एशियाई खेलों के कबड्डी इवेंट का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक और कड़ा रहा, जहां भारत और ईरान के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। यह फाइनल बहुत ही कड़े और करीबी मुकाबले के साथ शुरू हुआ, जहां एक-एक पॉइंट के साथ मैच की स्थिति लगातार बदल रही थी। खेल की शुरुआत में भारतीय टीम ने अपनी पकड़ मजबूत रखी थी और वे ईरान से आगे चल रहे थे। हालांकि, ईरान ने हार नहीं मानी और पहला हाफ खत्म होते-होते अपने कुछ दमदार टैकल्स के जरिए मैच में वापसी की। ईरान ने पहले हाफ के अंत तक भारत पर 18-17 की मामूली बढ़त हासिल कर ली थी, जिससे मैच काफी रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया था।
दूसरे हाफ में भारत की शानदार वापसी
दूसरे हाफ की शुरुआत भारतीय टीम के लिए चुनौतीपूर्ण रही क्योंकि ईरान ने अपनी बढ़त को बढ़ाकर 3 पॉइंट्स कर दिया था। लेकिन यहीं से भारतीय खिलाड़ियों ने अपने अनुभव और कौशल का परिचय देते हुए वापसी का सिलसिला शुरू किया। जयदीप और सुमित ने रक्षात्मक पंक्ति में जबरदस्त टैकल किए, जिन्होंने ईरानी रेडर्स को अंक लेने से रोका। वहीं दूसरी ओर, रेडिंग में अर्जुन ने कमाल का प्रदर्शन किया और अपनी रेड के दम पर भारतीय टीम के लिए खूब पॉइंट्स बटोरे। भारत के इस आक्रामक और रक्षात्मक तालमेल ने ईरान को दबाव में डाल दिया और उन्हें गलतियां करने के लिए मजबूर किया।
स्कोरकार्ड और जीत का अंतर
मैच के दूसरे हाफ में भारत का दबदबा पूरी तरह से साफ नजर आया। इस हाफ में ईरान की टीम केवल 16 पॉइंट ही बटोर सकी, जबकि भारतीय टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए 23 पॉइंट हासिल किए। इसी दमदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने मैच को अपने नाम कर लिया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। खिलाड़ियों के बीच के तालमेल और सही समय पर की गई वापसी ने भारत को एक बार फिर एशिया का किंग बना दिया।
एशियन गेम्स में भारत का स्वर्णिम इतिहास
एशियन गेम्स कबड्डी के इतिहास में भारत का यह कुल 9वां गोल्ड मेडल है। इन खेलों में अभी तक कुल 10 बार मेंस कबड्डी के इवेंट आयोजित किए गए हैं। भारत का रिकॉर्ड इन खेलों में अविश्वसनीय रहा है, जहां टीम ने 10 में से 9 बार फाइनल में अपनी जगह बनाई है। सबसे खास बात यह है कि भारत जितनी भी बार फाइनल में पहुंचा है, उतनी ही बार यानी सभी 9 बार चैंपियन बनकर ही लौटा है। भारत के इस विजय रथ को केवल 2018 में ही निराशा हाथ लगी थी, जब ईरान ने उसे सेमीफाइनल में ही हरा दिया था। उसी साल ईरान ने गोल्ड मेडल भी अपने नाम किया था, लेकिन इस बार भारत ने उस हार का हिसाब चुकता करते हुए फिर से गोल्ड मेडल हासिल कर लिया है।