चीन में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने एक बेहद आक्रामक और व्यापक अभियान छेड़ रखा है। इस अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चीन में हर दिन औसतन 2700 सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया जा रहा है। साल 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक चीन की सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप में कुल 9 लाख 83 हजार लोगों को अरेस्ट किया है। यह कार्रवाई चीन की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और भ्रष्ट तत्वों को बाहर निकालने के उद्देश्य से की जा रही है।
शी जिनपिंग के कार्यकाल में 70 लाख गिरफ्तारियां
चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह महाअभियान राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आह्वान पर चलाया जा रहा है और शी जिनपिंग साल 2012 में पहली बार चीन के राष्ट्रपति नियुक्त हुए थे और तब से लेकर अब तक भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी नीति बेहद सख्त रही है। साल 2012 के बाद से अब तक चीन में 70 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मियों को भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया जा चुका है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह अभियान अब अपने सबसे आक्रामक चरण में है, जहां जांच एजेंसियां तकनीक और जमीनी जासूसों के नेटवर्क का भरपूर इस्तेमाल कर रही हैं।
जासूसों को सूचना के बदले 1500 रुपये का इनाम
भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ने के लिए चीन की सरकार ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। सरकार ने बड़े पैमाने पर जासूसों की भर्ती की है जिनका काम केवल भ्रष्ट कर्मियों और अधिकारियों के बारे में बुनियादी जानकारी देना है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक सटीक जानकारी देने के बदले इन जासूसों को 100 युआन दिए जाते हैं, जो भारतीय मुद्रा में करीब 1500 रुपये के बराबर होते हैं। इन जासूसों द्वारा दी गई शुरुआती जानकारी के आधार पर जांच एजेंसियां अपनी आगे की कार्यवाही सुनिश्चित करती हैं और सबूत जुटाकर गिरफ्तारी करती हैं।
वीचैट और पार्टी कार्यकर्ताओं का गुप्त नेटवर्क
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए चीन ने अपनी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं को अनुरक्षक के तौर पर तैनात किया है। इन कार्यकर्ताओं की मुख्य जिम्मेदारी भ्रष्ट अधिकारियों के बारे में गोपनीय सूचनाएं इकट्ठा करना है और इन सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए वीचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। कई मामलों में तो जांच अधिकारी चुपचाप उन संदिग्ध अफसरों के ग्रुप में शामिल हो जाते हैं जहां भ्रष्टाचार की योजनाएं या बातें होती हैं और इससे अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ने और उनके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने में आसानी होती है।
बड़े सैन्य अधिकारियों और पूर्व मंत्रियों को सजा-ए-मौत
चीन का यह अभियान केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सेना के बड़े अधिकारियों और पूर्व मंत्रियों पर भी कड़ी कार्रवाई की गई है। इसी साल चीन ने अपनी सेना के उपाध्यक्ष हे वेइदोंग जैसे अति वरिष्ठ अधिकारी को गिरफ्तार किया है। पिछले 12 महीने के भीतर चीन की मिलिट्री सर्विस के 9 बड़े अफसरों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति का सबसे बड़ा उदाहरण पिछले महीने देखने को मिला, जब चीन ने अपने 2 पूर्व रक्षा मंत्रियों को भ्रष्टाचार के मामले में मौत की सजा सुनाई। इन दोनों पूर्व रक्षा मंत्रियों को 2 साल के बाद फांसी पर लटकाया जाएगा। राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद इस पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने भ्रष्टाचार को देश का सबसे प्रमुख मुद्दा घोषित किया है।