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मध्य पूर्व कूटनीति: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर सऊदी अरब के रुख में विरोधाभास की खबरें

मध्य पूर्व कूटनीति: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर सऊदी अरब के रुख में विरोधाभास की खबरें
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मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच चुका है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनियों और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सेना की भारी तैनाती के बीच सऊदी अरब की कूटनीतिक भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक ओर जहाँ रियाद सार्वजनिक मंचों पर क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान की संप्रभुता के सम्मान की वकालत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वॉशिंगटन से आ रही रिपोर्ट्स संकेत दे रही हैं कि बंद कमरों में सऊदी अरब का रुख अधिक कड़ा हो सकता है।

वॉशिंगटन में निजी ब्रीफिंग और सऊदी रक्षा मंत्री का रुख

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान (KBS) ने हाल ही में वॉशिंगटन में एक निजी ब्रीफिंग के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस बैठक में प्रिंस खालिद ने चिंता व्यक्त की कि यदि ईरान के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो तेहरान की क्षेत्रीय गतिविधियां और अधिक बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी रक्षा मंत्री का मानना है कि सैन्य कार्रवाई को टालना ईरान को भविष्य में और अधिक निडर बना सकता है। यह रुख सऊदी अरब के उन सार्वजनिक बयानों से भिन्न नजर आता है जिनमें तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान की बात कही गई है।

तीन सप्ताह के भीतर नीतिगत बदलाव के संकेत

राजनयिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि पिछले तीन हफ्तों में सऊदी अरब के रुख में बदलाव आया है और इससे पहले, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने कथित तौर पर अमेरिकी नेतृत्व से ईरान पर तत्काल हमला न करने का आग्रह किया था, जिसके बाद सैन्य कार्रवाई को टाल दिया गया था। हालांकि, हालिया घटनाक्रमों और वॉशिंगटन में हुई बैठकों के बाद विश्लेषकों का मानना है कि रियाद अब अमेरिकी प्रशासन के इरादों को भांपते हुए अपनी रणनीति को समायोजित कर रहा है। अमेरिकी सूत्रों के अनुसार, सऊदी नेतृत्व अब इस संभावना को देख रहा है कि यदि टकराव अपरिहार्य है, तो उसे किस तरह प्रबंधित किया जाए।

सार्वजनिक आश्वासन और हवाई क्षेत्र का मुद्दा

सऊदी अरब ने सार्वजनिक रूप से ईरान को आश्वासन दिया है कि वह अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का उपयोग ईरान पर हमले के लिए नहीं करने देगा और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरान के राष्ट्रपति के साथ फोन पर हुई बातचीत में स्पष्ट किया कि सऊदी अरब क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान करता है। आधिकारिक बयानों में लगातार शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और कूटनीति पर जोर दिया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह सार्वजनिक रुख क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित ईरानी जवाबी कार्रवाई से बचने की एक रणनीति हो सकती है, जबकि पर्दे के पीछे अमेरिका के साथ सुरक्षा सहयोग जारी है।

9 अरब डॉलर का पैट्रियट मिसाइल सौदा और रक्षा तैयारी

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच, अमेरिका ने सऊदी अरब को लगभग 9 अरब डॉलर की पैट्रियट एडवांस्ड कैपेबिलिटी-3 (PAC-3) मिसाइलें और संबंधित उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। पेंटागन के अनुसार, यह सौदा सऊदी अरब की हवाई रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए किया गया है और विश्लेषकों के अनुसार, इस बड़े रक्षा सौदे का समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे केवल एक व्यापारिक समझौते के रूप में नहीं, बल्कि संभावित संघर्ष की स्थिति में सऊदी अरब की सुरक्षा सुनिश्चित करने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। 9 अरब डॉलर का यह निवेश सऊदी अरब की रक्षात्मक मुद्रा को स्पष्ट करता है।

विश्लेषकों का दृष्टिकोण और क्षेत्रीय प्रभाव

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सऊदी अरब वर्तमान में एक जटिल कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक ओर वह ईरान के साथ अपने हालिया सुधरे संबंधों को बचाए रखना चाहता है, तो दूसरी ओर वह अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक रक्षा गठबंधन को कमजोर नहीं होने देना चाहता। विश्लेषकों का मानना है कि रियाद की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बड़े सैन्य टकराव की स्थिति में उसकी अपनी अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को नुकसान न पहुंचे और यही कारण है कि वह सार्वजनिक रूप से शांति की बात कर रहा है जबकि निजी तौर पर अपनी रक्षा प्रणालियों को मजबूत करने में जुटा है।

निष्कर्षतः, मध्य पूर्व की स्थिति वर्तमान में अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। सऊदी अरब की दोहरी रणनीति—सार्वजनिक कूटनीति और निजी सैन्य परामर्श—क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। आने वाले दिनों में अमेरिका की सैन्य तैनाती और ईरान की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि रियाद का यह कूटनीतिक संतुलन कितना प्रभावी साबित होता है।

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