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बरेली सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा और ड्रामा: 48 घंटे की पूरी कहानी

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा और ड्रामा: 48 घंटे की पूरी कहानी
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उत्तर प्रदेश के बरेली में तैनात रहे पीसीएस अधिकारी और सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा। इन दिनों प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। एक अधिकारी का अचानक इस्तीफा देना, फिर धरने पर बैठना और अंत में खुद को 'हाउस अरेस्ट' बताना—यह पूरी कहानी किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं है। अलंकार अग्निहोत्री ने न केवल इस्तीफा दिया, बल्कि प्रशासन और सरकार के खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया है।

इस्तीफे के पीछे की असली वजह

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के पीछे दो मुख्य कारणों का हवाला दिया है। पहला कारण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियम-2026 हैं, जिन्हें उन्होंने 'रॉलेट एक्ट' जैसा दमनकारी बताया। दूसरा कारण प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुआ कथित अपमानजनक व्यवहार है। इन मुद्दों को लेकर वे काफी आहत थे और उन्होंने 26 जनवरी को अपना इस्तीफा सार्वजनिक कर दिया।

सोमवार: इस्तीफे से लेकर आधी रात के ड्रामे तक

सोमवार दोपहर 1:30 बजे जैसे ही अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। दोपहर 3:00 बजे तक उनके सरकारी आवास पर समर्थकों और पत्रकारों का जमावड़ा लग गया। शाम 6:00 बजे के करीब उनके साथी पीसीएस अधिकारी उन्हें समझाने पहुंचे, लेकिन वे अपने फैसले पर अडिग रहे। रात 8:00 बजे उन्होंने जिलाधिकारी (डीएम) से मुलाकात की और बाहर आकर प्रेस वार्ता की। रात 10:00 बजे उन्होंने पहली बार आरोप लगाया कि उन्हें बंधक बनाया जा रहा है। इसके बाद वे रात 11:00 बजे अपने निजी वाहन से कहीं निकले और तड़के 3:00 बजे वापस लौटे।

मंगलवार: धरना, नारेबाजी और हाउस अरेस्ट का दावा

मंगलवार की सुबह और भी ज्यादा तनावपूर्ण रही। सुबह 11:00 बजे अलंकार अग्निहोत्री अपने आवास से पैदल ही कलेक्ट्रेट के लिए निकल पड़े और गेट पर धरने पर बैठ गए। दोपहर में उन्होंने डीएम चेंबर के सामने जमकर नारेबाजी की। प्रशासन ने स्थिति को बिगड़ते देख उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। शाम होते-होते उनका सरकारी गनर वापस ले लिया गया और सरकारी गाड़ी भी जब्त कर ली गई और रात 7:48 बजे अलंकार ने व्हाट्सएप पर स्टेटस लगाकर दावा किया कि उन्हें 'हाउस अरेस्ट' कर लिया गया है और उनके घर के बाहर मोबाइल जैमर लगा दिए गए हैं।

सरकार की सख्त कार्रवाई और सस्पेंशन

अलंकार अग्निहोत्री के इस व्यवहार को अनुशासनहीनता मानते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं और बरेली का एडीएम कंपाउंड फिलहाल छावनी में तब्दील है और पीएसी की तैनाती की गई है। प्रशासन का कहना है कि यह सुरक्षा व्यवस्था शांति बनाए रखने के। लिए है, जबकि अलंकार इसे अपनी स्वतंत्रता का हनन बता रहे हैं।

कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?

कानपुर देहात के रहने वाले अलंकार अग्निहोत्री एक उच्च शिक्षित अधिकारी हैं। उन्होंने बीटेक और एलएलबी की डिग्री हासिल की है। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद वे अपनी बेबाक कार्यशैली के लिए जाने जाते थे। हालांकि, इस ताजा विवाद ने उनके करियर पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। उन्होंने अब हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) दायर करने की अपील की है।

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