वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश करने की तैयारी में हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बार बजट भाषण की संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा सकता है, जो पिछले 75 वर्षों से चली आ रही परंपरा को बदल देगा। परंपरागत रूप से, बजट भाषण का 'पार्ट-ए' सरकारी योजनाओं और व्यय पर केंद्रित होता था, जबकि 'पार्ट-बी' मुख्य रूप से कर प्रस्तावों और नीतिगत घोषणाओं तक सीमित रहता था। हालांकि, इस बार 'पार्ट-बी' का उपयोग भारत के आर्थिक भविष्य के लिए एक विस्तृत विजन दस्तावेज के रूप में किए जाने की संभावना है।
बजट भाषण के 'पार्ट-बी' में बदलाव का रोडमैप
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, आगामी बजट में 'पार्ट-बी' केवल कर संशोधनों का विवरण नहीं होगा और इसमें अल्पकालिक प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक लक्ष्यों के बीच तालमेल बिठाते हुए एक व्यापक आर्थिक रोडमैप पेश किया जा सकता है। यह बदलाव देश की स्थानीय आर्थिक क्षमताओं और वैश्विक आकांक्षाओं को एकीकृत करने के उद्देश्य से प्रेरित बताया जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बजट को केवल एक वार्षिक वित्तीय विवरण के बजाय एक रणनीतिक नीति दस्तावेज के रूप में स्थापित करेगा।
परंपराओं को तोड़ने का पिछला इतिहास
यह निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट होगा। उन्होंने 2019 में अपने पहले बजट के दौरान दशकों पुराने लेदर ब्रीफकेस की परंपरा को समाप्त कर दिया था और बजट दस्तावेजों को लाल कपड़े में लपेटकर 'बही-खाता' के रूप में पेश किया था। इसके बाद, पिछले चार वर्षों से बजट पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस प्रारूप में पेश किया जा रहा है। 'पार्ट-बी' की संरचना में संभावित बदलाव इसी आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का अगला चरण माना जा रहा है।
राजकोषीय घाटा और पूंजीगत व्यय के लक्ष्य
4% पर रहने का अनुमान है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4% के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य निर्धारित कर सकती है। इसके अतिरिक्त, बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय (Capex) में भी वृद्धि की उम्मीद है। 2 लाख करोड़ रुपये है, जिसे आगामी बजट में 10-15% बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक किया जा सकता है।
सामाजिक सुरक्षा और क्षेत्रीय आवंटन पर ध्यान
बजट में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, विशेष रूप से 'G RAM G' जैसी पहलों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। इसके साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों के लिए बजटीय आवंटन में वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह बजट भारत को 21वीं सदी के दूसरे चतुर्थांश में एक वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए आवश्यक ढांचागत सुधारों पर केंद्रित हो सकता है।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और निष्कर्ष
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, बजट की संरचना में यह बदलाव सरकार की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें वार्षिक वित्तीय प्रबंधन को दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ा जा रहा है और कर संरचना में नियमित बदलावों के बजाय एक स्थिर और दूरदर्शी नीतिगत ढांचे पर जोर देना विदेशी और घरेलू निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है। 1 फरवरी को पेश होने वाला यह बजट यह स्पष्ट करेगा कि सरकार अगले दशक के लिए भारत की आर्थिक दिशा को किस प्रकार परिभाषित करती है।