बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया का खुलासा, बोर्ड भरता है 3000 करोड़ सालाना टैक्स

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बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया का खुलासा, बोर्ड भरता है 3000 करोड़ सालाना टैक्स
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के वित्तीय ढांचे और सरकारी खजाने में उसके योगदान को लेकर अक्सर कई तरह की भ्रांतियां बनी रहती हैं। इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण खुलासा किया है और 18 सितंबर को दिए गए अपने बयान में सैकिया ने बताया कि बीसीसीआई केंद्र सरकार को औसतन लगभग 3000 करोड़ रुपये सालाना इनकम टैक्स के रूप में भुगतान करता है। सचिव के इस खुलासे ने उन सभी दावों की पोल खोल दी है जिनमें यह कहा जाता रहा है कि दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड टैक्स छूट का अनुचित लाभ उठाता है।

टैक्स छूट के मिथक का अंत

लंबे समय से यह चर्चा का विषय रहा है कि क्या बीसीसीआई को एक खेल संस्था होने के नाते टैक्स में कोई विशेष रियायत मिलती है। देवजीत सैकिया ने इन चर्चाओं पर पूरी तरह से विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड किसी भी प्रकार की टैक्स छूट पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट टैक्सपेयर्स की सूची में शामिल है। सालाना 3000 करोड़ रुपये का टैक्स चुकाना यह दर्शाता है कि बोर्ड न केवल अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को समझता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी बड़ा योगदान दे रहा है। यह खुलासा उन लोगों के लिए एक करारा जवाब है जो बोर्ड की टैक्स स्थिति पर सवाल उठाते रहे हैं।

वित्तीय आत्मनिर्भरता और अन्य खेल संघों से तुलना

बीसीसीआई की सबसे बड़ी विशेषता उसकी वित्तीय आत्मनिर्भरता है। देवजीत सैकिया ने इस बात पर जोर दिया कि जहां देश के अन्य खेल महासंघ अपनी गतिविधियों, बुनियादी ढांचे के विकास और खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए सरकारी ग्रांट और वित्तीय सहायता पर निर्भर रहते हैं, वहीं बीसीसीआई बिना किसी सरकारी मदद के अपना राजस्व उत्पन्न करता है। बोर्ड सरकार से किसी भी प्रकार का फाइनेंशियल पैकेज या फंड नहीं लेता है। इसके विपरीत, वह हर साल हजारों करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा करता है। यह आत्मनिर्भरता बीसीसीआई को अन्य खेल संस्थाओं से अलग और विशिष्ट बनाती है।

नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट और कानूनी रुख

टैक्स के आंकड़ों के साथ-साथ देवजीत सैकिया ने नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट को लेकर भी बोर्ड की स्थिति साफ की है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट के दायरे में बोर्ड को लाने को लेकर जवाब तलब किया था। इस पर सैकिया ने कहा कि बोर्ड किसी भी नियम या कानून से बचने की कोशिश नहीं कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पोर्ट्स एक्ट को लेकर बीसीसीआई का रुख बहुत साफ है। सैकिया के अनुसार, संबंधित प्राधिकरणों की ओर से अभी कई प्रक्रियाएं और औपचारिकताएं पूरी की जानी बाकी हैं। जब ये औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी और क्रिकेट को इस एक्ट के तहत एक 'नामित खेल' बनाने का औपचारिक नोटिफिकेशन जारी होगा, तभी यह प्रभावी रूप से लागू होगा।

सुप्रीम कोर्ट में आगामी सुनवाई और बोर्ड की तैयारी

कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए देवजीत सैकिया ने कहा कि बोर्ड अदालत के सामने अपना पक्ष रखने के लिए पूरी तरह तैयार है और उन्होंने बताया कि 27 अक्टूबर को जब यह मामला दोबारा लिस्टेड होगा, तब बीसीसीआई सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना विस्तृत और औपचारिक स्पष्टीकरण पेश करेगा। सैकिया ने अपने बयान में कहा, "जब तक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तब तक बोर्ड को अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं है। " बोर्ड का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह कानून का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है और अपनी स्वायत्तता के साथ-साथ कानूनी प्रक्रियाओं का भी सम्मान करता है।

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