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बजट 2026-27: सरकार ने डेरिवेटिव्स पर बढ़ाया STT, सट्टेबाजी पर कसी नकेल

बजट 2026-27: सरकार ने डेरिवेटिव्स पर बढ़ाया STT, सट्टेबाजी पर कसी नकेल
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केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बाजार के वायदा और विकल्प (F&O) खंड पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) में वृद्धि की घोषणा की है। सरकार का यह निर्णय बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर कर की दरों में बदलाव केवल इसी विशिष्ट खंड तक सीमित रहेगा, जबकि नकद बाजार (कैश सेगमेंट) में होने वाले निवेश पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

डेरिवेटिव्स पर बढ़ाया गया कर और राजस्व सचिव का स्पष्टीकरण

बजट प्रस्तावों के अनुसार, वायदा कारोबार में बढ़ती भागीदारी को देखते हुए STT की दरों को संशोधित किया गया है। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि कर में यह वृद्धि केवल फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो निवेशक डिलीवरी-आधारित इक्विटी में निवेश करते हैं, यानी शेयर खरीदकर अपने डीमैट खाते में रखते हैं, उन पर इस बढ़े हुए टैक्स का कोई बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य बाजार के उस हिस्से को विनियमित करना है जहां लेनदेन की मात्रा वास्तविक निवेश के बजाय अल्पकालिक सट्टेबाजी पर आधारित है।

शंकर शर्मा ने की सरकारी कदम की सराहना

बाजार के दिग्गज और जीक्वांट इन्वेस्टेक के संस्थापक शंकर शर्मा ने सरकार के इस फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग की तुलना अत्यधिक हानिकारक पदार्थों से की। शर्मा के अनुसार, भारत में F&O का बढ़ता चलन युवाओं के लिए आर्थिक रूप से विनाशकारी साबित हो रहा है। उन्होंने इसे एक ऐसी व्यवस्था बताया जो अर्थव्यवस्था में कोई वास्तविक मूल्य जोड़ने के बजाय केवल धन का हस्तांतरण करती है। उनके विश्लेषण के अनुसार, इस व्यापार में पैसा आम खुदरा व्यापारियों की जेब से निकलकर ब्रोकरेज फर्मों और बड़े संस्थागत खिलाड़ियों के पास जा रहा है, जो देश की आर्थिक जड़ों को कमजोर कर रहा है।

सेबी की रिपोर्ट और खुदरा निवेशकों का बढ़ता जोखिम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा जारी किए गए आंकड़े सरकार की इस सख्ती का मुख्य आधार बने हैं और सेबी के एक विस्तृत अध्ययन के अनुसार, इक्विटी F&O सेगमेंट में व्यापार करने वाले 10 में से 9 व्यक्तिगत ट्रेडर भारी वित्तीय नुकसान का सामना करते हैं। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि नुकसान उठाने वाले अधिकांश निवेशक छोटे शहरों से आते हैं और उनकी पूंजी सीमित होती है। विश्लेषकों के अनुसार, रातों-रात अमीर बनने की चाहत में खुदरा निवेशक अपनी बचत को उच्च जोखिम वाले इन उपकरणों में लगा रहे हैं, जिससे उनकी वित्तीय सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।

बाजार संरचना पर प्रभाव और विश्लेषकों का मत

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि STT में वृद्धि से F&O खंड में लेनदेन की लागत बढ़ेगी, जिससे उच्च आवृत्ति वाले व्यापारियों (High-Frequency Traders) और सट्टेबाजों की सक्रियता में कमी आ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम बाजार को अधिक परिपक्व बनाने और निवेशकों को दीर्घकालिक निवेश की ओर प्रेरित करने के लिए आवश्यक था। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इससे बाजार की तरलता (Liquidity) पर अल्पकालिक प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह बाजार की सेहत के लिए सकारात्मक होगा और सरकार की मंशा स्पष्ट है कि शेयर बाजार को केवल सट्टेबाजी का केंद्र बनने से रोका जाए और इसे पूंजी निर्माण के एक विश्वसनीय माध्यम के रूप में विकसित किया जाए।

निष्कर्ष

बजट 2026-27 के माध्यम से सरकार ने यह संदेश दिया है कि वह वित्तीय बाजारों में अनुशासन और खुदरा निवेशकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। डेरिवेटिव्स पर बढ़ाया गया STT न केवल राजस्व जुटाने का एक साधन है, बल्कि यह बाजार में बढ़ते असंतुलन को ठीक करने का एक नीतिगत प्रयास भी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस कर वृद्धि का बाजार के कुल टर्नओवर और खुदरा भागीदारी के पैटर्न पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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