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राज्यसभा चुनाव: हरियाणा में 0.3% वोट से चूकी बीजेपी, 11 में से 9 सीटें जीतीं

राज्यसभा चुनाव: हरियाणा में 0.3% वोट से चूकी बीजेपी, 11 में से 9 सीटें जीतीं
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हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर सोमवार को हुए चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। इन 11 सीटों में से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 9 सीटों पर जीत हासिल कर अपना परचम लहराया है। बिहार की सभी 5 सीटों पर एनडीए के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि ओडिशा की 4 में से 3 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा रहा। हरियाणा की 2 सीटों में से 1 पर बीजेपी और 1 पर कांग्रेस ने जीत हासिल की। बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल की हार के कारण एनडीए का आंकड़ा 10 तक पहुंचने से रह गया।

बिहार में एनडीए का क्लीन स्वीप

बिहार की 5 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए ने पूरी तरह से अपना दबदबा कायम रखा। यहां से जीतने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और शिवेश राम शामिल हैं। बिहार में विपक्ष की ओर से कोई बड़ी चुनौती पेश नहीं की जा सकी, जिसके चलते एनडीए के सभी पांचों प्रत्याशी विजयी घोषित किए गए और अधिकारियों के अनुसार, यह जीत राज्य में गठबंधन की मजबूती को दर्शाती है।

ओडिशा में बीजेपी की बड़ी बढ़त

ओडिशा की 4 राज्यसभा सीटों के लिए हुए मतदान में बीजेपी ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि 1 सीट बीजू जनता दल (BJD) के खाते में गई। बीजेपी की ओर से प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल, बीजेडी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए सुजीत कुमार और पार्टी के पुराने नेता दिलीप रे ने जीत हासिल की। दिलीप रे इस चुनाव में पार्टी समर्थित उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे। ओडिशा में बीजेपी के इस प्रदर्शन को राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के रूप में देखा जा रहा है, जहां पार्टी ने अपनी स्थिति को पहले से अधिक मजबूत किया है।

हरियाणा में 0.3% वोट वैल्यू का गणित

हरियाणा की 2 सीटों पर हुआ चुनाव सबसे अधिक चर्चा में रहा। यहां बीजेपी के संजय भाटिया की जीत पहले से तय मानी जा रही थी, लेकिन दूसरी सीट के लिए मुकाबला बेहद कड़ा रहा। कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को बेहद मामूली अंतर से हराया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, जीत के लिए आवश्यक वोट वैल्यू 2767 निर्धारित की गई थी। 33 वोट वैल्यू प्राप्त हुई। 3% के अंतर से चुनाव हार गए।

इनवैलिड वोट और आईएनएलडी का बहिष्कार

हरियाणा में मतदान के दौरान कुल 90 विधायकों में से 83 के वोट ही वैध माने गए। इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के 2 विधायक मतदान से गैर-हाजिर रहे, जिससे उन्होंने चुनाव का बहिष्कार किया। इसके अलावा, 4 कांग्रेस विधायकों और 1 बीजेपी विधायक का वोट इनवैलिड (अवैध) घोषित कर दिया गया। यदि आईएनएलडी के विधायकों ने मतदान किया होता या इनवैलिड वोटों की संख्या कम होती, तो परिणाम बदल सकते थे। बीजेपी के अनुसार, आईएनएलडी के गैर-हाजिर रहने का सीधा फायदा कांग्रेस उम्मीदवार को मिला।

राजनीतिक आरोप और क्रॉस वोटिंग

हरियाणा के नतीजों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस जीत को पार्टी की नैतिक जीत बताया है, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि उनके 5 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। हुड्डा ने कहा कि पार्टी के खिलाफ जाने वाले विधायकों पर कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, बीजेपी उम्मीदवार संजय भाटिया ने कांग्रेस पर अपने विधायकों को बंधक बनाने का आरोप लगाया और बीजेपी का तर्क है कि यदि विधायकों को उनकी अंतरात्मा की आवाज पर वोट देने दिया जाता, तो निर्दलीय उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित थी।

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