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भारत बंद: राजस्थान में जनजीवन सामान्य, स्कूल और बाजार खुले रहे

भारत बंद: राजस्थान में जनजीवन सामान्य, स्कूल और बाजार खुले रहे
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देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा 12 फरवरी 2026 को आहूत 'भारत बंद' का राजस्थान में व्यापक असर देखने को नहीं मिला है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में जनजीवन सामान्य बना हुआ है और व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपनी नियमित समय सारिणी के अनुसार संचालित हो रहे हैं और केंद्र सरकार की श्रम और आर्थिक नीतियों के विरोध में बुलाई गई इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल का दावा था कि इसमें लगभग 30 करोड़ कामगार शामिल होंगे, लेकिन राजस्थान के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, बंद का प्रभाव 'बेअसर' रहा है।

प्रमुख शहरों में व्यापारिक और शैक्षणिक स्थिति

कोटा, जिसे देश की कोचिंग मंडी के रूप में जाना जाता है, वहां सभी शैक्षणिक संस्थान और बाजार पूरी तरह खुले रहे। स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने बंद को समर्थन नहीं देने का निर्णय लिया, जिसके परिणामस्वरूप दैनिक गतिविधियां बाधित नहीं हुईं। अजमेर और अनूपगढ़ में भी स्थिति सामान्य रही, जहां सुबह से ही दुकानों के शटर खुले नजर आए और उदयपुर में भी बंद का कोई खास असर नहीं दिखा, हालांकि वहां कुछ कर्मचारी संगठनों ने सांकेतिक विरोध दर्ज कराया है।

बोर्ड परीक्षाओं और परिवहन पर प्रभाव

राजस्थान के लिए आज का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं आज से ही शुरू हुई हैं। प्रशासन ने छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए परिवहन सेवाओं को सुचारू रखने के कड़े निर्देश दिए थे। जयपुर, जोधपुर और बीकानेर जैसे बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन और निजी बसें सामान्य रूप से चलती रहीं। परीक्षार्थियों को केंद्रों तक पहुंचने में किसी बड़ी बाधा का सामना नहीं करना पड़ा। प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन का स्वरूप

30 बजे मुख्य डाकघर पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। श्रीगंगानगर में कृषि मंडियों के मजदूरों ने काम बंद रखने का निर्णय लिया है, हालांकि वहां भी स्कूल और अन्य दुकानें खुली हैं। डूंगरपुर में कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने नेहरू पार्क से कलेक्ट्रेट तक रैली निकालने की योजना बनाई है। नागौर, भरतपुर और सवाई माधोपुर जैसे जिलों में बंद का प्रभाव नगण्य रहा है और सभी सरकारी व निजी कार्यालय सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं।

हड़ताल के मुख्य कारण और मांगें

ट्रेड यूनियनों के अनुसार, यह हड़ताल 4 नए लेबर कोड्स के विरोध, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (PSUs) के निजीकरण और बीमा क्षेत्र में 100% FDI के खिलाफ बुलाई गई है। इसके अतिरिक्त, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) भी इस बंद का समर्थन कर रहा है, जिनकी मुख्य आपत्तियां भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और बिजली संशोधन विधेयक 2025 को लेकर हैं। कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और संविदा भर्ती को बंद कर नियमित नियुक्तियों की मांग कर रहे हैं।

विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राजस्थान में बंद के बेअसर रहने का एक मुख्य कारण बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन और स्थानीय व्यापार मंडलों का सक्रिय समर्थन न मिलना है। राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। अधिकारियों के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन जबरन दुकानें बंद कराने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में राज्य के सभी राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।

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