अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा क्यूबा को तेल की आपूर्ति करने वाले देशों के खिलाफ टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल बर्मुडेज ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे क्यूबा की अर्थव्यवस्था का गला घोंटने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्यूबा इस नए हमले का सामना दृढ़ता और शांति के साथ करेगा।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें उन देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से क्यूबा को तेल बेचते हैं या आपूर्ति करते हैं। अमेरिकी प्रशासन ने क्यूबा को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक 'असाधारण खतरा' बताया है। इस आदेश के माध्यम से अमेरिका उन देशों को लक्षित कर रहा है जो क्यूबा की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायता करते हैं।
अमेरिकी कार्यकारी आदेश और सुरक्षा चिंताएं
अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में कहा गया है कि क्यूबा की सरकार रूस, चीन और ईरान जैसे देशों के साथ-साथ हमास और हिजबुल्लाह जैसे समूहों के साथ गठबंधन कर रही है और वाशिंगटन का तर्क है कि क्यूबा इन तत्वों को समर्थन प्रदान करता है, जो अमेरिका के हितों के खिलाफ काम करते हैं। इसी आधार पर ट्रंप प्रशासन ने तेल आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने के लिए टैरिफ को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है।
क्यूबा की प्रतिक्रिया और 'मातृभूमि या मौत' का संकल्प
राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के माध्यम से अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन शक्ति का दुरुपयोग कर क्यूबा की विदेश नीति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है। डियाज-कैनेल ने अपने संबोधन में ऐतिहासिक नारा 'मातृभूमि या मौत और ' दोहराते हुए कहा कि क्यूबा अपनी संप्रभुता के साथ समझौता नहीं करेगा। उन्होंने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और एक संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ आर्थिक युद्ध बताया।
आर्थिक प्रभाव और वैश्विक कूटनीति
विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह कार्यकारी आदेश पूरी तरह से लागू होता है, तो क्यूबा को ईंधन की भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। क्यूबा अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित तेल पर निर्भर है। वेनेजुएला और रूस जैसे देश ऐतिहासिक रूप से क्यूबा के प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहे हैं। अब इन देशों पर अमेरिकी टैरिफ का दबाव बढ़ने से वैश्विक व्यापार संबंधों में भी बदलाव आने की संभावना है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम क्यूबा पर अधिकतम दबाव बनाने की नीति का हिस्सा है। विश्लेषकों के अनुसार, तेल आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाने से क्यूबा के परिवहन, बिजली उत्पादन और औद्योगिक क्षेत्रों पर सीधा असर पड़ेगा। हालांकि, क्यूबा के नेतृत्व ने संकेत दिया है कि वे अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाएंगे और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर वैकल्पिक रास्तों की तलाश करेंगे और फिलहाल, इस आदेश ने कैरेबियाई क्षेत्र में अस्थिरता और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।