भारतीय महिला हॉकी टीम ने महिला हॉकी वर्ल्ड कप में एक ऐसा इतिहास रच दिया है जिसे आने वाले कई दशकों तक याद रखा जाएगा। टूर्नामेंट के अपने आखिरी मैच में भारतीय टीम ने दुनिया की पांचवें नंबर की टीम जर्मनी को 3 के मुकाबले 1 गोल से हराकर पांचवां स्थान हासिल किया है। यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि वर्ल्ड कप के इतिहास में पिछले 52 सालों में भारतीय महिला टीम का यह सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले भारत ने साल 1974 में आयोजित पहले वर्ल्ड कप में अजिंदर कौर की कप्तानी में चौथा स्थान प्राप्त किया था। अब 52 साल के लंबे इंतजार के बाद टीम इंडिया ने एक बार फिर विश्व स्तर पर अपनी धाक जमाई है।
अंतिम क्षणों में पलटा मैच का रुख
मैच की शुरुआत बेहद रोमांचक रही लेकिन दोनों टीमों के डिफेंस ने एक-दूसरे को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया। खेल के शुरुआती 43 मिनट तक स्कोर 0-0 की बराबरी पर रहा। जर्मनी की मजबूत रक्षापंक्ति को भेदना भारतीय फॉरवर्ड्स के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। लेकिन मैच के आखिरी 17 मिनटों में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी रणनीति बदली और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। 43वें मिनट में नेहा ने एक बेहतरीन पास दिया जिसे लेकर इशिका सर्कल के भीतर दाखिल हुईं। इशिका ने एक शानदार रिवर्स हिट के जरिए गेंद को जर्मन गोलकीपर के ऊपर से गोलपोस्ट में पहुंचा दिया और भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी।
नवनीत कौर का शानदार डबल गोल
पहली बढ़त मिलने के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच गया। इसके ठीक एक मिनट बाद यानी 44वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला। इस मौके को भुनाते हुए नवनीत कौर ने एक जबरदस्त स्लैप शॉट लगाया और गेंद को सीधे नेट में डाल दिया। इस गोल के साथ भारत की बढ़त 2-0 हो गई। नवनीत कौर यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने 47वें मिनट में अपनी ड्रिबलिंग का जादू दिखाया। उन्होंने जर्मनी के कई डिफेंडरों को छकाते हुए सर्कल में प्रवेश किया और एक सटीक हिट के जरिए अपना दूसरा और टीम का तीसरा गोल दाग दिया। जर्मनी की ओर से 59वें मिनट में लिन क्रिंग्स ने एक गोल जरूर किया लेकिन तब तक भारत की जीत सुनिश्चित हो चुकी थी।
बिछू देवी और डिफेंस की अभेद्य दीवार
इस ऐतिहासिक जीत में भारतीय गोलकीपर बिछू देवी और डिफेंडरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। जर्मनी ने मैच में वापसी करने के लिए लगातार हमले किए और उन्हें कुल 5 पेनल्टी कॉर्नर भी मिले। हालांकि, बिछू देवी ने गोलपोस्ट के सामने दीवार बनकर जर्मनी के हर प्रयास को नाकाम कर दिया। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले अभ्यास मैचों में भारत को जर्मनी से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस महत्वपूर्ण मुकाबले में टीम ने अपनी गलतियों से सीखा और एक सटीक रणनीति के साथ मैदान पर उतरकर जीत हासिल की। भारतीय डिफेंस की इस मजबूती ने विपक्षी टीम को पूरी तरह से दबाव में रखा।
पूरे टूर्नामेंट में टीम इंडिया का दबदबा
कोच शोर्ड मारिन के मार्गदर्शन में खेल रही इस भारतीय टीम में 11 ऐसे खिलाड़ी शामिल थे जो अपना पहला वर्ल्ड कप खेल रहे थे। इसके बावजूद टीम ने पूरे टूर्नामेंट में असाधारण खेल दिखाया। पूरे वर्ल्ड कप के दौरान भारत को केवल एक मैच में हार मिली, जो सह-मेजबान और ओलंपिक चैंपियन नीदरलैंड्स के खिलाफ थी। इसके अलावा भारत ने ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन के साथ 2-2 से ड्रॉ खेला, दक्षिण अफ्रीका को 6-1 के बड़े अंतर से हराया और इंग्लैंड व ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ भी मैच ड्रॉ कराने में सफलता हासिल की। इस शानदार प्रदर्शन ने अगले महीने होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम के मनोबल को काफी ऊंचा कर दिया है।