नई दिल्ली: केंद्र सरकार के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी पीएलसी ने पूर्ववर्ती कर (रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स) मामले में भारत सरकार की एक अरब डॉलर की डील को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने फ्रांस से लेकर अमेरिका में भारतीय संपत्तियों को जब्त करने से संबंधित मामलों को वापस लेने की घोषणा की है। केयर्न ने कहा है कि वह एक अरब डॉलर का रिफंड मिलने के कुछ दिन बाद ही मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर देगी।
मानसून सेशन में खत्म किया था रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स
भारत सरकार ने मानसून सेशन में रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स को खत्म किया था। कंपनी ने इस नीति को रद्द करने के फैसले को साहसी करार दिया है। इस संदर्भ में केयर्न के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) साइमन थॉमसन ने कहा कि हमें सभी मामलों को वापस लेने और पिछली तारीख से कर मांग के प्रवर्तन के लिए जब्त राशि को लौटाने की पेशकश स्वीकर है।
पेशकश को स्वीकार करने के पक्ष में शेयरधारक
कंपनी पेरिस में अपार्टमेंट और अमेरिका में एयर इंडिया के विमानों को जब्त करने के मामलों को रिफंड मिलने के बाद वापस ले लेगी। साथ ही थॉमसन ने यह भी कहा कि कंपनी के शेयरधारक इस पेशकश को स्वीकार करने के और इसे आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। ब्लैकरॉक और फ्रैंकलिन टेंपलटन कंपनी के प्रमुख शेयरधारक हैं।
क्या है पूरा मामला?
केयर्न एनर्जी ने 2007 में भारतीय इकाई केयर्न इंडिया को सूचीबद्ध कराया। केयर्न एनर्जी ने 2011 में कंपनी की 10 फीसदी हिस्सेदारी अपने पास रखकर शेष हिस्सा वेदांता लिमिटेड को बेच दिया था। आयकर विभाग ने 2012 में नियमों में बदलाव कर पूर्व प्रभावी कर लगाते हुए मार्च, 2015 में कंपनी से 10,247 करोड़ का पूंजीगत लाभ कर मांगा। इसकी वसूली के लिए सरकार ने वेदांता में केयर्न की पांच फीसदी हिस्सेदारी बेच दी और 1,140 करोड़ का लाभांश व 1,590 करोड़ का टैक्स रिफंड भी जब्त कर लिया। इसके बाद कंपनी ने 2015 में भारत सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में अपील की थी।
क्या है रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स?
रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स वो टैक्स होता है जो कंपनियों से उनकी पुरानी डील पर भी वसूला जाता है। आसान भाषा में समझें, तो मान लीजिए कि सरकार ने साल 2021 में किसी डील या सर्विस पर टैक्स लगाने का कानून बनाया है। इस कानून के तहत सरकार एक समय तय करती है, जिससे कंपनी से टैक्स वसूला जाएगा। अब यदि सरकार ने 2010 की टाइमलाइन तय की है, तो फिर सरकार 2010 से अब तक का कुल टैक्स कंपनी से वसूलेगी। भले ही 2010 में यह कानून नहीं था लेकिन चूंकि अब सरकार ने 2021 में कानून बना दिया है, तो कंपनी को 2010 से ही टैक्स का भुगतान करना पड़ेगा।
2012 के कानून का उपयोग करके 17 संस्थाओं से 1.10 लाख करोड़ रुपये कर की मांग की गई थी। इनमें से बड़ी वसूली केयर्न से ही हुई है। सरकार को रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स से 8100 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। अगर ये कंपनियां भारत के खिलाफ मामलों को वापस लेने पर सहमती जताती हैं, तो इनसे जुटाए गए 8,100 करोड़ रुपये वापस किए जाएंगे।