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ट्रंप टैरिफ की निकलेगी हवा, बजट 2026 में सरकार का सुपरप्लान तैयार

ट्रंप टैरिफ की निकलेगी हवा, बजट 2026 में सरकार का सुपरप्लान तैयार
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भारत का आगामी केंद्रीय बजट 2026 देश की व्यापार नीतियों में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए तैयार है और 1 फरवरी, रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब बजट पेश करेंगी, तो पूरी दुनिया की नजरें भारत की रणनीति पर होंगी। इस बार का बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित भारी टैरिफ का एक रणनीतिक जवाब होने वाला है। सरकार एक ऐसा 'सुपरप्लान' तैयार कर रही है जो विदेशी सामानों के लिए भारत के दरवाजे खोलकर घरेलू सप्लाई चेन को नई मजबूती देगा और इनपुट कॉस्ट में बड़ी कटौती करेगा।

ट्रंप के टैरिफ वार का रणनीतिक जवाब

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी बाजार में भारतीय आयात पर 26 फीसदी तक के 'रेसीप्रोकल टैरिफ' लगाने की घोषणा की है और इस कदम ने भारतीय निर्यातकों के बीच चिंता पैदा कर दी है। हालांकि, भारत सरकार ने जवाबी कार्रवाई के बजाय एक रक्षात्मक लेकिन जोखिम-मुक्त रणनीति अपनाई है। बजट 2026 में सरकार चुनिंदा विदेशी उत्पादों पर अपना रुख नरम कर सकती है। इसका उद्देश्य उन सप्लायर्स पर निर्भरता कम करना है जो भारत के लिए असुरक्षित ट्रेड चैनल बन गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को और अधिक लचीला बनाएगा।

ट्रेड स्ट्रैटिजी में बड़ा बदलाव और राजकोषीय लक्ष्य

बजट में पॉलिसी मेकर्स के सामने एक बड़ी चुनौती होगी: अमेरिकी टैरिफ से लगने वाले झटकों से अर्थव्यवस्था को बचाना और साथ ही निवेशकों का भरोसा बनाए रखना और भारत ने राजकोषीय सुदृढ़ीकरण (Fiscal Consolidation) की दिशा में पहले ही लंबी छलांग लगाई है। वित्त वर्ष 2021 में जो राजकोषीय घाटा 9. 2 फीसदी था, उसे 2024 में घटाकर 5. 6 फीसदी कर दिया गया है। अब सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 तक इसे 4 और 5 फीसदी पर लाने का है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापार नीतियों में बदलाव एक महत्वपूर्ण हथियार साबित होगा।

चुनिंदा क्षेत्रों में शुल्क कटौती की उम्मीद

बजट में महत्वपूर्ण कैपिटल गुड्स, इंटरमीडिएट इनपुट और एडवांस मशीनरी पर आयात शुल्क कम किए जाने की प्रबल संभावना है। प्राइस वाटरहाउस एंड कंपनी एलएलपी के प्रिंसिपल गौतम खट्टर के अनुसार, सरकार कच्चे माल पर लक्षित टैरिफ रिफॉर्म कर सकती है ताकि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग की लागत कम हो सके। हालांकि, तैयार उत्पादों पर सुरक्षात्मक रुख बरकरार रहेगा ताकि स्थानीय उद्योगों को नुकसान न हो। यह संतुलन 'मेक इन इंडिया' को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आवश्यक है।

निर्यातकों के लिए नए बाजारों की खोज

भले ही अमेरिकी टैरिफ ने स्टील, केमिकल, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों को प्रभावित किया है, लेकिन भारतीय निर्यातकों ने अद्भुत लचीलापन दिखाया है। बजट में निर्यातकों को नए रूट्स और बाजारों की खोज के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और अब भारतीय कंपनियां केवल अमेरिकी मांग पर निर्भर रहने के बजाय यूरोपीय संघ, मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया के बाजारों की ओर रुख कर रही हैं। स्पेन, यूएई और चीन जैसे देशों में भारत के निर्यात में हुई वृद्धि इस नई रणनीति की सफलता का प्रमाण है।

पीएलआई योजना और आत्मनिर्भर भारत

सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं इस बजट का केंद्र बिंदु बनी रहेंगी। इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत पहले ही एक बड़ी ताकत बन चुका है, जहां एप्पल और डिक्सन जैसी कंपनियां अपना उत्पादन बढ़ा रही हैं। बजट में इन क्षेत्रों के लिए कच्चे माल के आयात को आसान बनाया जा सकता है, जबकि तैयार माल पर उच्च टैरिफ जारी रखकर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।

चीन से विविधीकरण और नए व्यापार समझौते

बजट 2026 का एक और महत्वपूर्ण पहलू चीन पर निर्भरता कम करना होगा। सरकार वैकल्पिक सप्लायर्स को प्रोत्साहित करके और स्थानीय क्षमता का निर्माण करके धीरे-धीरे चीन से दूरी बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसके साथ ही, भारत-ईएफटीए जैसे नए व्यापार समझौतों के माध्यम से। यूरोपीय देशों के साथ व्यापारिक बाधाओं को कम करने की तैयारी है। यह न केवल भारत की सप्लाई चेन को सुरक्षित करेगा,। बल्कि वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी को भी बढ़ाएगा।

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