बिहार विधानसभा के वर्तमान बजट सत्र में सत्ताधारी गठबंधन के भीतर से ही जवाबदेही के स्वर मुखर हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की विधायक मैथिली ठाकुर और जनता दल (यूनाइटेड) की विधायक कोमल सिंह ने सदन की कार्यवाही के दौरान अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों की स्थिति पर असंतोष व्यक्त किया। इन दोनों युवा महिला विधायकों ने स्वास्थ्य और खेल बुनियादी ढांचे से संबंधित सरकारी रिपोर्टों को चुनौती देते हुए मंत्रियों से स्पष्टीकरण की मांग की।
मैथिली ठाकुर का स्वास्थ्य सेवाओं पर कड़ा रुख
अलीनगर से बीजेपी विधायक और प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने सोमवार, 9 फरवरी को स्वास्थ्य विभाग के दावों पर सवाल उठाए। प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने अपने क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों की जर्जर स्थिति का मुद्दा उठाया और ठाकुर ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे को संबोधित करते हुए कहा कि अस्पताल की इमारतें इस कदर खराब हो चुकी हैं कि वहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने विवरण देते हुए बताया कि छतों से प्लास्टर गिर रहा है और दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं।
विधायक ने सदन को सूचित किया कि बारिश के मौसम में वार्डों में पानी का रिसाव होता है, फिर भी वहां गर्भवती महिलाओं और बच्चों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने सरकारी जवाब को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि विभाग का यह दावा गलत है कि इमारतें सुरक्षित हैं। ठाकुर के अनुसार, अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टरों की भी भारी कमी है, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य प्रणाली प्रभावित हो रही है और उन्होंने मंत्री से आग्रह किया कि वे केवल कागजी रिपोर्टों पर भरोसा न करें और जमीनी हकीकत का संज्ञान लें।
कोमल सिंह का खेल विभाग को अल्टीमेटम
जेडीयू विधायक कोमल सिंह ने भी अपनी ही सरकार के खेल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। गायघाट से विधायक कोमल सिंह ने 3 फरवरी को सदन में स्टेडियम निर्माण की वास्तविकता पर चर्चा की। उन्होंने विभाग द्वारा दी गई उस लिखित रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि उनके क्षेत्र में स्टेडियम का निर्माण पूर्ण हो चुका है। कोमल सिंह ने तर्क दिया कि जारंग और अथवारा पंचायतों में जिसे स्टेडियम बताया जा रहा है, वह केवल स्कूलों के खुले मैदान हैं।
कोमल सिंह ने सदन में स्पष्ट किया कि इन स्थानों पर न तो चेंजिंग रूम हैं, न रनिंग ट्रैक और न ही शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने खेल मंत्री श्रेयसी सिंह से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। 20 करोड़ की लागत से स्टेडियम निर्माण का दावा जमीनी स्तर पर कहीं भी दिखाई नहीं देता है। उनके कड़े रुख के बाद, खेल मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे स्वयं उन स्थलों का दौरा करेंगी और कमियों को दूर किया जाएगा।
विधायकों की राजनीतिक पृष्ठभूमि और प्रभाव
इन दोनों विधायकों की सक्रियता बिहार की राजनीति में एक नए बदलाव का संकेत मानी जा रही है। मैथिली ठाकुर ने नवंबर में अलीनगर से अपना पहला चुनाव जीता था और वे अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ अब राजनीतिक सक्रियता के लिए भी जानी जा रही हैं। वहीं, 30 वर्षीय कोमल सिंह मुजफ्फरपुर जिले की सबसे कम उम्र की विधायक हैं। वे एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आती हैं; उनके पिता दिनेश प्रसाद सिंह जेडीयू के एमएलसी हैं और उनकी मां वीणा देवी वैशाली से सांसद हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सत्तापक्ष के विधायकों द्वारा सदन में अपनी ही सरकार को घेरना आंतरिक लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि नए जनप्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को लेकर अधिक मुखर हैं और वे केवल आधिकारिक आश्वासनों से संतुष्ट होने के बजाय ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
निष्कर्ष और भविष्य की कार्रवाई
सदन में हुई इस बहस के बाद स्वास्थ्य और खेल मंत्रालयों ने संबंधित परियोजनाओं की समीक्षा करने का वादा किया है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि जर्जर भवनों की पहचान कर ली गई है और उन्हें चरणबद्ध तरीके से ठीक किया जाएगा। खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने विधायक कोमल सिंह को साइट विजिट का प्रस्ताव दिया है ताकि विवाद का समाधान हो सके। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार विधानसभा में अब बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को अपने ही सहयोगियों के कड़े सवालों का सामना करना पड़ेगा।