खाड़ी युद्ध और होर्मुज नाकेबंदी के कारण जहां पूरी दुनिया इस समय भीषण तेल और गैस संकट के जाल में उलझी हुई है, वहीं दूसरी ओर चीन ने एक बेहद चौंकाने वाली रणनीति अपनाई है। चीन पिछले कुछ समय से लगातार सोना खरीदने में जुटा हुआ है और उसने बीते 8 महीनों में 1000 टन से भी अधिक सोना खरीद लिया है। चीन द्वारा खरीदा गया यह सोना भारत के कुल गोल्ड रिजर्व से भी अधिक है। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि साल 2025 में बीजिंग ने पूरे साल के दौरान 886 टन सोना खरीदा था, लेकिन इस साल उसने उतना सोना मात्र 8 महीनों के भीतर ही अपने भंडार में शामिल कर लिया है।
चीन की दूरगामी स्वर्ण रणनीति
चीन की आर्थिक रणनीति हमेशा से ही दूरगामी रही है। जब पूरी दुनिया में तेल और गैस की कमी को लेकर हाहाकार मचा हुआ था, तब चीन तेल के बजाय सोने की खरीद पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा था। यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर चीन इतनी बड़ी मात्रा में सोना क्यों जमा कर रहा है। चीन के पास वर्तमान में 2292 टन और 300 किलोग्राम से अधिक सोने का प्रमाणित भंडार मौजूद है। चीन के कस्टम डेटा के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच चीन का सोने का आयात 1000 टन यानी करीब 10 लाख किलो के स्तर पर पहुंच गया है।
बाजार मूल्य और निवेश के कारण
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों और चीन की खरीदारी के मूल्यांकन को देखें तो यह काफी बड़ा आंकड़ा है। यदि सोने की कीमत 4391 डॉलर प्रति औंस के हिसाब से देखी जाए, तो चीन द्वारा खरीदे गए इस सोने की वैल्यूएशन करीब 158 अरब डॉलर से भी अधिक बैठती है। तेल संकट के इस दौर में चीन की ओर से सोने की इस भारी खरीदारी के पीछे कई प्रमुख कारक काम कर रहे हैं। इसमें निवेश की मजबूत मांग, वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में आई गिरावट और चीनी युआन की मजबूती जैसे कारण शामिल हैं। इन सभी परिस्थितियों ने चीन को अपना स्वर्ण भंडार बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है।
अमेरिकी बॉन्ड से दूरी और सुरक्षित निवेश
चीन न केवल विदेशों से सोना खरीदता है, बल्कि वह अपने यहां खनन के जरिए भी सोने का उत्पादन करता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में चीन ने 384 टन सोने का उत्पादन किया था और उसी साल 886 टन सोने का आयात भी किया था। सोने के प्रति चीन की इस बढ़ती दिलचस्पी के पीछे उसकी निवेश विविधीकरण की रणनीति है। बीजिंग अब अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी को लगातार घटा रहा है और सोने की ओर रुख कर रहा है। जुलाई के महीने में चीन ने अमेरिकी बॉन्ड में अपना निवेश घटाकर 618 अरब डॉलर कर दिया, जो साल 2008 के बाद का सबसे निचला स्तर है। वैश्विक अस्थिरता के इस माहौल में चीन सोने को एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में देख रहा है।