जापान में आयोजित होने वाले एशियन गेम्स 2026 के शुरू होने से पहले ही एक बड़ा विवाद खड़ा होता दिखाई दे रहा है। यह विवाद किसी खेल तकनीक या मैदान की तैयारी को लेकर नहीं, बल्कि मेडल सेरेमनी और प्रोटोकॉल को लेकर है। मुख्य चर्चा का विषय यह है कि क्या भारतीय क्रिकेट टीम, एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों से मेडल स्वीकार करेगी? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पिछले कुछ समय में भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों ने एशिया कप जीतने के बावजूद मोहसिन नकवी के हाथों से ट्रॉफी लेने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था।
ट्रॉफी विवाद की पूरी कहानी
इस विवाद की शुरुआत सितंबर 2025 में हुई थी, जब भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने एशिया कप का खिताब अपने नाम किया था। उस समय खिताबी जीत के बाद जब ट्रॉफी देने की बारी आई, तो भारतीय टीम ने एसीसी के पाकिस्तानी अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों से इसे लेने से मना कर दिया। इस कड़े रुख के कारण वह ट्रॉफी भारतीय टीम के साथ भारत नहीं आई, बल्कि उसे एसीसी के दफ्तर में ही वापस भेज दिया गया। यह घटना खेल जगत में काफी चर्चा का विषय बनी रही।
हैरानी की बात यह है कि यही कहानी इस महीने फिर से दोहराई गई। जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशिया कप का खिताब जीता, तब भी मोहसिन नकवी ट्रॉफी देने की जिद पर अड़े रहे। पुरुष टीम की तरह महिला टीम ने भी नकवी के हाथों से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। नतीजतन, महिला एशिया कप की ट्रॉफी भी बीसीसीआई के कैबिनेट में जाने के बजाय एसीसी के ऑफिस लौट गई। इन दो घटनाओं ने भारत और एसीसी नेतृत्व के बीच के तनाव को सार्वजनिक कर दिया है।
एशियन गेम्स 2026 और जापान का मंच
अब सबकी नजरें जापान पर टिकी हैं, जहां 2026 एशियन गेम्स का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस खेल महाकुंभ में 45 देशों के लगभग 11000 एथलीट हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं। भारत की ओर से भी करीब 500 एथलीट अलग-अलग खेलों में अपनी किस्मत आजमाने और मेडल जीतने के इरादे से उतरेंगे। क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें भारत की पुरुष और महिला दोनों टीमों को गोल्ड मेडल का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। चूंकि एशियन गेम्स में क्रिकेट के आयोजन में एसीसी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए मेडल सेरेमनी में मोहसिन नकवी की मौजूदगी की पूरी संभावना है।
बीसीसीआई का रुख और कूटनीतिक पेच
इस संभावित स्थिति पर जब बीसीसीआई के सचिव देवजित सैकिया से सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही नपा-तुला जवाब दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में सैकिया ने कहा कि फिलहाल बोर्ड और टीम का पूरा ध्यान पोडियम तक पहुंचने और मेडल जीतने पर केंद्रित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेडल सेरेमनी के समय जो भी परिस्थितियां होंगी, उन्हें ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लिया जाएगा। सैकिया ने यह भी कहा कि जो घटना अभी तक हुई ही नहीं है, उस पर वह किसी भी तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं समझते।
मेडल बांटने का प्रोटोकॉल और नियम
एशियन गेम्स में मेडल बांटने की प्रक्रिया काफी औपचारिक होती है। मुख्य रूप से यह जिम्मेदारी एशियाई ओलंपिक कमेटी (ओसीए) के अध्यक्ष की होती है और हालांकि, ओसीए अध्यक्ष अक्सर इस जिम्मेदारी को अन्य खेल अधिकारियों को सौंप देते हैं। इसमें संबंधित खेल की इंटरनेशनल फेडरेशन या एशियन फेडरेशन के अध्यक्षों को शामिल किया जाता है। क्रिकेट के मामले में एसीसी अध्यक्ष होने के नाते मोहसिन नकवी को यह जिम्मेदारी मिलना स्वाभाविक है।
हालांकि, एक स्थिति ऐसी भी हो सकती है जिससे यह विवाद टल जाए। यदि ओसीए मेडल बांटने का जिम्मा आईसीसी चेयरमैन जय शाह या किसी अन्य तटस्थ अधिकारी को सौंप देता है, तो भारतीय टीम के लिए स्थिति सहज हो जाएगी। लेकिन रिपोर्टों के अनुसार, बीसीसीआई या भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) इस मामले में ओसीए के सामने कोई आधिकारिक आपत्ति दर्ज नहीं करा सकते, क्योंकि मेडल बांटने वाले का चयन करना पूरी तरह से एशियाई कमेटी का विशेषाधिकार है।
मेडल से इनकार करना क्यों है जोखिम भरा?
एशिया कप और एशियन गेम्स के नियमों में जमीन-आसमान का अंतर है। एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर मेडल सेरेमनी के दौरान किसी भी तरह का राजनीतिक विरोध या मेडल लेने से इनकार करना गंभीर अनुशासनहीनता माना जाता है। यहां मेडल, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना अनिवार्य है।
इस संदर्भ में 2014 के एशियन गेम्स की घटना को याद करना जरूरी है। उस समय भारतीय मुक्केबाज सरिता देवी ने मेडल सेरेमनी के दौरान अपना ब्रॉन्ज मेडल लेने से मना कर दिया था और उन्होंने रेफरी के फैसले पर बेईमानी का आरोप लगाते हुए अपना मेडल सिल्वर मेडलिस्ट को थमा दिया था। इस विरोध के कारण सरिता देवी पर 1 साल का कड़ा प्रतिबंध लगाया गया था और उनके कोचों को भी निलंबित कर दिया गया था। हालांकि बाद में उन्होंने मेडल स्वीकार कर लिया था, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया कि ओलंपिक चार्टर के तहत मेडल का अपमान करने पर करियर पर संकट आ सकता है। अब देखना यह होगा कि जापान में भारतीय टीम इस कूटनीतिक और खेल चुनौती से कैसे निपटती है।