Union Budget 2026: सिर्फ टैक्स से नहीं चलता देश, जानिए सरकार के पास खर्च करने के लिए अरबों रुपये कहां से आते हैं?
Union Budget 2026 - सिर्फ टैक्स से नहीं चलता देश, जानिए सरकार के पास खर्च करने के लिए अरबों रुपये कहां से आते हैं?
देश का आम बजट 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश होने जा रहा है, और हर साल की तरह इस बार भी देश की निगाहें वित्त मंत्री के पिटारे पर टिकी हैं। आम आदमी के लिए बजट का मतलब अक्सर सिर्फ इतना होता है कि। क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा, या फिर टैक्स स्लैब में कितनी राहत मिली। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि आखिर सरकार के पास लाखों करोड़ रुपये खर्च करने के लिए पैसा आता कहां से है? जिस तरह हम और आप अपने घर का बजट बनाते हैं, ठीक वैसे ही सरकार को भी अपना घर यानी देश चलाने के लिए पाई-पाई का हिसाब रखना पड़ता है। बजट सिर्फ खर्चों की सूची नहीं है, बल्कि यह सरकार की कमाई का भी लेखा-जोखा है। दिलचस्प बात यह है कि सरकार की कमाई का जरिया सिर्फ आपका दिया हुआ टैक्स नहीं है, बल्कि इसके अलावा भी कई ऐसे रास्ते हैं जिनसे सरकारी खजाना भरता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि सरकार का खजाना कैसे भरता है और किन-किन स्रोतों से यह अरबों रुपये जुटाती है, ताकि देश के विकास और कल्याणकारी योजनाओं को गति दी जा सके।
राजस्व का आधार: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर
सरकार की कमाई का सबसे मुख्य और बड़ा जरिया टैक्स ही होता है। इसे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहा जा सकता है। यह दो तरह से काम करता है: प्रत्यक्ष (डायरेक्ट) और अप्रत्यक्ष (इनडायरेक्ट) कर। जब आप अपनी मेहनत की कमाई पर इनकम टैक्स चुकाते हैं या कोई कंपनी कॉरपोरेट टैक्स देती है, तो वह सीधा सरकारी खजाने में जाता है। ये प्रत्यक्ष कर सीधे व्यक्तियों और कंपनियों की आय या मुनाफे पर लगाए जाते हैं। सरकार इन करों का उपयोग सार्वजनिक सेवाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को वित्तपोषित करने के लिए करती है और प्रत्यक्ष करों का उद्देश्य आय असमानता को कम करना भी होता है, क्योंकि आमतौर पर अधिक आय वाले व्यक्तियों और कंपनियों पर अधिक कर लगाया जाता है।अप्रत्यक्ष कर: हर खरीद में सरकार का हिस्सा
इसके अलावा, एक कमाई वह होती है जो आपको दिखाई नहीं देती, लेकिन आप हर कदम पर उसे चुकाते हैं। जब आप बाजार से सुई से लेकर कार तक कुछ भी खरीदते हैं, तो उस पर लगा जीएसटी (GST) सरकार की जेब में जाता है। जीएसटी एक व्यापक अप्रत्यक्ष कर है जिसने कई पुराने करों जैसे वैट, सेवा कर और उत्पाद शुल्क को प्रतिस्थापित कर दिया है। वहीं, पेट्रोल-डीजल भरवाते समय या शराब की खरीद पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) भी सरकार के राजस्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा है और ये अप्रत्यक्ष कर वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री पर लगाए जाते हैं और अंततः उपभोक्ताओं द्वारा वहन किए जाते हैं। सरकार इसी पैसे का इस्तेमाल कर न सिर्फ प्रशासन चलाती है, बल्कि अमीर और गरीब के बीच की खाई को कम करने के लिए कल्याणकारी योजनाएं भी लाती है और ये कर सरकार को एक स्थिर और व्यापक राजस्व आधार प्रदान करते हैं, जो देश के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
अगर आपको लगता है कि सरकार सिर्फ टैक्स वसूली पर निर्भर है, तो आप गलत हैं। सरकार एक बहुत बड़ी कारोबारी भी है। इसे ‘नॉन-टैक्स रेवेन्यू’ कहा जाता है। आप जब भी किसी सरकारी सेवा का इस्तेमाल करते हैं और फीस चुकाते हैं, या ट्रैफिक नियम तोड़ने पर चालान भरते हैं, तो वह पैसा सरकार के पास ही जाता है। इसमें पासपोर्ट शुल्क, लाइसेंस शुल्क, अदालती शुल्क और अन्य प्रशासनिक सेवाएं शामिल हैं। ये शुल्क और जुर्माने सरकार को अपनी सेवाओं के संचालन और नियमों को लागू करने में मदद करते हैं। यह राजस्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो सीधे नागरिकों द्वारा सरकारी सेवाओं के उपयोग से उत्पन्न होता है।सरकारी कंपनियों का मुनाफा और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन
इतना ही नहीं, रेलवे, सरकारी बैंक, डाक विभाग और ओएनजीसी (ONGC) जैसी सरकारी कंपनियां जो मुनाफा कमाती हैं, उसका लाभांश (Dividend) सरकार को मिलता है और ये सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं और अपनी व्यावसायिक गतिविधियों से लाभ कमाते हैं, जिसका एक हिस्सा लाभांश के रूप में सरकार को वापस मिलता है। इसके अलावा, देश के प्राकृतिक संसाधनों पर भी सरकार का अधिकार होता है। कोयले की खदानें हों, खनिज हों या मोबाइल नेटवर्क के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी, इन सबको बेचकर या लीज पर देकर सरकार को हजारों करोड़ रुपये की कमाई होती है और ये संसाधन देश की संपत्ति हैं और उनके वाणिज्यिक उपयोग से प्राप्त राजस्व सरकार के खजाने को मजबूत करता है, जिससे विकास परियोजनाओं और सार्वजनिक व्यय के लिए धन उपलब्ध होता है।जब आय कम पड़े: उधारी और विनिवेश का सहारा
कई बार ऐसा होता है कि सरकार की कुल कमाई उसके खर्चों से कम पड़ जाती है। विकास कार्यों और जनकल्याण के लिए जब पैसा कम पड़ने लगता है, तो सरकार ‘उधारी’ का रास्ता अपनाती है। यह बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा होता है, जिसे। राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए सरकार बाजार में बॉन्ड जारी करती है, जिसे। बैंक, बीमा कंपनियां और कई बार आम जनता खरीदती है। ये बॉन्ड एक प्रकार के ऋण साधन होते हैं जिनके माध्यम से सरकार निवेशकों से पैसा उधार लेती है और बदले में उन्हें ब्याज का भुगतान करती है।छोटी बचत योजनाएं और विदेशी कर्ज
इसके अलावा, छोटी बचत योजनाएं (जैसे पीपीएफ या पोस्ट ऑफिस सेविंग्स) में जो पैसा। हम जमा करते हैं, उसका इस्तेमाल भी सरकार अपने खर्चों के लिए करती है। ये योजनाएं नागरिकों को बचत के लिए प्रोत्साहित करती हैं और साथ ही सरकार को दीर्घकालिक वित्तपोषण का एक स्रोत प्रदान करती हैं और जरूरत पड़ने पर सरकार विदेशी संस्थाओं या दूसरे देशों से कर्ज भी लेती है, खासकर बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं या आर्थिक संकट के समय। ये अंतरराष्ट्रीय ऋण अक्सर रियायती दरों पर उपलब्ध होते हैं लेकिन कुछ शर्तों के साथ आते हैं।विनिवेश: सरकारी हिस्सेदारी बेचकर पूंजी जुटाना
कई बार सरकार अपनी ही कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर (जिसे विनिवेश या Disinvestment कहते हैं) एकमुश्त बड़ी रकम जुटाती है। विनिवेश का उद्देश्य न केवल राजस्व जुटाना होता है, बल्कि सरकारी कंपनियों में दक्षता बढ़ाना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना भी होता है। यह एक रणनीतिक कदम होता है जिसका उपयोग सरकार अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने और सार्वजनिक ऋण को कम करने के लिए करती है। इस प्रकार, सरकार का वित्तीय प्रबंधन एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न स्रोतों से राजस्व जुटाना। और उन्हें देश के विकास और कल्याण के लिए प्रभावी ढंग से आवंटित करना शामिल है।