बिहार सरकार ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों की सबसे बड़ी मांग को स्वीकार कर लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि आगामी TRE-4 (शिक्षक भर्ती परीक्षा) अब दो चरणों के बजाय केवल एक ही चरण में आयोजित की जाएगी। इससे पहले इस परीक्षा को प्रारंभिक (पीटी) और मुख्य (मेंस) परीक्षा के प्रारूप में कराने का प्रस्ताव था, जिसका छात्र कड़ा विरोध कर रहे थे। पटना की सड़कों पर छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन और मुख्यमंत्री आवास के घेराव की कोशिश के बाद सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और कुल 10 महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इन निर्णयों के बाद छात्र संगठनों ने अपना आंदोलन समाप्त करने का फैसला किया है।
TRE-4 अब एकल चरण परीक्षा के रूप में
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार छात्रों की मांगों के प्रति शुरू से ही संवेदनशील रही है। उन्होंने बताया कि छात्रों की सुविधा और भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए TRE-4 परीक्षा को एकल चरण में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही, एक अभ्यर्थी एक परिणाम के सिद्धांत को नियमानुसार लागू करने पर भी सहमति बनी है और इस फैसले से उन हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है जो परीक्षा के जटिल चरणों और परिणाम में होने वाली देरी को लेकर आशंकित थे। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुलभ हो जाएगी।
परीक्षा सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन
राज्य की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुधार सुनिश्चित करने के लिए बिहार सरकार ने एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता माननीय पटना उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश करेंगे। यह समिति न केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए अपनी अनुशंसाएँ देगी, बल्कि विभिन्न परीक्षाओं से संबंधित छात्रों की शिकायतों और सुझावों की सुनवाई भी करेगी। यदि किसी छात्र के पास किसी परीक्षा में अनियमितता से संबंधित साक्ष्य हैं, तो वह इस समिति के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है और समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही भविष्य की कार्रवाई तय की जाएगी।
विद्यार्थी सहयोग पोर्टल और शिविर की शुरुआत
छात्रों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए सरकार ने विद्यार्थी सहयोग पोर्टल और विद्यार्थी सहयोग शिविर शुरू करने का निर्णय लिया है और मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से छात्र अपनी किसी भी शिकायत या समस्या को दर्ज करा सकेंगे, जिसका समाधान अनिवार्य रूप से 30 दिनों के भीतर किया जाएगा। यह कदम छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद की कमी को दूर करने के लिए उठाया गया है। सरकार ने दोहराया है कि वह राज्य के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और उनके कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
भर्ती परीक्षाओं और जांच से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कई अन्य लंबित मांगों पर भी सहमति बनी है और 70 वीं BPSC परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक जांच समिति द्वारा इसकी जांच कराई जाएगी। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) को निर्देश दिया गया है कि वह अपनी सभी भर्ती परीक्षाएं समय पर आयोजित करे और जल्द से जल्द एक आधिकारिक परीक्षा कैलेंडर जारी करे। इसके अलावा, 1799 दरोगा बहाली परीक्षा की जांच भी विशेषज्ञ समिति द्वारा की जाएगी और समिति की रिपोर्ट आने तक इस बहाली की आगे की प्रक्रिया को रोक दिया गया है। सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति से पहले बिहार पात्रता परीक्षा (BET) आयोजित करने पर भी सर्वसम्मति बनी है।
पुस्तकालयाध्यक्ष बहाली और संविदा कर्मियों के लिए नीति
लंबे समय से लंबित पुस्तकालयाध्यक्षों (Librarians) की बहाली को लेकर भी सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है। रिक्तियों के अनुरूप बहाली प्रक्रिया को शीघ्र शुरू करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। वहीं, संविदा कर्मियों को भर्ती में दिए जाने वाले अंकों और वेटेज के मुद्दे पर एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी। यह समिति इस बात पर विचार करेगी कि क्या संविदा कर्मियों के लिए एक अलग कोटा निर्धारित किया जाना चाहिए, ताकि सामान्य अभ्यर्थियों के हितों की भी रक्षा हो सके। यह निर्णय सरकार के मौजूदा प्रावधानों के आलोक में लिया जाएगा।
डोमिसाइल नीति और उम्र सीमा पर विचार
बिहार की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में अधिकतम डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग पर सरकार ने कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लेने का निर्णय लिया है। नियमानुकूल प्रक्रिया के तहत स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे और इसके साथ ही, विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में अधिकतम उम्र सीमा में छूट देने के प्रस्ताव को भी विचारार्थ समिति के समक्ष रखा जाएगा। सरकार ने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की है कि सभी भर्ती परीक्षाओं का एक निश्चित कैलेंडर जारी किया जाएगा और उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि छात्रों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय और स्पष्टता मिल सके।
पेपर लीक की जांच और पारदर्शिता के मानक
परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए सरकार ने BPSC की तर्ज पर आयोजित होने वाली सभी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र, ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिका की पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में एक प्रस्ताव न्यायिक समिति के समक्ष लाया जाएगा। वर्तमान में, BPSC द्वारा आयोजित AEDO और सेनेटरी इंस्पेक्टर जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अंत में, विभागीय पत्रांक 162/ गो. 2026 को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है, जो छात्रों की मांगों के अनुरूप एक बड़ा प्रशासनिक सुधार है।