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भारत-EU व्यापार समझौते से पाकिस्तान में संकट, 1 करोड़ नौकरियां खतरे में

भारत-EU व्यापार समझौते से पाकिस्तान में संकट, 1 करोड़ नौकरियां खतरे में
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 27 जनवरी को हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने दक्षिण एशियाई व्यापारिक समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है। इस ऐतिहासिक समझौते के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक और व्यापारिक गलियारों में गहरी चिंता देखी जा रही है। पाकिस्तानी विशेषज्ञों और पूर्व मंत्रियों के अनुसार, भारत को मिलने वाली शुल्क-मुक्त पहुंच से पाकिस्तान के निर्यात क्षेत्र को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है। इस समझौते को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' के रूप में देखा जा रहा है, जो दुनिया की लगभग 25% वैश्विक जीडीपी और 2 अरब लोगों के साझा बाजार को प्रभावित करेगा।

पाकिस्तान का 'जीरो-टैरिफ हनीमून' समाप्त होने का दावा

पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री गोहर एजाज ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ के साथ पाकिस्तान का लंबे समय से चला आ रहा 'जीरो-टैरिफ हनीमून' अब समाप्त हो गया है। एजाज के अनुसार, इस बदलाव के कारण पाकिस्तान में लगभग 1 करोड़ नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वे स्थानीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए सस्ती बिजली, कम कर और आसान ऋण जैसी सुविधाएं प्रदान करें। पाकिस्तान के लिए यूरोपीय संघ सबसे बड़ा निर्यात बाजार रहा है, और वहां अपनी पकड़ खोना देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

टेक्सटाइल क्षेत्र में भारत को मिलेगी बड़ी बढ़त

पाकिस्तान की चिंता का मुख्य कारण टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स क्षेत्र है। अब तक पाकिस्तान को यूरोपीय संघ की GSP प्लस (GSP Plus) योजना के तहत अपने 66% उत्पादों को बिना किसी आयात शुल्क के यूरोप भेजने की सुविधा प्राप्त थी। इसके विपरीत, भारतीय निर्यातकों को इसी तरह के सामान पर 9% से 12% तक का कर देना पड़ता था। 6 अरब डॉलर पर था। अब FTA के लागू होने से भारत के लगभग 95% श्रम-प्रधान उत्पादों को यूरोपीय बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे पाकिस्तान की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त समाप्त हो जाएगी।

भारतीय बाजार में सस्ती होंगी यूरोपीय कारें और वाइन

इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू भारतीय उपभोक्ताओं के लिए यूरोपीय विलासिता की वस्तुओं का सस्ता होना है। समझौते के तहत, भारत सरकार ने यूरोप से आयात होने वाली कारों पर लगने वाली 110% की भारी इम्पोर्ट ड्यूटी को घटाकर मात्र 10% करने का निर्णय लिया है। 5 लाख वाहनों की सीमा तय की गई है। इसके अतिरिक्त, यूरोपीय देशों से आने वाली वाइन और अन्य मादक पेय पदार्थों पर लगने वाले 150% टैरिफ को घटाकर 20-30% तक लाया जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि इससे भारत में बीएमडब्ल्यू (BMW) और मर्सिडीज (Mercedes) जैसी कंपनियों के उन मॉडलों की कीमतें कम हो सकती हैं जो सीधे आयात किए जाते हैं।

व्यापारिक संगठनों और सरकार की प्रतिक्रिया

ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (APTMA) के प्रमुख कामरान अरशद ने चेतावनी दी है कि भारत अब यूरोपीय बाजार में अत्यधिक प्रतिस्पर्धी हो गया है। फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FPCCI) के उपाध्यक्ष साकिब फैयाज मगून ने भी कहा कि एक बार बाजार हाथ से निकल जाने के बाद उसे वापस पाना अत्यंत कठिन होगा। दूसरी ओर, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा है कि वे यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं और GSP प्लस सुविधा को 2027 के बाद भी जारी रखने के लिए बातचीत कर रहे हैं। भारत और EU के बीच यह समझौता 18 साल की लंबी बातचीत के बाद संभव हुआ है, जिसे 2027 तक पूर्ण रूप से लागू किए जाने की संभावना है।

विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और भविष्य का प्रभाव

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, भारत-EU FTA केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह एक रणनीतिक बदलाव है और जहां भारत अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती से स्थापित कर रहा है, वहीं पाकिस्तान को अपनी आंतरिक नीतियों में सुधार करने की तत्काल आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान ने अपनी उत्पादन लागत कम नहीं की और निर्यात में विविधता नहीं लाई, तो यूरोपीय बाजार में उसकी हिस्सेदारी तेजी से घट सकती है। 2027 में जब यह समझौता पूरी तरह प्रभावी होगा, तब दक्षिण एशिया से यूरोप होने वाले व्यापार में भारत की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है।

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