार गिराने का दावा किया है, लेकिन विद्रोहियों की बढ़ती क्षमता और उनके द्वारा अपनाई जा रही नई युद्धनीति ने इस्लामाबाद के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है। क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना अब न केवल पाकिस्तान के लिए, बल्कि वहां निवेश करने वाले वैश्विक देशों के लिए भी एक बड़ी प्राथमिकता बन गई है।