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कच्चा तेल 4 साल के उच्चतम स्तर पर: $120 पहुंचा भाव, ईरान की $140 की चेतावनी

कच्चा तेल 4 साल के उच्चतम स्तर पर: $120 पहुंचा भाव, ईरान की $140 की चेतावनी
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मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू गई है, जो पिछले 4 वर्षों में सबसे अधिक है। 76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। यह जून 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर दर्ज किया गया है।

ट्रम्प की सैन्य नाकेबंदी और होर्मुज पर तनाव

द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, तेल की कीमतों में इस अचानक वृद्धि का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का वह बयान है जिसमें उन्होंने ईरान के बंदरगाहों पर सैन्य नाकेबंदी जारी रखने की बात कही है। ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी समझौते पर सहमत नहीं होता, तब तक यह नाकेबंदी नहीं हटाई जाएगी। इस फैसले का सीधा प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पड़ा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है। इस स्थिति ने तेल की आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

ईरान का तंज और $140 का अगला लक्ष्य

तेल की बढ़ती कीमतों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों का अगला पड़ाव 140 डॉलर प्रति बैरल होने जा रहा है। गालिबाफ ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रम्प को उनके सलाहकार गलत मशविरा दे रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का मजाक उड़ाया और कहा कि उनकी सलाह की वजह से तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है।

अमेरिका का युद्ध पर भारी खर्च और अन्य घटनाक्रम

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी जूल्स डब्ल्यू. हर्स्ट ने बुधवार को संसद की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की सुनवाई के दौरान बताया कि अमेरिका ने पिछले 2 महीनों में ईरान युद्ध पर 25 अरब डॉलर खर्च किए हैं। हर्स्ट के मुताबिक कुल खर्च का बड़ा हिस्सा हथियारों, मिसाइलों और गोला-बारूद पर हुआ है।

इन वैश्विक परिस्थितियों और कूटनीतिक तनावों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

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