रविवार की सुबह दिल्ली के जंतर-मंतर पर उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई जब संसद की ओर कूच कर रहे प्रदर्शनकारियों की रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के साथ झड़प हो गई। सीजेपी (CJP) द्वारा आयोजित यह संसद मार्च पुलिस की अनुमति न होने के बावजूद शुरू किया गया। नई दिल्ली जिले में वर्तमान में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है, जो बिना अनुमति के किसी भी प्रकार के जुलूस या सभा पर रोक लगाती है। इसके बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरे को तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके कारण सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प देखने को मिली।
दिल्ली पुलिस ने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की
सोशल मीडिया और मीडिया के कुछ हिस्सों में हिंसा और लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरों के बीच दिल्ली पुलिस ने एक्स (X) पर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर हिंसा या बड़े पैमाने पर हिरासत में लेने जैसी कोई घटना नहीं हुई है। पुलिस के अनुसार, विरोध-प्रदर्शन को पूरी तरह से पेशेवर तरीके से संभाला जा रहा है और दिल्ली पुलिस ने जनता से अनुरोध किया है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या गलतफहमी पर ध्यान न दें। पुलिस ने क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों से सहयोग की अपील की है और कानून को हाथ में न लेने की चेतावनी दी है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भारी बल की तैनाती
जंतर-मंतर से संसद तक के मार्ग को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है और सुरक्षा के लिहाज से यहां तीन लेयर की सुरक्षा बैरिकेडिंग की गई है। आंकड़ों के अनुसार, जंतर-मंतर पर इस समय 5000 से 6000 प्रदर्शनकारी मौजूद हैं। इनकी निगरानी और नियंत्रण के लिए 10000 से अधिक सुरक्षाबल के जवानों को तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए मार्ग पर आंसू गैस के गोले, लाठियां और वज्र वाहन भी तैनात किए गए हैं। नई दिल्ली जिले में लागू धारा 163 के तहत जंतर-मंतर के निर्धारित स्थल को छोड़कर कहीं भी 5 या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर सख्त पाबंदी है।
सोनम वांगचुक ने रखी अनशन खत्म करने की तीन शर्तें
इस विरोध प्रदर्शन के बीच सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के लिए सरकार के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा कर इन शर्तों का विवरण दिया है और उनकी पहली शर्त यह है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हालिया विफलताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करे। दूसरी शर्त के अनुसार, सोनम वांगचुक और सीजेपी के नेतृत्व को संसद तक जाने की अनुमति दी जाए और तीसरी शर्त में उन्होंने मांग की है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता यह भरोसा दिलाएं कि वे संसद में इन मुद्दों को उठाएंगे। वांगचुक ने यह भी कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों से उनका वहां होना संभव न हो, तो नेता अस्पताल आकर उन्हें इन मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दें।
डीसीपी सचिन शर्मा की कानूनी एडवाइजरी
पुलिस उपायुक्त (DCP) सचिन शर्मा ने रविवार को एक्स पर एक सार्वजनिक एडवाइजरी जारी कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने इस तरह के किसी भी विरोध मार्च या जुलूस के लिए कोई अनुमति नहीं दी है। नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है, जिसके तहत पूर्व अनुमति के बिना विरोध मार्च, जुलूस, प्रदर्शन और 5 या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पूर्ण प्रतिबंध है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल जंतर-मंतर पर निर्धारित स्थान पर ही पूर्व अनुमति के साथ प्रदर्शन किया जा सकता है। अधिकारियों ने लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।